
विरोध थमने का नाम नहीं ले रहा था जिसको देखते हुए "राजेंद्र पाल गौतम ने ट्वीट कर दिल्ली सरकार के मंत्री पद से अपना इस्तीफा दे डाला और उसमें लिखा कि भारतीय जनता पार्टी गुजरात चुनाव से डरकर मेरे नेता अरविंद केजरीवाल और मेरी पार्टी आम आदमी पार्टी को बदनाम करना चाहती है जिससे मैं आहत हूं और मैं अपने मंत्री पद से इस्तीफा दे रहा हूं।"
लेकिन मामला कुछ और ही था इस्तीफा देने के तुरंत बाद ही तमाम दलित संगठन और दलित समाज के लोगों ने अरविंद केजरीवाल को दलित विरोधी कहते हुए लिखना शुरु कर दिया। ऐसा लगने लगा कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने गुजरात चुनाव के डर से अपने मंत्री से इस्तीफा दिलवा दिया है ना कि राजेंद्र पाल गौतम ने इस्तीफा दिया है।

जिसके बाद तमाम दलित संगठनों के साथ मिलकर राजेंद्र पाल गौतम ने दिल्ली में एक पद-यात्रा निकाली जिसमें अरविंद केजरीवाल मुर्दाबाद को दलित विरोधी अरविंद केजरीवाल के नारे सुनाई दिए। उस पद यात्रा के बाद राजेंद्र पाल गौतम के सुर भी बदलते हुए दिखाई दिए जैसे कि उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा "अगर पार्टी और समाज को चुनने में कभी बात आएगी तो मैं समाज को सर्वोपरि मानूंगा और चुनूंगा।" राजेंद्र पाल गौतम को दिल्ली पुलिस का नोटिस मिला है नोटिस मिलने के बाद अरविंद केजरीवाल एवं पार्टी के तमाम नेताओं की चुप्पी ने कई हद तक साबित कर दिया कि राजेंद्र पाल गौतम इस्तीफा दिया नहीं, बल्कि अरविंद केजरीवाल द्वारा इस्तीफा दिलाया गया है।
अब बात राजेंद्र पाल गौतम के भविष्य की करें तो दलित समाज में ऐसे तमाम नेता हुए जिन्होंने चार दिन की मीडिया लाइमलाइट के चक्कर में अपना भविष्य दांव पर लगा दिया और समाज से उन्हें सिर्फ आखिर में धोखा मिला। जिसमें सबसे पहले नाम आता है चंद्रशेखर आजाद का जो कि भीम आर्मी के प्रमुख हैं। जिन्हें मीडिया ने सहारनपुर कांड के बाद इतना कवरेज दिया यह दलित समाज के बड़े नेता के रूप में उन्हें समझा जाने लगा लेकिन उत्तर प्रदेश के चुनावी नतीजे उनको वापस वहीं ले आए।

दूसरा नाम आता है जयप्रकाश जिन्हें मायावती ने बहुजन समाज पार्टी राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया। 4 दिन की मीडिया कवरेज के बाद कांग्रेस के नेता राहुल गांधी को लेकर विवादित टिप्पणी कर बैठे जिसके बाद मायावती ने जयप्रकाश को पार्टी से बाहर निकाल दिया।

क्या राजेंद्र पाल गौतम को अपना राजनीतिक भविष्य तलाशते हुए नए दलों की ओर रुख करना चाहिए ?
जिस आम आदमी पार्टी ने उनके साथ विश्वासघात किया है, क्या पूरा दलित समाज आहत है ?
राजेंद्र पाल गौतम को तय करना है कि वह इस ओर अपना क्या रुख मोड़ते हैं ?
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