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BJP के रोकतंत्र के शिकार बने जिग्नेश

BJP के रोकतंत्र के शिकार बने जिग्नेश
फोटो: BJP के रोकतंत्र के शिकार बने जिग्नेश

सत्ता को क्रांति से हमेशा ही परेशानी रही है, चाहें वो ब्रिटिश भारत हो या स्वतंत्र भारत। रैली के लिए जंतर-मंतर बैन होने से जिग्नेश मेवाणी शायद अंबेडकर जी के पूना पैक्ट संघर्ष को याद कर रहे होंगे। लेकिन उसे याद करके वे दुखी बहुत हुए होंगे। क्योंकि पूना पैक्ट के दौरान अंबेडकर जी होने वाले चुनाव में दलितों के लिए आरक्षण की मांग कर रहे थे। आज चुना हुआ नेता अपनी अभिव्यक्ति की आजादी की मांग कर रहा है। उस समय सामने गांधी जैसे ईमानदार नेता थे, आज सामने स्वतंत्र भारत की एक भ्रष्ट सरकार है, जिसे सत्ता के नशे में कुछ नहीं दिखता। एक जुझारू दलित नेता रहे जिग्नेश पिछले गुजरात चुनाव में बड़गाम विधान सभा से विधायक चुने गए। इस चुनाव में इन्होंने BJP के उम्मीदवार विजय चक्रवर्ती को 19696 वोटों से हराकर 95497 वोटों के साथ विजेता रहे। पहले से BJP के आंखों में खटक रहे जिग्नेश जीतने के बाद BJP के लिए कांटे बन गए। ऐसे में BJP उनके हर कदम को रोकने की कोशिश कर रही है। जैसा BJP अपने हर विरोधी के साथ करती है। जीत के जश्न के सिलसिले में जिग्नेश आज दिल्ली में जंतर-मंतर के सामने रैली करना चाहते थे पर वहां बैन होने के कारण उन्हें यह रैली गीता कालोनी में आयोजित करनी पड़ी। सोचने वाली बात ये है की मौजूदा सरकार इस कदर भयभीत क्यों है ऐसी रैलियों से ? बताया जा रहा है की पहले से ही आंसू गैस के गोले, दमकल इत्यादि से लैस पुलिस बल ने पुरे इलाके को छावनी बना रखा दिया। क्या मौजूदा सरकार दलितों की आवाज से इतनी डरी हुई है या दबा देना चाहती है। लोकतंत्र में समाज के किसी हिस्से के आवाज को इस कदर दबाया जाना ठीक नहीं है। अगर सरकार ऐसा ही करती रही तो समाज में 'समानता' एक कल्पना बन कर रह जाएगी। और समाज के आखिरी व्यक्ति तक आजादी पहुंचाने काबी गांधी जी का सपना अधूरा रह जाएगा।