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Uniform Civil Code : यूसीसी पर BJP का बवाल, सहयोगी दलों में हुई आपसी फूट !

Uniform Civil Code : यूसीसी पर BJP का बवाल, सहयोगी दलों में हुई आपसी फूट !
फोटो: Uniform Civil Code : यूसीसी पर BJP का बवाल, सहयोगी दलों में हुई आपसी फूट !
यूनिफॉर्म सिविल कोड (Uniform Civil Code) को लेकर सियासी बवाल मचा हुआ है, इस बीच ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (All India Muslim Personal Law Board) की तरफ से एक बड़ी बैठक की गई। बैठक के बाद बोर्ड ने मुस्लिम समाज के लोगों से अपील की है कि UCC का विरोध किया जाए। उधर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के विरोध के बीच संत समाज भी सरकार के समर्थन में उतर आया है। संत समाज ने एक समान नागरिक संहिता का किया और सरकार से मांग कि, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड को ही बैन कर देना चाहिए। ऐसे में UCC को लेकर देश दो भाग में बंट चुका है। UCC को लेकर जमकर राजनीति भी की जा रही है, और इस राजनीति की बिसात को 2024 से जोड़ कर भी देखा जा रहा है।


 

All India Muslim Personal Law Board

 


अमेरिका से देश वापस लौटे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने भोपाल में जनता के सामने सीधा संवाद किया, कई वादे भी किए, तो कई बातों पर इशारों-इशारों पर अपनी मंशा भी जाहिर की। ऐसे में यूनिफॉर्म सिविल कोड लाने के लिए भी संकेत दिए थे। उधर मोदी जी इशारा किया इधर देश भर में विरोध के स्वर उठने लगे। विपक्ष की बात तो छोड़िए, भाजपा के सहयोगी दल भी इसके विरोध में आवाज उठाने लगे है। AIADMK के चीफ के. पलानी स्वामी (K. Palaniswami) ने साफ कहा है कि - "2019 लोकसभा चुनाव में हमने अपने घोषणापत्र साफ कहा था, धर्मनिरपेक्षता के तहत हम सरकार से समान नागरिक संहिता के लिए संविधान में कोई भी संशोधन नहीं करने का आग्रह करेंगे।" ऐसे में जब पलानीस्वामी से पूछा गया कि "क्या आप बीजेपी के साथ गठबंधन में रहेंगे ?" इस पर पलानी स्वामी ने एकटूक में जवाब दिया - "अभी चुनाव में 1 साल का समय बाकी है।" वहीं पूर्वोत्तर में भाजपा के सहयोगी दल नेशनल पीपुल्स पार्टी (National People's Party) के चीफ और मेघालय के सीएम कॉनराड संगमा (Conrad Sangma) ने UCC 30 जून को बयान दिया कि समान नागरिक संहिता भारत के वास्तविक विचार के विपरीत है। भारत एक विविधतापूर्ण देश है, विविधता ही हमारी ताकत है।


Narendra Modi)

 


पंजाब में भाजपा की सहयोगी रही शिरोमणि अकाली दल (Shiromani Akali Dal) ने भी UCC का विरोध किया है। शिरोमणि अकाली दल के दिल्ली स्टेट चीफ परमजीत सिंह सरना ने कहा कि भविष्य के किसी भी तरह के गठबंधन की सोच से पहले भाजपा को UCC को सिरे से खारिज करना होगा। उन्होंने कहा कि "बिना कोई मसौदा सामने रखे, लॉ कमीशन द्वारा धार्मिक संस्थाओं से समान नागरिक संहिता पर सलाह कैसे मांग सकती है?" ऐसे में मुस्लिम समुदाय ने भी इसका विरोध किया है। ऑल इण्डिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने UCC पर अपनी जो दलील रखी है उसे भी समझिए।


Shiromani Akali Dal also opposed UCC

 

UCC पर AIMPLB की दलील -

  • धार्मिक मामलों में दखल है सिविल कोड,
  • UCC के प्रावधान शरीयत के तहत नहीं,
  • शरीयत के तरीके में बदलाव मंजूर नहीं,
  • शरीयत कानून में महिलाओं को संरक्षण,
  • महिलाओं पर कानून की जरूरत नहीं है,
  • हिंदू रिवाज थोपने की कोशिश का शक।


UCC पर ड्राफ्ट में क्या है ? जिसको लेकर इस पर इतना हंगामा मचा हुआ है -

  1. हलाला, इद्दत, बहुविवाह पर रोक,
  2. मुस्लिम लड़की की 15 नहीं 18 साल में शादी,
  3. मुस्लिम महिला को गोद लेने का अधिकार,
  4. मुस्लिम महिला को पिता की संपत्ति में हिस्सा, 
  5. मुस्लिम महिला दे सकती है तलाक।

UCC पर केंद्र सरकार ने क्या कहा है - 

यूनिफॉर्म सिविल कोड -

  • भारत के हर नागरिक के लिए समान कानून,
  • धर्म-जाति कोई भी, सभी पर एक कानून लागू,
  • शादी, तलाक जैसे मामले में एक समान कानून,
  • जमीन-जायदाद के बंटवारे पर एक कानून लागू,
  • विरासत, गोद लेने के मामले में एक कानून।

ऐसे में जहां भारत (India) विविधताओं का देश है, जहां कई धर्म के लोग रहते है। वहां अगर UCC को लागू करना हो, तो सबकी सहमति और विचार करके लागू करना चाहिए, ना कि बिना किसी से बात या विचार कर सीधे मसौदे को सदन में लाने की तैयारी करनी चाहिए। हांलाकि UCC पर केंद्र जमकर राजनीति करने की मंशा पर है, ताकि 2024 की लोकसभा चुनाव (2024 Lok Sabha Elections) की बिसात इसी तर्ज बिछाई जाए।



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