हाथरस केस में ईडी ने अपनी जांच में भीम आर्मी और पीएफआई के कथित संबंधों को झूठा करार दिया है. ईडी ने यह भी कहा कि हाथरस कांड में कोई विदेशी फंडिंग नहीं हुई थी. विदेशों से 100 करोड़ आने की बात झूठ है.
गौरतलब है कि यूपी पुलिस ने हाथरस में हुए कथित गैंगरेप और हत्याकांड में अंतरराष्ट्रीय साजिश की बात कही थी. पुलिस ने यह भी कहा था कि पीएफआई और भीम आर्मी के आपसी संबंध से हाथरस में तनाव का माहौल बनाया गया.
यह भी कहा जा रहा था कि हाथरस गैंगरेप में 100 करोड़ की फंडिंग हुई थी. हाथरस कांड पर सीएम योगी ने भी कहा था कि राज्य में जातीय और सांप्रदायिक दंगा भड़काने के लिए अंतरराष्ट्रीय साजिश रची जा रही है.
हाथरस कांड में कथित अंतरराष्ट्रीय साजिश पर यूपी पुलिस ने राज्य में 19 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज किए थे और करीब 400 लोगों के खिलाफ राजद्रोह, षणयंत्र, राज्य में अशांति फैलाने के प्रयास और सांप्रदायिक तनाव को बढ़ावा देने जैसे आरोप लगाए गए थे.
सबसे दिलचस्प बात ये है कि न तो इसके अभी तक कोई सबूत मिले हैं और न ही आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि की गई है. ईडी ने अपनी जांच में पीएफआई कनेक्शन, 100 करोड़ की विदेशी फंडिंग जैसी बातों को झूठ करार दिया है.
इससे पहले CAA प्रोटेस्ट के समय भी राज्य के कई हिस्सों में प्रोटेस्ट हुए थे, उस दौरान कई शहरों में हिंसा की आग भड़क उठी थी. हिंसा में कई लोगों की जान भी गई. उस दौरान भी सरकार ने इसे अंतरराष्ट्रीय साजिश करार दिया था, पीएफआई कनेक्शन बताया था, यही नहीं इस्लामिक देशों की करतूत भी कहा गया था.
योगी सरकार के कार्यकाल को अगर देखा जाए तो अभी तक जितनी भी हिंसा की घटनाएं हुई हैं, उनमें उन्होंने अंतरराष्ट्रीय साजिश बताकर पल्ला झाड़ लिया है. हमने यह भी देखा है कि किसी भी घटना के लिए यह अंतरराष्ट्रीय साजिश किसी ‘टाइम पास’ से कम नहीं है. इसके बदौलत सरकार नैरेटिव बदल देती है, अपने गुनाहों को एक पर्दे में ढकने का प्रयास करती है.
किसी भी घटना, वारदात के दो-चार हफ्ते बीतते हैं और सुनने में आता है कि गैंगरेप, हत्या, जातीय वर्चस्व, आधी रात को परिजनों के इजाजत के बगैर रेप पीड़िता का अंतिम संस्कार करना अफवाह हैं.असलियत तो अतंरराष्ट्रीय साजिश, पीएफआई, नक्सल एंगल और बाहर की फंडिंग है. लोगों का ध्यान वास्तविक मुद्दे से हटकर एक कॉन्सपिरेसीपर चली जाती है.
सरकार कहती है कि हाथरस, सीएए जैसी तमाम घटनाओं में अंतरराष्ट्रीय साजिश हुई थी. लेकिन सवाल ये उठता है कि ऐसे मामलों में हमारी खुफिया एजेंसी, पुलिस को क्यों नहीं खबर लगती. आखिर वे ऐसी सो कॉल्ड साजिशों को पहले ही क्यों नहीं रोकने का प्रयास करते? सच तो ये है कि सरकार ने ऐसी तमाम साजिशों के दम पर अपनी नाकामियों को छुपाया है या यूं कहें कि ‘टाइम पास’ किया है. मालूम हो कि ऐसे मामलों में न तो कोई पुख्ता सबूत मिलते हैं और न ही चार्जशीट फाइल की जाती है.
जहां तक हाथरस मामले का सवाल है, ईडी ने भीम आर्मी से पीएफआई का कनेक्शन और विदेशों से 100 करोड़ की फंडिंग की बात को झूठ करार दिया है. नक्सल एंगल वाली संदिग्ध महिला भी पुलिस से सबूत मांग रही है. लेकिन सरकार ‘अंतरराष्ट्रीय साजिश’ के तहत टाइम पास कर रही है. जांच में अभी तक सरकार के दावे गलत ही साबित हुए हैं.
हाथरस जैसी घटनाओं का सच तो ये है कि गैंगरेप, हत्या, जातीय वर्चस्व, रात के अंधेरे में पुलिस की करतूत जैसी बातें सिर्फ दो-चार दिन के लिए होती हैं. असली मुद्दे तो नक्सल एंगल, पीएफआई, अंतरराष्ट्रीय साजिश हो जाते हैं जो कई हफ्तों तक सरकार घुमाती रहती है. फिलहाल, इन तमाम मुद्दों पर सरकार जांच कर रही है, अब कथित नक्सल, विदेशी फंडिंग गिरोह बेनकाब होते हैं या नहीं देखने वाली बात होगी.
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