
मणिपुर को लेकर लगातार पांचवें दिन 26 जुलाई को संसद में हंगामा होता रहा, इस दौरान विपक्ष के द्वारा लाया गया अविश्वास प्रस्ताव (No Confidence Motion) को स्पीकर ने मंजूर कर लिया है। फिर सवाल एक ही उठता है कि मणिपुर को केंद्र सरकार तीन महीनों तक जलते हुए कैसे छोड़ सकती है? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संसद में मणिपुर पर बोलने को तैयार नहीं हैं, वहीं मणिपुर के सीएम एन बीरेन सिंह (N Biren Singh) अपने पद से इस्तीफा देने को तैयार नहीं हैं। ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ का नारा देने वाली सरकार बेटियों के दुष्कर्म के बाद सिर्फ दुख जता पाती है।

दो महिलाओं को निर्वस्त्र कर परेड कराने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद से विपक्ष मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह के इस्तीफे की मांग उठा रहा है। एक टीवी चैनल से बात करते हुए सीएम बीरेन सिंह ने इस्तीफे को लेकर कहा कि वो सीएम पद से इस्तीफा नहीं देंगे, क्योंकि उनकी पहली जिम्मेदारी राज्य में कानून व्यवस्था को स्थापित करना है। उन्होंने कहा कि मणिपुर की जनता ने उन्हें चुना है, इसलिए, "इस्तीफे का सवाल ही नहीं उठता है, लेकिन हां, अगर केंद्रीय नेतृत्व कहता है और मणिपुर की जनता चाहेगी तो मैं अपना पद छोड़ दूंगा।" मणिपुर में महिलाओं की हत्या और दुष्कर्मों को लेकर सरकार की तरफ से उठाए गए कदमों पर जब उनसे सवाल किया गया, तब उन्होंने कहा कि "कुल 6,068 एफआईआर में से एक दुष्कर्म का भी मामला है, वहीं पिछले हफ्ते कार सर्विस सेंटर पर दो महिलाओं की हत्या के मामले में दुष्कर्म की पुष्टि नहीं हुई है।"

संसद के बाहर से लेकर सड़कों पर भी कई राजनीतिक दलों से लेकर स्टूडेंस और आम जनता प्रधानमंत्री के मौन रहने पर सवाल उठा रहे हैं और पूछ रहे हैं कि "मणिपुर हिंसा पर पीएम मोदी मौन क्यों?" मणिपुर को लेकर अलग-अलग वीडियो सामने आ रही हैं जो मानवता को खत्म होता हुआ दिखा रही है। कही लाशों की आंखों को नूच लिया गया है, तो कही महिलाओं के साथ दुष्कर्म. तो कही जवान के द्वारा महिला के साथ अभ्रदता का वीडियो सामने आ रहा है।

आज़ादी के 75 साल पूरे होने के बाद भारत की स्थिति ये है कि महिलाओं के साथ हो रहे अपराध को हर कोई राजनीतिक बना रहा है। बीजेपी के नेता कांग्रेस और विपक्षी दलों के नेताओं पर महिलाओं को लेकर सवाल उठा रहे हैं। वहीं कांग्रेस भी अपने राज्य में महिलाओं के साथ हो रहे दुष्कर्म को लेकर आवाज़ उठाने वाले मंत्री को बर्खास्द कर अपनी तागत दिखा रही है। मणिपुर के साथ-साथ राजस्थान, छत्तिसगढ़, बिहार, दिल्ली, उत्तर प्रदेश समेत तमाम राज्यों में महिलाओं को लेकर कानून सिर्फ कागजों में बचे हुए है। अब देखना होगा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मणिपुर पर कब बोलते हैं?
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