
15 फ़रवरी को कश्मीर घाटी से बाहर स्थानांतरित करने और बकाया वेतन जारी किए जाने की मांग को लेकर पीएम पैकेज के तहत कार्यरत कश्मीरी पंडित कर्मचारी जम्मू प्रेस क्लब के बाहर प्रदर्शन करने के लिए पहुंचे। इन प्रदर्शनकारी कर्मचारियों की मांग है कि महा शिवरात्रि से पहले इन्हें इनकी सैलरी दी जाए, जिससे की ये सभी अपने सबसे अहम त्यौहार और पूजा को अच्छे ढंग से मना सके। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आप हर जगह शिव मंदिरों में पूजा करते हुए देखते हैं, वो अपने -आप को भगवान शिव का भक्त कहते हैं। उन्हें शिव के दूसरे भक्तों कश्मीरी पंडितों ने उनसे गुहार लगाई है कि हमें हमारे भगवान की पूजा के लिए शिवरात्रि से पहले पूरी सैलरी दी जाएं।
आपको बता दे कि पिछले 8 महीने से कश्मीर पंडितों ने घाटी में काम करना बंद कर दिया है। करीब 6 हजार कश्मीरी पंडित कर्मचारी ड्यूटी नहीं कर रहे हैं। दरअसल साल 2022 में जिस तरह आतंकवादियों ने कश्मीरी पंडितों की हत्या की, उससे डरकर इन कर्मचारियों ने घाटी में ड्यूटी पर जाना बंद कर दिया और अपने ट्रांसफर की लगातार मांग कर रहे हैं। इसी को लेकर 15 फ़रवरी के दिन जम्मू प्रेस क्लब के कश्मीरी पंडित बाहर प्रदर्शन करने के लिए पहुंचे। इस दौरान पुलिस ने उन्हें सड़क से हटकर प्रदर्शन करने के लिए कहा, लेकिन प्रदर्शनकारी अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी करने लगे। इस पर पुलिस ने कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया। वहीं प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनकी आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है।

वहीं 4 फ़रवरी को जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि कश्मीर में कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए कई कदम उठाए गए हैं। ज्यादातर कर्मचारियों को शहरी और नगर क्षेत्र में तैनात किया गया है, कई कर्मचारियों ने घाटी में अपनी सेवाएं फिर शुरू कर दी हैं और उनके लंबित वेतन को जारी करने के निर्देश जारी किए गए हैं।
दूसरी ओर, प्रदर्शनकारियों ने दावा किया है कि केवल कुछ सौ कर्मचारियों ने मजबूरी में ड्यूटी के लिए कश्मीर गए हैं जबकि कई कर्मचारी अपनी जान के खतरे को देखते हुए घाटी में लौटने को तैयार नहीं हैं।
यहां बड़ी बात ये है कि सरकार ने 14 दिसंबर को राज्य सभा में कहा कि आतंकवादियों ने जम्मू-कश्मीर में 2020 से 2022 तक नौ कश्मीरी पंडितों की हत्या कर दी गई। गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने एक सवाल के लिखित जवाब में उच्च सदन को यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि 2022 और 2021 में चार-चार कश्मीरी पंडित मारे गए जबकि 2020 में एक कश्मीरी पंडित आतंकवाद का शिकार हुआ। फिर सवाल उठता है कि उपराज्यपाल कश्मीर में कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए कौन से कदम की बात कर रहे हैं? क्या अब LG मनोज सिन्हा कश्मीरी पंडित कर्मचारियों के चैंलेज को Accept करने को तैयार है? अगर जरूरी कदम उठा लिया गया है, साथ ही किसी की जान को खतरा नहीं है तो फिर LG उन जगहों पर आम कर्मचारियों की तरह रहकर इन प्रदर्शनकारियों का डर दूर करेंगे?

आए दिन कश्मीरी पंडित लगातार अपने अधिकारों की मांग कर रहे हैं, न्याय की भीख मांग रहे हैं। सवाल तो उठना चाहिए कहा है भारतीय जनता पार्टी के वो सांसद जो कश्मीर फाइल्स फ़िल्म का प्रचार कर रहे थे ? लगता है सब मुद्दे फ़िल्म तक सीमित थे।

वो बात अलग है कि "देश के गृह मंत्री जो कश्मीर के लिए जान दे देंगे" जैसे वाक्य सदन में बोल रहे थे। लेकिन मौजूदा के हालातों पर खामोश क्यों हैं ? ये सवाल तो बनता है।
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