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जिन्नाह की मुस्लिम लीग से कैसे अलग है केरल की इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग !

जिन्नाह की मुस्लिम लीग से कैसे अलग है केरल की इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग !
फोटो: जिन्नाह की मुस्लिम लीग से कैसे अलग है केरल की इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग !
कांग्रेस नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) अमेरिका दौरे पर हैं। उन्होंने केरल की इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग को सेक्यूलर पार्टी (Secular party) बताया है। राहुल गांधी के इस बयान पर बीजेपी नेताओं ने आपत्ति जताई। कोई इसे पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्नाह की पार्टी बताने लगा। तो कोई इसे भारत के बंटवारे का ज़िम्मेदार बताता है। BJP आईटी सेल के चीफ अमित मालवीय ने ट्वीटर पर लिखा- Jinnah’s Muslim League, the party responsible for India’s partition, on religious lines, according to Rahul Gandhi is a ‘Secular’ party. यानी जिन्ना की मुस्लिम लीग, जो धार्मिक आधार पर भारत के विभाजन के लिए जिम्मेदार पार्टी है, राहुल गांधी के अनुसार एक 'धर्मनिरपेक्ष' पार्टी है। अमित मालवीय (Amit Malviya) के अलावा भी कई और नेता हैं, जिन्होंने राहुल गांधी के बयान पर आपत्ति जताई है। आप सबसे पहले जान लीजिए कि आखिर यह मुस्लिम लीग पार्टी क्या है? क्या यह वही मुस्लिम लीग है, जो जिन्नाह की पार्टी थी और भारत के विभाजन के लिए ज़िम्मेदार है? और इसको लेकर चल रहा पूरा विवाद क्या है?


 

Rahul Gandhi

 

दोनों मुस्लिम लीग के बीच फर्कः  

यहां हम आपको दोनों मुस्लिम लीग के बीच बेसिक फर्क बता रहे हैं। जिन्नाह वाली मुस्लिम लीग AIML यानी All India Muslim League थी। जबकि केरल की IUML यानी Indian Union Muslim League है। जिन्नाह जिस मुस्लिम लीग से जुड़े थे, उसकी स्थापना 30 दिसंबर 1906 को ढाका में की गई थी। लीग की स्थापना मुस्लिम ज़मींदारों और नवाबों ने की थी। लीग की यह मांग थी कि मुसलमानों के लिए अलग निर्वाचिक की व्यवस्था की जाए। इस मुस्लिम लीग में नवाब सलीमुल्लाह, आगा खान और मोहम्मद अली जिन्नाह समेत कई नेता शामिल थे।


केरल की इंडियन यूनियन मुस्लिम लीगः 

केरल की मुस्लिम लीग की स्थापना भारत की आजादी के बाद 1948 में मद्रास में की गई थी। यह पार्टी भारत के संविधान को मानने वाली और भारतीयता में विश्वास करने वाली पार्टी है। यह पार्टी चुनाव आयोग में भी रजिस्टर है और चुनाव आयोग ने उसे केरल की राज्य पार्टी के तौर पर लंबे समय से मान्यता दी हुई है। यह पार्टी केरल में विपक्षी गठबंधन यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (United Democratic Front) की एक प्रमुख सदस्य है। वर्तमान केरल विधानसभा में IUML के 18 विधायक हैं, जबकि 2011 के विधानसभा में 20 विधायक थे।

Indian Union Muslim League of Kerala


दोनों मुस्लिम लीग के झंडे के बीच अंतरः 

दोनों मुस्लिम लीग (Muslim League) के ऑफिशियल झंडे में फर्क है। इन दोनों के झंडे दिखने में एक जैसे लगते हैं लेकिन वह अलग हैं। जिन्नाह की ऑल इंडिया मुस्लिम लीग हरे रंग के बैकग्राउंड पर है। लेकिन इसके ठीक बीच में चांद और तारा है। जबकि केरल की इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (Indian Union Muslim League) में भी हरे रंग का बैकग्राउंड है, लेकिन इसमें चांद और तारा लेफ्ट साइड में ऊपर की तरफ कोने में है।


जिन्नाह की मुस्लिम लीग का क्या हुआ? 

भारत के विभाजन के बाद ऑल इंडिया मुस्लिम लीग को भंग कर दिया गया। हालांकि कुछ महीनों के बाद पश्चिमी पाकिस्तान में मुस्लिम लीग और पूर्वी पाकिस्तान में द ऑल पाकिस्तान अवामी मुस्लिम लीग (The All Pakistan Awami Muslim League) अस्तित्व में आई थी। आपको यहां यह बता दें कि पश्चिमी पाकिस्तान मौजूदा पाकिस्तान है, जबकि पूर्वी पाकिस्तान मौजूदा वक्त में बांग्लादेश है, जो 1971 में बना था। शुरूआती दौर में मुस्लिम लीग ने पाकिस्तान को 6 प्रधानमंत्री दिए, लेकिन समय-समय पर मुस्लिम लीग में लगातार परिवर्तन होते रहे। एक समय ऐसा आया जब जनरल अय्यूब खान (General Ayub Khan) ने पाकिस्तान में मार्शल लॉ लगाया था, जिसके बाद ये पार्टी भी भंग हो गई। हालांकि बाद में अय्यूब ने पार्टी को पाकिस्तान मुस्लिम लीग के रूप में फिर से स्थापित किया। इसके बाद यह पार्टी बनती और बिगड़ती रही।


Jinnah's Muslim League

 

क्या इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग सेक्यूलर पार्टी है? 

इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के संस्थापक इस्माइल साहिब थे, जो संविधान सभा के सदस्य रहे थे। www.constitutionofindia.net की वेबसाइट के अनुसार इस्माइल मुस्लिम लीग (Ismail Muslim League) के टिकट पर मद्रास से संविधान सभा के लिए चुने गए थे। वह मुस्लिम लीग के उन 28 सदस्यों में से एक थे, जो विभाजन के बाद भारत में रह गए और जिन्होंने संविधान सभा की कार्यवाही में भाग लिया था।


कांग्रेस (Congress) प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत (Supriya Shrinate) ने एक ट्वीट में बताया है कि चीन से युद्ध के दौरान इस्माइल ने अपने बेटे मियां ख़ान को भारतीय सेना में शामिल होने का आदेश दिया था। मुस्लिम लीग के मंत्री ई. अहमद को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी (Atal Bihari Vajpayee) ने भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए जिनेवा भेजा था। इसके अलावा मुस्लिम लीग नेता और तत्कालीन शिक्षा मंत्री बशीर ने केरल में सबसे बड़ा संस्कृत विश्वविद्यालय भी स्थापित किया था। कांग्रेस ने बीजेपी पर यह भी आरोप लगाया है कि BJP ने नागपुर नगर निगम के चुनावों में मुस्लिम लीग के साथ गठबंधन किया था। कई मीडिया रिपोर्ट्स में भी इस पर न्यूज प्रकाशित किया गया है। इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के सेक्यूलर होने को लेकर विवाद समय-समय पर होता रहा है। लेकिन केरल की इस पार्टी की राजनीतिक छवि कभी सांप्रदायिक दिखाई नहीं प्रतीत होती है।



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