
इंटरमीडिएट में पढ़ाई जाने वाली इतिहास की किताब में 'भारतीय इतिहास के कुछ विषय-द्वितीय' से शासक और मुगल दरबार को हटाया दिया गया है। इसके तहत बच्चों को अकबरनामा और बादशाहनामा, मुगल शासक और उनका साम्राज्य, राजधानियां और दरबार, पदवियां, शाही परिवार, शाही नौकरशाही, मुगल अभिजात वर्ग, सूचना तथा साम्राज्य जैसे बिन्दुओं को पहले पढ़ाया जाता था।
जानकारी के मुताबिक, राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने सत्र 2023-2024 से सत्र से ही हटाने का फैसला किया है। इतिहास की किताब से मुग़ल दरबार के पाठ को हटाया गया है, इसके अलावा 11वीं की इतिहास की किताब से इस्लाम का उदय, औद्योगिक क्रांति, संस्कृतियों में टकराव और समय की शुरुआत पाठ हटाए गए है। नागरिक शास्त्र की किताब से शीत युद्ध और अमेरिकी वर्चस्व युध्द का पाठ भी हटाया गया है। राजनीति की किताब से जन आंदोलनों का उदय और एक दल के प्रभुत्व का दौर चैप्टर हटाया गया है। इसके अलावा, 10वीं की लोकतांत्रिक राजनीति 2 की किताब से लोकतंत्र और विविधता, जनसंघर्ष और आंदोलन, लोकतंत्र की चुनौतियां पाठ हटाए गए। कक्षा 12वीं की नागरिक शास्त्र के किताब से समकालीन विश्व राजनीति, अमेरिकी वर्चस्व और शीतयुद्ध का दौर से संबंधित पाठ भी हटा दिया गया है।

योगी सरकार के इस कदम पर यूपी के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने कहा- 'हमारी संस्कृत हमारी सांस्कृतिक विरासत है. हम अपनी नई पीढ़ी का परिचय विरासत से कराना चाहते हैं. पुराने काल में लोगों को हमारी संस्कृति से वंचित किया जा रहा था.लोगों को बताया नहीं जा रहा था. हम लोगों को असली संस्कृति के बारे में बताएंगे।'
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