
मई की शुरुआत में शाह ने हिंसाग्रस्त राज्य की अपनी 4 दिवसीय दौरे के दौरान शांति की अपील की थी और उपद्रवियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी थी। मणिपुर में इस मुद्दे पर विपक्ष ने BJP को आड़े हाथ लेते हुए BJP सरकार पर सवाल उठाए हैं। मणिपुर में 3 मई के बाद से अभी भी आगजनी जैसी घटनाएं हो रही हैं। मंत्रियों के घरों को भी उपद्रवियों ने निशाने पर लिया और आग के हवाले कर दिया, राज्य सरकार ने शांति बनाए रखने और अशांति को रोकने के लिए इंटरनेट पर प्रतिबंध को तत्काल प्रभाव से 25 जून तक तक बढ़ा दिया है। राज्य में जारी अशांति को देखते हुए डेटा सेवाओं पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है। हालांकि इससे पहले भी कई बार इंटरनेट सेवाएं बंद की गई है, लेकिन शांति कायम करने में सरकार विफल साबित होती आ रही है।

मेइती और कुकी समुदायों (Meitei and Kuki Communities) के बीच मणिपुर में एक महीने पहले भड़की हिंसा में 100 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं। राज्य में अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा देने की मेइती समुदाय की मांग के विरोध में तीन मई को पर्वतीय जिलों में ‘आदिवासी एकजुटता मार्च’ के आयोजन के बाद हिंसक झड़पें शुरू हो गई थीं।जो अभी तक जारी है।

इस बीच छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल (Bhupesh Baghel) ने BJP और पीएम नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) पर तंज कसा है। उन्होंने कहा है कि "बीजेपी के लोग दावा करते हैं कि हमारे राज्य में सांप्रदायिकता नहीं है। 50 दिनों से मणिपुर जल रहा है लेकिन प्रधानमंत्री के पास समस्या के समाधान के लिए बात करने का समय नहीं है।"
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