व्यापम घोटाले का नया अवतार 2.0
व्यापम घोटाले (Vyapam Scam) के लिए कुख्यात मध्य प्रदेश की मामा सरकार में एक और भर्ती घोटाला सामने आया है। व्यापम कांड तो आपको याद ही होगा लेकिन एक बार फिर से शिवराज सरकार पर बड़े घोटाले का आरोप लगा है। पटवारी भर्ती परीक्षा (Patwari Recruitment Exam) में एक ही कॉलेज के सात छात्रों ने टॉप किया है। प्रदेश की सियासत में यह मामला गर्माता जा रहा है, दरअसल मार्च-अप्रैल 2023 में हुई पटवारी परीक्षा में ग्रुप 2, सब ग्रुप 4 की मेरिट लिस्ट में टॉप 10 में से 7 बच्चों का सेंटर NRI कॉलेज ग्वालियर (NRI College Gwalior) था यानि 9 हज़ार चयनित अभ्यर्थियों में से लगभग 1 हज़ार चयनित अभ्यर्थियों का सेंटर NRI कॉलेज था। ये कॉलेज BJP विधायक संजीव कुशवाह (Sanjeev Kushwaha) का है। इसे लेकर कांग्रेस (Congress) ने BJP पर जमकर निशाना साधा है। कांग्रेस ने सवाल उठाए है कि BJP नेता के कॉलेज से ही क्यों 10 में से 7 टॉपर है ? बता दें कि साल 2020 में भी कृषि विस्तार अधिकारी परीक्षा में यही हुआ था, तब एक क्षेत्र से एक जाति के टॉपर सामने आए थे। सरकार ने जाँच कर उस परीक्षा को ही रद्द किया था।बाद में फिर से परीक्षा करवाई गयी, सवाल उठता है तो क्या इस बार भी पटवारी परीक्षा में भी यही हुआ है ? इस सवाल पर कांग्रेस नेता अरुण यादव (Arun Yadav) का आरोप है की कॉलेज BJP विधायक का, सरकार BJP की। ये एक बड़ा घोटाला है और इसकी जाँच होनी चाहिए।
वही इस पुरे मामले को लेकर इंदौर में NEYU के बैनर तले हजारों छात्र कलेक्टोरेट पहुंचे जहां उन्होंने पटवारी परीक्षा की पूरी जानकारी देने की मांग की और अपना ज्ञापन सौंपा। अपने ज्ञापन में NEYU छात्रों (NEYU Students) ने 10 दिनों में इस मामले की जाँच की मांग की है। इस मामले प्रियंका गांधी (Priyanka Gandhi) ने ट्वीट करते हुए कहा "मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार के शासन में एक बार फिर भर्ती में घोटाले की खबरें आ रही हैं। नौकरियों के लिए पदों की लाखों रुपए में बोली लगाए जाने की खबरें हैं और सरकार जांच कराने से क्यों कतरा रही है? भर्ती घोटालों से जुड़े होने के आरोप में भाजपा नेताओं का नाम ही क्यों सामने आता है? नौकरी के लिए भर्तियों में केवल घोटाले ही घोटाले हैं। भाजपा सरकार लाखों युवाओं का भविष्य अंधकार में क्यों डाल रही है?"
मध्यप्रदेश कांग्रेस (Madhya Pradesh Congress) के कद्दावर नेता कमलनाथ (Kamalnath) ने भी इस मामले में शिवराज सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि "मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार के शासन में एक बार फिर भर्ती में घोटाले की खबरें आ रही हैं। नौकरियों के लिए पदों की लाखों रुपए में बोली लगाए जाने की खबरें हैं और सरकार जांच कराने से क्यों कतरा रही है? भर्ती घोटालों से जुड़े होने के आरोप में भाजपा नेताओं का नाम ही क्यों सामने आता है? नौकरी के लिए भर्तियों में केवल घोटाले ही घोटाले हैं। भाजपा सरकार लाखों युवाओं का भविष्य अंधकार में क्यों डाल रही है?"
गौरतलब है कि व्यापम को मध्य प्रदेश ही नहीं, देश के सबसे बड़े घोटालों में से एक माना जाता है। यही वजह थी कि इसकी जांच की आंच कारोबारियों और नौकरशाहों से लेकर नेताओं की गर्दन तक पहुंच गई थी। व्यापम घोटाला उजागर होने का सिलसिला साल 2013 में शुरू हुआ, जब इंदौर से 7 'मुन्नाभाई' पकड़े गए यानी ये सातों मूल परीक्षार्थियों की जगह पीएमटी में शामिल होने आए थे। इसके बाद व्यापम घोटाले की परत दर परत खुलने लगी। एक के एक करके कई गिरफ्तारियां हुईं। इस घोटाले से जुड़े 48 लोगों की रहस्यमयी हालात में मौत भी हो गई। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि व्यापमं के तार कितने ताकतवर लोगों से जुड़े थे। घोटाले में कुल ढाई हजार से ज्यादा लोग आरोपी बने और तकरीबन 2 हजार लोगों की गिरफ्तारी हुई। व्यापमं के लपेटे में वरिष्ठ नौकरशाहों से लेकर मंत्री तक आ गए। इसकी जांच के लिए स्पेशल टास्क फोर्स (Special Task Force) (STF) बनी। लेकिन जुलाई 2015 में यह मामला CBI के हवाले कर दिया गया।
CBI की जांच अभी तक पूरी नहीं हो पाई है। अभी भी व्यापम से जुड़ी करीब डेढ़ हजार शिकायतें लंबित हैं। इनकी भी अपनी अलग कहानी है। दरअसल, जब STF घोटाले की जांच कर रही थी, तो उसे व्यापम की कई अन्य परीक्षाओं में भी गड़बड़ियां मिलने लगीं। फिर उसने एक विज्ञापन जारी किया। इसमें कहा गया कि व्यापम से जुड़ी जो भी शिकायतें हैं, उन्हें दस्तावेजों के साथ STF के पास लेकर आएं। आमजन की शिकायतों को भी जांच में लाया जाएगा। STF के पास दस्तावेजों के साथ करीब डेढ़ हजार शिकायतें पहुंच गईं। जब मामले की जांच CBI को सौंपी गई, तो उसने सिर्फ उन्हीं मामलों को अपने पास लिया, जो STF के पास दर्ज थे। ऐसे में व्यापम से जुड़ी कई अहम शिकायतें आज भी लंबित हैं, जिनका निराकरण आज तक भी नहीं हो सका है ऐसे में एक बार फिर से शिवराज सरकार में घोटाला सामने आया है अब देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इसकी पारदर्शिता से कब तक जांच करेगी।
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