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एमपी उच्च शिक्षा भर्ती 2018: सफल होने के बाद भी संघर्ष कर रहे जूलॉजी के छात्र, पीएम को भेजा पत्र

एमपी उच्च शिक्षा भर्ती 2018: सफल होने के बाद भी संघर्ष कर रहे जूलॉजी के छात्र, पीएम को भेजा पत्र
फोटो: एमपी उच्च शिक्षा भर्ती 2018: सफल होने के बाद भी संघर्ष कर रहे जूलॉजी के छात्र, पीएम को भेजा पत्र

मध्य प्रदेश इस वक्त बेरोजगारी का हब बनता जा रहा है। सरकार की लेटलतीफी और नियुक्ति को लेकर आनाकानी ने छात्रों को मुश्किल में डाल दिया है। वो चाहे शिक्षक भर्ती के तीस हजार छात्र हों या फिर व्यापम द्वारा आयोजित उच्च शिक्षा भर्ती प्रक्रिया 2018 के जीव विज्ञान से सम्बद्ध विषयों के उत्तीर्ण अभ्यर्थी। सभी अपनी नौकरी को लेकर हर दिन सोशल मीडिया पर गुहार दिखाई देते हैं। 


उच्च शिक्षक भर्ती प्रक्रिया 2018 में चयनित जीव विज्ञान के सहविषय माइक्रोबायोलॉजी, बायोटेक्नोलॉजी, बायोकेमिस्ट्री के अभ्यर्थियों ने पीएम नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है, इस पत्र में उन्होंने शिक्षा विभाग द्वारा इन विषयों को खारिज करने के बारे में भी लिखा है। पत्र के जरिए पीएम को बताया गया है कि मध्यप्रदेश में वर्ष 1998 से लेकर 2013 तक जीवविज्ञान के सहविषय जैसे माइक्रोबायोलॉजी, बायोटेक्नोलॉजी, बायोकेमिस्ट्री इत्यादि को वर्ग 1 (उच्च माध्यमिक) शिक्षक के रूप में सम्मिलित किया गया है। इस संबंध में आगे चर्चा करते हुए कहा गया है कि पीछे जो भर्तियां हुई हैं उसमें इन विषयों से संबंधित लोगों की नियुक्ति हुई है, तथा इन विषयों के शिक्षक वर्तमान समय में स्कूल शिक्षा विभाग मध्य प्रदेश में कार्यरत भी हैं। 

इसी भर्ती के अभ्यर्थी सतेंद्र सिंह ने बताया कि मध्य प्रदेश असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती में बॉटनी एवं जूलॉजी के अंतर्गत ये विषय मान्य हैं लेकिन मध्य प्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग इसे मानने से मना कर रहा है। सत्येंद्र ने बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी का एक पत्र भेजा, वहां भी माइक्रोबायोलॉजी, बायोटेक्नोलॉजी, बायोकेमिस्ट्री जैसे विषय एलिजिबल हैं लेकिन मध्य प्रदेश शिक्षा विभाग ये मानने से इंकार कर रहा है। 

एक अन्य अभ्यर्थी अफसान अलीम ने कहा- कोविड काल में माइक्रोबायोलॉजी, बायोटेक्नोलॉजी, बायोकेमिस्ट्री ही ऐसे विषय हैं जो इंसानों को काम आ रहे हैं। इसी से वैक्सीन वैक्सीन बनी है। कोविड कैसा वायरस है इसी सब्जेक्ट से पता चला। उन्होंने आगे कहा- पहले हमें फॉर्म भरवाकर मेरिट तक ले आए अब वेरिफिकेशन में बिना किसी वाजिब कारण के बाहर कर रहे हैं। ऐसा करने से सात सौ से अधिक अभ्यर्थी सफल होने के बाद भी बेरोजगार हो जाएंगे। 

पीएम को लिखे पत्र में बताया गया है कि वर्ष वर्ष 2017 में उच्च शिक्षा विभाग अपने आदेश दि. 28.11.2017 द्वारा इन विषयों की समकक्षता का निर्धारण पहले ही कर चुका है, जिसके आधार पर मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग ने भी सह प्राध्यापक भर्ती में इन विषयों के अभ्यर्थियों को नियुक्ति प्रदान की हैं। इसके अलावा मध्य प्रदेश शिक्षा विभाग द्वारा संचालित अतिथि शिक्षक प्रबंधन प्रणाली में भी जीव विज्ञान के अंतर्गत इन विषयों के अभ्यर्थियों को समान अवसर प्रदान किया जाता है। यहां तक की नवीन शिक्षा नीति वर्ष २०२० के अंतर्गत भी इन विषयों को स्वीकार किया जा रहा है।

ऐसे में समझना बेहद मुश्किल हो रहा है कि इन आधुनिक विषयों के सफल अभ्यर्थियों को किस आधार पर अयोग्य निर्धारित किया जा रहा है, अभ्यर्थी सफल हैं लेकिन उनके दिमाग में बाहर किए जाने की अशंका भर गई है। वह सीएम से लेकर शिक्षा मंत्री के दफ्तरों का चक्कर काट रहे हैं। लेकिन अभी तक कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला है। अभ्यर्थियों ने अब पीएम को चिट्ठी लिखी है और उम्मीद जताई है कि वहां से जल्द ही कोई सुखद आदेश आएगा। 
 

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