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मणिपुर के मुद्दे पर I.N.D.I.A गठबंधन के सदस्यों ने राष्ट्रपति को सौंपा ज्ञापन !

मणिपुर के मुद्दे पर  I.N.D.I.A गठबंधन के सदस्यों ने राष्ट्रपति को सौंपा ज्ञापन !
फोटो: मणिपुर के मुद्दे पर I.N.D.I.A गठबंधन के सदस्यों ने राष्ट्रपति को सौंपा ज्ञापन !
2 अगस्त की सुबह I.N.D.I.A गठबंधन के 31 सदस्यों ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (Draupadi Murmu) से मुलाकात कर मणिपुर में हुए हिंसा (Manipur Violence) पर चिंता व्यक्त की और उनको स्थितियों से रूबरू कराया और एक ज्ञापन भी सौंपा। विपक्षी दल के सदस्यों ने मणिपुर के साथ हरियाणा व देश के अन्य हिस्सों में हुई हिंसा की घटनाओं को भी राष्ट्रपति के समक्ष रखा।


29 व 30 जुलाई को I.N.D.I.A गठबंधन के 21 सांसदों ने हिंसा प्रभावित राज्य मणिपुर का दौरा किया था। मणिपुर से लौटने के बाद सांसदों ने कहा था कि यह हम सभी के लिए एक कठिन दिन रहा। आपको बता दें मणिपुर में बीते 3 मई को कुकी जनजाति (Kuki People) की ओर से निकाले गए आदिवासी एकता मार्च' के दौरान हिंसा भड़क गई और इस दौरान कुकी और मैतेई समुदाय (Meitei Community) के बीच हिंसक झड़प हो गई, तभी से मणिपुर में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं।


 मणिपुर से लौटने के बाद कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई (Gaurav Gogoi) ने कहा कि हम 4 राहत शिविरों में गए और लोगों का दर्द सुना। महिलाएं यह बताते हुए रो पड़ीं कि कैसे उन पर हमला किया गया। तृणमूल कांग्रेस की राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव (Sushmita Dev) ने कहा कि पूरा विपक्ष मणिपुर के साथ खड़ा है वहीं झारखंड मुक्ति मोर्चा की सांसद महुआ माजी (Mahua Maji) ने कहा कि गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने दावा किया कि मणिपुर में शांति लौट आई है, लेकिन शांति कहां है? राज्य अभी भी जल रहा है। DMK सांसद कनिमोझी (Kanimozhi) ने कहा कि मणिपुर के लोग सरकार द्वारा अपमानित महसूस कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया यहां के लोगों को लगता है कि सरकार ने हस्तक्षेप नहीं किया।


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राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू से मुलाकात के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष मलिकार्जुन खड़गे (Mallikarjun Kharge) ने कहा- "हमारे साथियों ने बताया कि मणिपुर हिंसा में हजारों की संख्या में अत्याधुनिक हथियारों का इस्तेमाल हो रहा है। मणिपुर में दो समुदायों के बीच जारी लड़ाई को शांत करने के लिए प्रधानमंत्री को वहां जाना चाहिए। पहले भी कई बार सदन में नियम 267 के तहत अनुमति दी गई है, लेकिन ये सरकार बात सुनने को तैयार ही नहीं है।हमने मणिपुर के साथ हरियाणा में जारी हिंसा की बात भी राष्ट्रपति महोदया के सामने रखी है।"


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