बांग्लादेश की स्थापना के समय से ही भारत के साथ उसके अच्छे संबंध रहे है। पिछले साल नई दिल्ली में हुए जी-20 सम्मेलन में भी भारत ने बांग्लादेश को ही विशेष निमंत्रण दिया था जो एकमात्र भारत का पड़ोसी देश था जो इस सम्मेलन में शामिल हुआ। शेख हसीना पिछले 15 साल से देश की सत्ता पर काबिज थीं। बांग्लादेश में अवामी लीग की शेख हसीना के अलावा बीएनपी की खालिदा जिया भी एक प्रमुख राजनीतिक चेहरा है। विदेश मामलों की जानकारी रखने वाले विशेषज्ञों के अनुसार, भारत बांग्लादेश में अवामी लीग की सरकार चाहता है। इसकी वजह यह है कि बीएनपी का झुकाव इस्लामिक कट्टरपंथियों की तरफ़ रहा है। वो हमेशा से ही पाकिस्तान की वकालत करती रही है। दूसरी ओर, अवामी लीग लिबरल, डेमोक्रेटिक और सेक्युलर देश में विश्वास रखती है। इसी वजह से भारत बांग्लादेश में अवामी लीग की सरकार चाहता है।
भारत चाहता है अवामी लीग की सरकार
सुरक्षा की नज़रिय से देखे तो भारत की सीमा बांग्लादेश से लगभग चार हजार किलोमीटर लगती है, जो अन्य पड़ोसी देशो की तुलना में सबसे अधिक है। चीन और पाकिस्तान जैसे देशों की चुनौतियों को देखते हुए भारत बांग्लादेश में ऐसी सरकार चाहता है, जिससे उसके अच्छे संबंध हो। विदेश मामले के जानकार मानते है कि शेख हसीना से पहले की सरकार ने उत्तर पूर्वी भारत में अलगाववादियों को पनाह देने में अहम भूमिका निभाई थी। बांग्लादेश से पूर्वोत्तर भारत में अलगाववादी आंदोलन को जिस तरह से समर्थन मिल रहा था, उसे समाप्त करने में भी शेख हसीना ने अहम भूमिका निभाई है। ऐसे में अगर शेख हसीना बांग्लादेश की सत्ता में नहीं रहती तो भारत के लिए यह एक अच्छी स्थिति नहीं है।
व्यापार की दृष्टि से देखे, तो दक्षिण एशिया में बांग्लादेश भारत का सबसे बड़ा व्यापार साझीदार है। कोरोना महामारी के बावजूद दोनों देशों के बीच साल 2020-21 में 10.78 मिलियन डॉलर का व्यापार रहा। साल 2021-22 में व्यापार समझौता में 44 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई, जो करीब 18.14 मिलियन डॉलर पंहुचा। बिजली और ऊर्जा के क्षेत्र में भी दोनों देश मिलकर कई परियोजना में काम कर रहे है। बांग्लादेश इस समय भारत से 1160 मेगावाट बिजली भारत से आयात कर रहा है। भारत ने पिछले एक दशक में बांग्लादेश को सड़क, रेलवे, बंदरगाहों के निर्माण के लिए हजारों करोड़ रुपये दिए हैं।





