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MP में हर दिन होती है आदिवासियों के साथ बदसलूकी !

MP में हर दिन होती है आदिवासियों के साथ बदसलूकी !
फोटो: MP में हर दिन होती है आदिवासियों के साथ बदसलूकी !

आदिवासियों पर हमले के मामले में क्या कहती है NCRB की रिपोर्ट?

मध्य प्रदेश में भाजपा विधायक के प्रतिनिधि रहे प्रवेश शुक्ला (Pravesh Shukla) के द्वारा आदिवासी युवक के ऊपर जो पेशाब वाली निंदनीय घटना की गई, वो प्रदेश में पहली बार नहीं हुई है। बता दे कि मध्य प्रदेश आदिवासियों के खिलाफ अपराध के मामले में सबसे आगे है, जहां 2020 में इस तरह के मामले 30% बढ़ गए थे। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (National Crime Records Bureau) आदिवासियों के खिलाफ अपराध के अलग से आंकड़े इकठ्ठा करता है और ब्यूरो की रिपोर्टें दिखाती हैं कि इस तरह के मामलों में कोई कमी नहीं आ रही है।


प्रवेश शुक्ला

 

NCRB की रिपोर्ट और अब तक की घटनाएँ -

ब्यूरो की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक 2020 में देश में अनुसूचित जनजाति (Scheduled Tribe) के लोगों के साथ अत्याचार के 8,272 मामले दर्ज किए गए, जो 2019 के मुताबिक 9.38 प्रतिशत का उछाल है। इन मामलों में सबसे आगे रहा मध्य प्रदेश जहां कुल मामलों में से 29 प्रतिशत मामले (2,401) दर्ज किए गए। आदिवासी मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की आबादी का करीब 22 प्रतिशत हैं और सभी राजनीतिक पार्टियों के बीच आदिवासियों के वोट हासिल करने की होड़ लगी रहती है। इसके बावजूद आम आदिवासियों को शोषण और अत्याचार से निजात नहीं मिल पा रही है। बीते 4 जुलाई 2023 को सीधी विधायक के प्रतिनिधि प्रवेश शुक्ला ने एक आदिवासी युवक के ऊपर पेशाब कर दिया जब इस का वीडियो जब सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो सरकार ने तत्काल अपराधी प्रवेश शुक्ला पर NSA लगा तुरंत कार्यवाही की और चंद घंटो में ही प्रवेश शुक्ला को गिरफ़्तार कर लिया गया। 02 जुलाई 2022 को ही प्रदेश में एक आदिवासी महिला के साथ हुई एक घटना सामने आई। गुना जिले में रहने वाली रामप्यारी सहरिया पर जमीन के विवाद को लेकर कुछ लोगों ने उनके खेत में हमला कर दिया और उनके शरीर पर डीजल छिड़क कर आग लगा दी। उसके बाद हमलावरों ने दर्द से कराहती रामप्यारी का वीडियो भी बनाया जो सोशल मीडिया तक पहुंच चुका था। सहरिया के पति ने किसी तरह से उन्हें बचाया और अस्पताल पहुंचाया। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार रामप्यारी 80 प्रतिशत जल चुकी थी। उनका भोपाल के एक अस्पताल में इलाज कराया गया और उनकी हालत गंभीर थी। मध्य  प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह (Digvijay Singh) उन्हें देखने अस्पताल पहुंचे और सरकार से उनका इलाज मुफ्त कराने की मांग की थी।


मध्य प्रदेश के आदिवासी

 

अदालत और पुलिस के सामने लाचार आदिवासी -

एनसीआरबी (NCRB) के मुताबिक अदालतों में आदिवासियों के खिलाफ अत्याचार के कम से कम 10,302 मामले लंबित हैं। जिन मामलों में सुनवाई पूरी हुई उन्हें कन्विक्शन या सजा होने की दर महज 36 प्रतिशत है। इसका मतलब है आदिवासियों के खिलाफ अत्याचार के मामलों में पुलिस की जांच में कमी रह जाती है, जिसकी वजह से आरोपितों को सजा नहीं हो पाती। गुना वाले मामले में भी रामप्यारी के पति अर्जुन सहरिया ने आरोप लगाया है। उन्होंने हमलवारों के खिलाफ पहले भी शिकायत की है लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। बल्कि दलितों और आदिवासियों के खिलाफ पुलिस के भेदभाव के भी संकेत मिलते हैं। एनसीआरबी के ही आंकड़ों के जेलों में बंद कैदियों में अनुसूचित जनजाति के कैदियों की संख्या भी सबसे ज्यादा मध्य प्रदेश में ही है।


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