दूसरी ओर नए - नए नियमों के कारण भर्तियाँ कोर्ट में चैलेंज हो रही है। इन सबके कारण अधिकारी बनने का सपना लेकर दिन-रात एक कर के मेहनत कर रहे प्रदेश के युवाओं का इंतजार बढ़ता जा रहा है। और उनकी आयु एवं समय दोनों की आयोग की भेंट चढ़ जा रहे हैं, राज्य के लोक सेवा आयोग पर पिछले साढ़े पाँच सालों में 155 करोड़ खर्च किए गए हैं। साल 2017-2018 में कुल भर्तियाँ की गई 1506, 9.61 करोड़ खर्च किया गया। इसी तरह साल 2018-2019 में कुल भर्तियाँ की गई 404,15.85 करोड़ खर्च किया गया। साल 2019-2020 में कुल भर्तियाँ की गई 1278, 29.23 करोड़ खर्च किया गया। साल 2020-2021 में कुल भर्तियाँ की गई 284, 24.42 करोड़ खर्च किया गया। 2021-2022 में कुल भर्तियाँ की गई 55, 37.10 करोड़ खर्च किया गया। 2022-2023 में कुल भर्तियाँ की गई 788, 31.40 करोड़ खर्च किया गया। 2023-24 में कुल भर्तियाँ की गई 61, 8.60 करोड़ खर्च किया गया। अब सवाल यहाँ यह उठता है कि साल 2021-22 में सिर्फ 55 भर्तियाँ की गई और खर्च हुआ लगभग 37.10 करोड़ खर्च किया गया यानि अब का सबसे ज़्यादा!
HPSC आयोग के खिलाफ कोर्ट में लगभग 473 से अधिक केस अभी चल रहे हैं। इनमें सात भर्तियाँ 2017 से पहले की हैं। 70% भर्तियों के केस साल 19 और 20 में दर्ज हुए थे। इन केसों में IAS प्रोमशन, एचसीएस, असिस्टेंट प्रोफेसर से कर डिप्टी डायरेक्टर आदि सहित अनेक भर्तियाँ शामिल हैं। आयोग खर्च में अग्रणी है और भर्तियों के मामले में उसकी गति काफ़ी धीमी है। जिसके कारण प्रदेश के युवा का भविष्य अंधकार में जा रहा है!
हरियाणा के मुख्यमंत्री में अभी बीते दिन एक महिला के द्वारा रोजगार पर सवाल करने पर उनको चंद्रयान पर भेजने को कह दिया था , जब प्रदेश के सीएम ही ऐसी बात करते हो तो वहाँ के आयोग अपनी मनमानी करेगा ही।

