गैर भाजपा शासित राज्य के मुख्यमंत्रियों ने बज़ट पर सवाल उठाते नज़र आए जिसमें मुख्यतः कांग्रेस नेता प्रो. गौरव वल्लभ, पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री पी॰ चिदंबरम, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, कांग्रेस नेता और कवि इमरान प्रतापगढ़ी, RJD सांसद मनोज झा, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश के साथ कई और नेताओं का नाम शामिल है। जिससे क़यास लगाए जा रहे कि वर्तमान बज़ट केंद्र सरकार को मुश्किल में डाल सकता है।
नेताओं की प्रतिक्रिया --
कांग्रेस नेता प्रो. गौरव वल्लभ - "यह बजट अहमदाबाद की 'GIFT City' को फोकस कर रहा है। उसको एक मेजर बिजनेस हब के तौर पर बढ़ाना चाहता है और उसे फाइनेंशियल सेंटर के रूप में डेवलप करना चाहता है।"
पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री पी॰ चिदंबरम - "इस बजट से किसे फायदा हुआ है? निश्चित रूप से, गरीब को नहीं, नौकरी की तलाश कर रहे युवा को नहीं, नौकरी से निकाले जाने वाले युवा को नहीं, करदाता को नहीं और गृहिणी को भी नहीं।"
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल - "छत्तीसगढ़ के लिए इस निराशाजनक बजट में कुछ भी नहीं है।वहीं आगे कहा कि इसे निर्मला जी का निर्मम बजट कहा जा सकता है। इस बजट को चुनाव को देखते हुए बनाया गया है। इसमें किसी को कोई सहुलियत नहीं दी गई है। पहले एयरपोर्ट के विकास के लिए हजारों करोड़ रुपए दिए गए और फिर उसे निलाम कर दिया गया।"
कांग्रेस नेता और कवि इमरान प्रतापगढ़ी - "क्या यही है सबका साथ - सबका विकास ? पहले मौलाना आज़ाद फेलोशिप बंद करना और अब अल्पसंख्यक मंत्रालय के बजट में 38% की कटौती।"
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू - "यह सिर्फ एक रस्म अदायगी वाला बजट है। कई योजनाएं होनी चाहिए थी बेरोजगारी, मनरेगा से जुड़ी योजना होनी चाहिए थी। अगर सरकार चाहती तो एक स्पेशल ग्रांट देती क्योंकि हिमाचल पर 75,000 करोड़ का कर्ज़ है।"
RJD सांसद मनोज झा - "मैंने वित्त मंत्री को कई बार कहा है कि जब भी बजट बनाए तो अनुच्छेद 39 को देख लें। संविधान से आंखें मूंद कर स्तुति गान वाला बजट बनाते हैं तो कुछ हासिल नहीं होगा। रोजगार के लिए आपने गोल-गोल बातें की। ये बजट खास लोगों का खास लोगों द्वारा खास तरह से बनाया बजट है।"
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान - "पहले गणतंत्र दिवस से पंजाब गायब था अब देश के बजट से पंजाब गायब है। पंजाब बॉर्डर स्टेट है जिसके तहत BSF को अपग्रेड करने और राज्य के बाकी कार्य के लिए 1,000 करोड़ रुपए की मांग की गई थी लेकिन उसका कोई जिक्र नहीं किया गया।"
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल - "इस बजट में महंगाई से कोई राहत नहीं, उल्टे इस बजट से महंगाई बढ़ेगी और बेरोज़गारी दूर करने की कोई ठोस योजना नहीं बनाई। वहीं शिक्षा बजट 2.64% से 2.5% घटाकर करना दुर्भाग्यपूर्ण, साथ ही स्वास्थ्य बजट 2.2% से 1.98% घटाकर करना हानिकारक है। इस दौरान आगे लिखा कि दिल्ली वालों के साथ फिर से सौतेला बर्ताव। दिल्ली वालों ने पिछले साल 1.75 लाख करोड़ से ज़्यादा इनकम टैक्स दिया। उस में से मात्र 325 करोड़ रुपये दिल्ली के विकास के लिए दिए, ये तो दिल्ली वालों के साथ घोर अन्याय है।"
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश - "केन्द्र सरकार द्वारा पेश किया गया आम बजट निराशाजनक है, इसमें दूरदृष्टि का अभाव है। हर वर्ष बजट की प्राथमिकताएं बदल दी जाती हैं, जो फोकस और निधि के अभाव में पूरी नहीं हो पा रही हैं। बिहार को इस बजट से निराशा हाथ लगी है और एक बार फिर विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग की अनदेखी की गई है। समावेशी विकास का सपना बिहार जैसे राज्यों को आगे बढ़ाये बिना संभव नहीं है। वही आगे लिखा कि बिहार सरकार ने अपने ज्ञापन में इसे 4.5% (4% एवं 0.5% सशर्त) तक रखने का आग्रह किया था, जो पिछड़े राज्यों के विकास में तथा नए रोजगार सृजन में लाभप्रद होता।"
देखा जाए तो बज़ट पेश होने के बाद तमाम ऐसे वाद-विवाद देखने, सुनने और पढ़ने को मिल रहे है। एक नज़र में देखा जाए तो बज़ट में बीते वर्ष के बज़ट के मुक़ाबले कटौती की गई है जो साफ नज़र आ रही है।
आंकड़ों की बात करें तो 2023-24 के अल्पसंख्यक मंत्रालय के लिए बजट में बीते वर्ष के मुकाबले करीब 38% की कमी की गई है और बजट को घटाकर 3097.60 करोड़ रुपये कर दिया जो कि 2022-23 वित्त वर्ष के लिए पेश किए बजट में 5020.50 करोड़ रुपये जारी हुए थे।
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