
क्या है पूरा मामला-
2004 से 2009 में केंद्र में यूपीए सरकार थी और लालू प्रसाद यादव रेल मंत्री के पद पर थे। जमीन के बदले नौकरी का ये फंडा उसी समय हुआ। दरअसल आरोप है कि लालू यादव ने रेल मंत्री रहने के दौरान रेलवे में लोगों को नौकरी देने के बदले उनसे जमीन ली थी। Land for Job Scam क़रीब 14 साल पुराना है। इस मामले में 18 मई 2022 को सीबीआई ने केस दर्ज किया था। सीबीआई के मुताबिक, लोगों को पहले रेलवे में ग्रुप D के पदों के एवज़ के तौर पर भर्ती किया गया और जब उनके परिवार ने जमीन का सौदा किया, तब उन्हें रेगुलर कर दिया गया।

CBI के आऱोप -
- सीबीआई का कहना है कि पटना में लालू यादव के परिवार ने 1.05 लाख वर्ग फीट जमीन पर कथित तौर पर कब्जा कर रखा है। इन जमीनों का सौदा नकद राशि में हुआ था। सीबीआई के मुताबिक, ये जमीनें बेहद कम दामों में बेच दी गई थीं।
- सीबीआई ने ये भी पाया कि जोनल रेलवे में सब्स्टीट्यूट की भर्ती का कोई विज्ञापन जारी नहीं किया गया था, लेकिन जिन परिवारों ने यादव परिवार को अपनी जमीन दी, उनके सदस्यों को रेलवे में नौकरी मिल गई थी।
ED के अनुसार -
ED के मुताबिक कुछ उम्मीदवारों के आवेदनों को स्वीकृत करने में जल्द बाजी दिखाई गई, कुछ आवेदनों को तीन दिनों में ही स्वीकृत कर दिया गया। वहीं कुछ आवेदनों में तो पता तक नहीं लिखा हुआ था, फिर उसे स्वीकृत कर दिया गया। आरोप है कि लालू यादव एंड परिवार ने कथित तौर पर 7 उम्मीदवारों को जमीन के बदले नौकरी दी थी। इनमें से पांच जमीनों की बिक्री हुई, जबकि दो गिफ्ट के तौर पर मिली हुई है। इस मामले में 2022 के 10 अक्टूबर को सीबीआई ने चार्जशीट दाखिल की थी। इस दौरान 16 लोगों को आरोपी बनाया गया था। पिछले साल ही जुलाई में सीबीआई ने भोला यादव को गिरफ्तार किया था, जो लालू यादव के रेल मंत्री रहते हुए उनके OSD थे।

इस घोटाले के सिलसिले में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने लालू के परिवार समेत 14 आरोपियों को समन जारी किया है। सभी आरोपियों को 15 मार्च 2023 को अदालत में पेश होने को कहा गया है। 15 मार्च को अदालत सभी आरोपियों से पूछताछ करेगी और उसके बाद आरोप तय किए जाएंगे।
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