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लालू प्रसाद यादव की राजनीति में एंट्री से BJP की टेंशन बढ़ी!

लालू प्रसाद यादव की राजनीति में एंट्री से BJP की टेंशन बढ़ी!
फोटो: लालू प्रसाद यादव की राजनीति में एंट्री से BJP की टेंशन बढ़ी!
आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर केंद्र की मोदी सरकार को तीसरी बार सत्ता में आने से रोकने के लिए सभी विपक्षी दल एक-साथ आने की पूरी तैयारी कर रहे हैं। इसी कड़ी में 23 जून को बिहार के पटना में विपक्षी दलों की बैठक हुई, जिसे काफी अहम माना जा रहा है। वैसे तो विपक्षी दलों को एक साथ लाने की तैयारी की शुरुआत अगस्त 2022 में ही बन गई थी जब नीतीश कुमार (Nitish Kumar) ने BJP से नाता तोड़कर NDA से अलग हुए और महागठबंधन के साथ मिलकर सरकार बनाई।  इसके बाद से ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने BJP के खिलाफ विपक्ष को एकजुट करने की घोषणा की थी। 

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इस घोषणा को बुनियादी ताकत महागठबंधन के सबसे बड़े घटक राष्ट्रीय जनता दल (Rashtriya Janata Dal) से मिली, जिसके राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) हमेशा BJP की नीतियों और शासन के खिलाफ खड़े रहे। लालू प्रसाद यादव के लिए यह तीसरा मौका था, जब वह देश स्तर पर केंद्र सरकार के खिलाफ विपक्षी एकता की बैठक में भाग ले रहे थे। 

lalu prasad yadav

 

पहली बार 1977 में आपातकाल के खिलाफ जेपी आंदोलन और दूसरी बार 1989 में जब वीपी सिंह के नेतृत्व में बोफोर्स मुद्दे (Bofors Issue) पर वे जनता दल में सक्रिय भूमिका में रहे। दोनों अवसर पर केंद्र में कांग्रेस (Congress) की सरकार निशाने पर थी।

जेपी आंदोलन में बड़ी भूमिका निभाने और बीजेपी के सबसे मुखर विरोधी के रूप में लालू प्रसाद यादव की उपस्थिति बेहद दिलचस्प है। इस विरोध का सृजन काल 1990 का दशक, जब मंडल बनाम कमंडल राजनीति के जरिये एक तरफ पिछड़ों का उभार दिखा, वहीं दूसरी तरफ हिंदुत्ववादी राजनीति (Hindutva Politics) का भी एक प्रभावशाली आकार बना। बिहार के समस्तीपुर में सीएम लालू प्रसाद यादव ने लाल कृष्ण आडवाणी (Lal Krishna Advani) की रथ को रोक दिया था और उन्हें हिरासत में ले लिया था। 

J.P. andolan

 

 वहीं अगस्त 2017 में लालू प्रसाद यादव ने गांधी मैदान में विपक्षी दलों का एक विशाल जमावड़ा इकट्ठा किया और "बीजेपी भगाओ, देश बचाओ” का आह्वान किया। हालांकि, उसके बाद वे चारा घोटाले (Fodder Scam) में CBI कोर्ट के द्वारा निर्धारित सजा के तहत जेल गए। फिर मोदी सरकार ने उनके खिलाफ कई बंद मुकदमों को खोला और कई नए मुकदमे भी दर्ज करवा दिए। 

लगभग छः साल बाद उन्होंने 23 जून 2023 को पटना में आयोजित 15 विपक्षी दलों की पहली बैठक में भाग लिया। बैठक के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में लालू प्रसाद यादव अपने पुराने अंदाज में दिखे। अंतिम वक्ता के रूप में जब बोलना शुरू किए तो खुद को फिट बताने के साथ मोदी और BJP को ठीक करने की बात भी कही। वहीं राहुल गांधी (Rahul Gandhi) को शादी करने की सलाह देकर खुद को बाराती बनाने की इच्छा जाहिर की। 

rahul gandhi

 

बीजेपी-संघ की विभाजनकारी राजनीति (BJP-Sangh's Divisive Politics) से लेकर महंगाई, बेरोजगारी और तानाशाही शासन को मिलकर हराने की बात दुहराई। राहुल गांधी के 'भारत जोड़ो यात्रा' और लोकसभा में उनकी सक्रियता की जमकर तारीफ की। 

लालू प्रसाद यादव बिहार (Bihar) की वो आवाज़ हैं, जिसने केंद्र सत्ता के खिलाफ जब-जब आवाज उठाई है, सत्ता को पूरी तरह हिला कर रख दिया। 2024 में भी ऐसा ही कुछ होगा, लालू प्रसाद यादव क्या बीजेपी और पीएम नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) के विजय रथ को रोक पाएंगे या नहीं? ये तो आने वाला वक्त बताएंगा। लेकिन इतना तय है कि लालू प्रसाद यादव अब केंद्र को टक्कर देने के लिए पूरी तरह तैयार है, जिससे BJP की टेंशन बढ़ गई है।



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