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कर्नाटक विधानसभा चुनाव में मुसलमानों को कितना टिकट मिला?

कर्नाटक विधानसभा चुनाव में मुसलमानों को कितना टिकट मिला?
फोटो: कर्नाटक विधानसभा चुनाव में मुसलमानों को कितना टिकट मिला?
कर्नाटक विधानसभा चुनाव (Karnataka Assembly Election) की तारीखों के ऐलान से पहले ही मुस्लिम नेताओं (Muslim Leaders) ने अपनी-अपनी दलों से मांग की थी कि उन्हें चुनाव में अधिक से अधिक टिकट दी जाएं। क्योंकि राजनीति में मुसलमानों की भूमिका कम होती जा रही है। अब BJP और कांग्रेस जैसी राष्ट्रीय पार्टियों ने कर्नाटक विधानसभा चुनाव की 224 सीटों के लिए अपने उम्मीदवारों की लिस्ट जारी कर दी है। इन लिस्टों से इतना तो साफ हो गया है कि मुसलमान नेताओं के मन में जो डर है, शायद वो सही है। 

Muslim in Karnatka

 

कर्नाटक चुनाव (Karnataka Assembly Election) से पहले मुसलमानों ने अपनी कमर कस ली थी और मुस्लिम नेताओं ने अपनी-अपनी पार्टियों को इस चुनाव में मुसलमानों को अधिक सीट देने की मांग की थी। जिस तरह पिछले साल कर्नाटक में हिजाब (Hijab) को लेकर विवाद रहा। वहीं कर्नाटक विधानसभा चुनाव से पहले जिस तरह टीपू सुल्तान को लेकर राजनीति तेज हो गई और BJP विधायक बसनगौड़ा पाटिल यतनाल (BJP MLA Basangouda Patil Yatnal) का मुसलमानों को वोट नहीं देने को लेकर जो अपील की। ऐसे बयान कई बार आते रहते हैं, जैसे मुसलमानों की दुकानों से सामान नहीं खरीदना, या मांस नहीं खरीदना आदि। ऐसे में मुसलमानों के अंदर राजनीतिक और सामाजिक तौर पर हाशिए पर पहुंचने का डर सताने लगा है। जिसे लेकर कर्नाटक के सभी मुस्लिम नेताओं ने अपनी-अपनी दलों से उन्हें 2023 विधानसभा चुनाव में अधिक से अधिक टिकट देने की मांग की थी। शायद मुसलमानों की मांग किसी भी पार्टी को सही से सुनाई नहीं दी। ऐसा मैं क्यों कह रही हूं ये आप कांग्रेस और BJP के प्रत्याशियों की लिस्टों को देखकर समझ जाएंगे।

Muslim

 

भारत में मुसलमानों की आबादी करीब 15% है, लोकसभा 2019 में 24 मुसलमान सांसद बने। वहीं लोकसभा की 218 सीटे ऐसी है जिस पर मुस्लिम मतदाता का प्रभाव है। इसके बाद भी लोकसभा में केवल 24 मुस्लिम सांसद पहुंचे है। यहां बड़ी बात ये है कि केंद्र की सत्ता जिस पार्टी के पास है वो है भारतीय जनता पार्टी और उसकी तरफ से लोकसभा और राज्यसभा में भी कोई भी मुस्लिम सांसद नहीं हैं और उसके बाद हिजाब विवाद, गौ रक्षा के नाम पर मुसलमान युवकों की हत्या की गई। इन सबने मुसलमानों को डर के जीने पर मजबूर कर दिया है। 

Parliament

 

वहीं कर्नाटक में पिछले विधानसभा चुनाव में BJP 224 में से 104 सीटों पर जीत के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। Congress को 80 सीटों पर और JDS को 37 सीटों पर जीत हासिल हुई थी। कांग्रेस और जनता दल सेक्युलर (Janata Dal Secular) की मिली जुली सरकार बनी, लेकिन 15 विधायकों ने अपनी पार्टियों से विद्रोह करके BJP में शामिल होने का फ़ैसला किया। फिर BJP ने यहां ऑपरेशन लॉटस (Operation Lotus) से सरकार बना ली, मुस्लिम समुदाय के केवल सात विधायक सभी कांग्रेस पार्टी से जीत कर आए थे। 

2023 कर्नाटक विधानसभा चुनाव के लिए 10 मई को मतदान होने हैं। कांग्रेस और BJP दोनों पार्टियों ने 224 उम्मीदवारों के नाम की घोषणा कर दी है।  जिसमें कांग्रेस ने 224 में से केवल 11 सीटों पर मुस्लिम उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है। वहीं BJP ने तो किसी भी मुस्लिम नेता को चुनाव लड़ने लायक ही नहीं समझा। 224 सीटों में से एक पर भी भारतीय जनता पार्टी ने मुस्लिम चेहरे को नहीं उतारा, शायद BJP के "सबका साथ, सबका विकास" के नारे में मुस्लिम नहीं आते। 

Congress muslim candidate

 

विशेषज्ञों का कहना है कि अब कुछ ग़ैर BJP सरकारें और पार्टियां भी मुस्लिम उम्मीदवारों को हार के डर से टिकट देने या मंत्री बनाने से परहेज़ करने लगी हैं। क्योंकि जिस तरह उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में मुस्लिम मतदाताओं ने भी हिंदूओं को वोट दिया। उससे इतना साफ दिखाई देता है कि हिंदू उम्मीदवारों पर दांव लगाना कम जोखिम भरा है। 

कर्नाटक में मुसलमानों की आबादी 13 फ़ीसद है। पिछली बार कांग्रेस ने मुसलमानों को 15-17 सीटें दीं थी, लेकिन इस बार इससे भी कम दिया है। जिसकी वजह से मुसलमानों में नाराजगी के साथ-साथ भय का माहौल है। जानकारी के लिए बता दे कि "1978 में मुसलमानों का प्रतिनिधित्व सबसे अधिक था, जब विधानसभा में इनकी 17 सीटें जीतीं। तब से यह कम हो रहा है. ये 12, 11, 9 पर गिरीं। अब सात पर आ गए हैं।"

Karnataka election 2023

 

मुसलमानों को ये पता है कि अगर राजनीति में अपनी जगह मजबूत और संसद (Parliament) में मज़बूती के साथ उनकी समस्याएं नहीं उठाई जाएंगी, तो ये और बढ़ती चली जाएगी। इसके लिए ज्यादा से ज्यादा मुसलमानों को संसद में जाना होगा। ताकि अपनी आवाज़ बुलंदी के साथ रखी जा सके। मुसलमानों की आबादी 13 फीसदी है, और 40 विधानसभा की सीटों पर हार-जीत तय करते हैं। उसके बाद भी जिस तरह कांग्रेस ने सिर्फ 11 उम्मीदवारों को मैदान में उतारा और BJP ने एक भी मुस्लिम नेता को उम्मीदवार नहीं बनाया है। इससे मुसलमानों का डर सही होता हुआ दिखाई दे रहा है।

क्या वाकई में मुसलमानों को राजनीतिक तौर पर हाशिये पर लाया जा रहा है? 

 

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