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मणिपुर पर प्रधानमंत्री मोदी की चुप्पी के बाद से राजनीति हुई गरम!

मणिपुर पर प्रधानमंत्री मोदी की चुप्पी के बाद से राजनीति हुई गरम!
फोटो: मणिपुर पर प्रधानमंत्री मोदी की चुप्पी के बाद से राजनीति हुई गरम!
मणिुपर दिन महीनों से ज़्यादा समय से आग में जल रहा है। इस बीच कुकी समुदाय (Kuki People) की महिलाओं के साथ दुष्कर्म और अभ्रदता का जो वीडियो सामने आया, उसने पूरे देश को शर्मसार कर दिया। मणिपुर को लेकर विपक्ष संसद से लेकर सोशल मीडिया पर हमलावर है और प्रधानमंत्री से जवाब मांग रहा है। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) सदन में जवाब देने को तैयार नहीं हैं। मानसून सत्र (Parliament Monsoon Session) शुरू होने के साथ ही लोकसभा-राज्यसभा में मणिपुर को लेकर हंगामा होता रहा। इसी दौरान 24 जुलाई को राज्यसभा से आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह को निलंबित कर दिया गया। जिसके बाद से वो सदन के बाहर गांधी प्रतिमा के नीचे बैठकर अपने निलंबन के खिलाफ और मणिपुर को लेकर आवाज उठा रहे हैं। INDIA गठबंधन (INDIA Alliance) के तमाम नेता और दलों ने संजय सिंह (Sanjay Singh) के धरने में शामिल होकर उन्हें समर्थन दिया। सोनिया गांधी ने भी संजय सिंह से मिलकर उन्हें समर्थन दिया। वहीं INDIA गठबंधन के सभी नेताओं ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे (Mallikarjun Kharge) के चेम्बर में बैठक हुई।

sonia gandhi

 

मणिपुर को लेकर लगातार पांचवें दिन 26 जुलाई को संसद में हंगामा होता रहा, इस दौरान विपक्ष के द्वारा लाया गया अविश्वास प्रस्ताव (No Confidence Motion) को स्पीकर ने मंजूर कर लिया है। फिर सवाल एक ही उठता है कि मणिपुर को केंद्र सरकार तीन महीनों तक जलते हुए कैसे छोड़ सकती है? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संसद में मणिपुर पर बोलने को तैयार नहीं हैं, वहीं मणिपुर के सीएम एन बीरेन सिंह (N Biren Singh) अपने पद से इस्तीफा देने को तैयार नहीं हैं। ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ का नारा देने वाली सरकार बेटियों के दुष्कर्म के बाद सिर्फ दुख जता पाती है।

PM Modi

 

दो महिलाओं को निर्वस्त्र कर परेड कराने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद से विपक्ष मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह के इस्तीफे की मांग उठा रहा है। एक टीवी चैनल से बात करते हुए सीएम बीरेन सिंह ने इस्तीफे को लेकर कहा कि वो सीएम पद से इस्तीफा नहीं देंगे, क्योंकि उनकी पहली जिम्मेदारी राज्य में कानून व्यवस्था को स्थापित करना है। उन्होंने कहा कि मणिपुर की जनता ने उन्हें चुना है, इसलिए, "इस्तीफे का सवाल ही नहीं उठता है, लेकिन हां, अगर केंद्रीय नेतृत्व कहता है और मणिपुर की जनता चाहेगी तो मैं अपना पद छोड़ दूंगा।" मणिपुर में महिलाओं की हत्या और दुष्कर्मों को लेकर सरकार की तरफ से उठाए गए कदमों पर जब उनसे सवाल किया गया, तब उन्होंने कहा कि "कुल 6,068 एफआईआर में से एक दुष्कर्म का भी मामला है, वहीं पिछले हफ्ते कार सर्विस सेंटर पर दो महिलाओं की हत्या के मामले में दुष्कर्म की पुष्टि नहीं हुई है।"


CM N. Biren singh

 

संसद के बाहर से लेकर सड़कों पर भी कई राजनीतिक दलों से लेकर स्टूडेंस और आम जनता प्रधानमंत्री के मौन रहने पर सवाल उठा रहे हैं और पूछ रहे हैं कि "मणिपुर हिंसा पर पीएम मोदी मौन क्यों?" मणिपुर को लेकर अलग-अलग वीडियो सामने आ रही हैं जो मानवता को खत्म होता हुआ दिखा रही है। कही लाशों की आंखों को नूच लिया गया है, तो कही महिलाओं के साथ दुष्कर्म. तो कही जवान के द्वारा महिला के साथ अभ्रदता का वीडियो सामने आ रहा है।

opposition

 

आज़ादी के 75 साल पूरे होने के बाद भारत की स्थिति ये है कि महिलाओं के साथ हो रहे अपराध को हर कोई राजनीतिक बना रहा है। बीजेपी के नेता कांग्रेस और विपक्षी दलों के नेताओं पर महिलाओं को लेकर सवाल उठा रहे हैं। वहीं कांग्रेस भी अपने राज्य में महिलाओं के साथ हो रहे दुष्कर्म को लेकर आवाज़ उठाने वाले मंत्री को बर्खास्द कर अपनी तागत दिखा रही है। मणिपुर के साथ-साथ राजस्थान, छत्तिसगढ़, बिहार, दिल्ली, उत्तर प्रदेश समेत तमाम राज्यों में महिलाओं को लेकर कानून सिर्फ कागजों में बचे हुए है। अब देखना होगा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मणिपुर पर कब बोलते हैं?



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