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ममता बनर्जी ने कांग्रेस की तरफ बढ़ाया हाथ, क्या मिलेगा समर्थन ?

ममता बनर्जी ने कांग्रेस की तरफ बढ़ाया हाथ, क्या मिलेगा समर्थन ?
फोटो: ममता बनर्जी ने कांग्रेस की तरफ बढ़ाया हाथ, क्या मिलेगा समर्थन ?
2019 के लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Elections) के पहले से ही पूरा देश विपक्षी एकजुटता शब्द सुनता आ रहा है। लेकिन विपक्ष बार-बार एकजुट होने में फेल हो रहा है। विपक्षी दलों को एक मंच पर लाने की तैयारी और मेहनत सबसे ज्यादा बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) कर रहे हैं। जहां पहले विपक्षी दल कांग्रेस (Congress) को लेकर खुलकर कुछ भी बोलने से बच रही थी, वहीं अब पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) ने कर्नाटक विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत के बाद अब कांग्रेस के साथ हाथ मिलाने को लेकर बड़ा इशारा कर दिया है। अब ममता बनर्जी ने पहली बार कहा है कि 2024 लोकसभा चुनाव में वो कांग्रेस को समर्थन करेंगी, लेकिन शर्तें लागू हैं। ममता ने कहा है कि वो लोकसभा चुनाव के लिए विपक्षी दलों को सीटों के फॉर्मूले पर बातचीत शुरू करनी चाहिए।

Mamata banerjee

 

15 मई 2023 को सीएम ममता बनर्जी कोलकाता में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित कर रही थीं। इस दौरान उनसे विपक्षी एकता पर सवाल पूछा गया। सीएम ममता ने कहा कि "मजबूत पार्टी को प्राथमिकता देनी चाहिए, जहां कांग्रेस मजबूत है उसे वहां लड़ने दीजिए। लेकिन कांग्रेस को भी दूसरी पार्टियों को सपोर्ट करना पड़ेगा। हमने अनुमान लगाया है कि कांग्रेस 200 सीटों पर मजबूत है। अगर आप कुछ अच्छा चाहते हैं तो कुछ जगहों पर त्याग भी करना पड़ता है। यूपी को ही मान लीजिए, वहां हमें अखिलेश (समाजवादी पार्टी) को प्राथमिकता देनी होगी। मैं ये नहीं कह रही हूं कि कांग्रेस को वहां नहीं लड़ना चाहिए, हम मिलकर फैसला करेंगे।" ममता बनर्जी ने दूसरे राज्यों का भी उदाहरण देते हुए कहा कि बंगाल में TMC को लड़ना चाहिए। दिल्ली में आम आदमी पार्टी (Aam Adami Party) को सपोर्ट करना चाहिए। इसी तरह बिहार में नीतीश जी, तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) और कांग्रेस साथ हैं तो वे फैसला ले सकते हैं।

 

General election

 

ममता बनर्जी से पूछा गया कि क्या हाल में वो किसी विपक्षी दल के साथ बैठक करने वाली हैं। इस पर उन्होंने कहा कि इस महीने के आखिर में 27 मई को दिल्ली में नीति आयोग गवर्नमेंट काउंसिल (NITI Aayog Government Council) की बैठक में हिस्सा लेंगी। लेकिन दिल्ली में विपक्ष की कोई बैठक का अभी कोई प्रस्ताव नहीं है।

cm mamata

 

इससे पहले कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्ष को एकजुट करने को लेकर ममता बनर्जी ने ज्यादा कुछ नहीं कहा था। हालांकि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जरूर कांग्रेस समेत दूसरे दलों के नेताओं से मुलाकात कर रहे हैं। पिछले महीने की 24 तारीख को नीतीश और तेजस्वी ने एक साथ ममता बनर्जी से मुलाकात की थी। इस बैठक के बाद ममता बनर्जी ने कांग्रेस का नाम लिए बगैर कहा था कि हम सभी विपक्षी पार्टियों के संपर्क में हैं और अहंकार का कोई टकराव नहीं है। ममता बनर्जी से पहले नीतीश और तेजस्वी दिल्ली में राहुल गांधी (Rahul Gandhi) और कांग्रेस के सीनियर नेताओं से मिले थे। इस मीटिंग के बाद राहुल गांधी ने एक तस्वीर सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए लिखा था कि "विचारधारा की इस लड़ाई में, विपक्ष की एकता की ओर आज एक ऐतिहासिक कदम लिया गया है।"

opposition parties

 

पश्चिम बंगाल (West Bengal) की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कांग्रेस के लिए जो कुछ भी कहा वो उन्हीं के राज्य के कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी (Adhir Ranjan Chowdhary) को पसंद नहीं नहीं आई। अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि “कर्नाटक में कांग्रेस की जीत के बाद उन्हें एहसास होने लगा कि इसके बिना बंगाल में आगे बढ़ना मुश्किल है। बंगाल में कांग्रेस की पकड़ मजबूत होती जा रही है।" उन्होंने ममता बनर्जी पर हमला करते हुए कहा, “कर्नाटक में जीत के बाद भी राहुल गांधी का नाम उन्होंने नहीं लिया। भारत जोड़ो यात्रा के दौरान भी उन्होंने राहुल गांधी और इस यात्रा का नाम तक नहीं लिया। यहां तक कि राहुल गांधी सदस्यता गई तब भी उन्होंने एक लफ्ज नहीं कहा।" उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी भूल गई है कि अगर कांग्रेस और सोनिया गांधी उन्हें समर्थन नहीं देती तो 2011 में बंगाल में अपनी सरकार नहीं बना पाती, लेकिन सरकार बनने के बाद ममता ने कांग्रेस को ही बंगाल से बाहर करने की कोशिश की।

adhir ranjan chowdhury

 

अधीर रंजन चौधरी के इस बयान के बाद ममता बनर्जी क्या जवाब देंगी, ये तो आने वाला वक्त बताएंगा। लेकिन ऐसे बयानों से इतना तो साफ है कि BJP और केंद्र की मोदी सरकार के सामने मजबूत विपक्ष खड़ा करने के लिए कांग्रेस को अपने साथ रखना विपक्षी दलों के लिए बहुत जरूरी है। जिस तरह कर्नाटक विधानसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) की बड़ी-बड़ी रैलियों के बाद भी कांग्रेस पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में आई है, उसने विपक्षी दलों के कांग्रेस के रूप में एक अच्छा विकल्प जरूरत दे दिया है। अब देखना होगा कि 2024 में विपक्षी एकजुटता बन पाती है या फिर सिर्फ मीटिंगों तक ही सीमित हो जाती है।


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