उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर का गुलाम मोहम्मद। 2 मई 2017 को गुलाम अपने घर के पास खेतों में गया इस बात से अंजान कि खेत में मौत उसका इंतज़ार कर रही थी। हिंदू युवा वाहिनी के सदस्यों ने गुलाम के साथ मारपीट की। घायल गुलाम के बेटे वहाँ पहुँचे और अने पिता को अस्पताल ले जाने लगे। लेकिन रास्ते में ही गुलाम ने दम तोड़ दिया। जानते हैं इसका कारण? गुलाम के परिजनों के अनुसार इसका कारण उनका मुस्लिम होना था। दरअसल, गुलाम अपने गाँव के तीन मुस्लिम परिवारों में से सबसे ज्यादा प्रभुत्वशाली था। उनके गाँव से एक हिंदू लड़की किसी मुस्लिम लड़के के साथ भाग गई। जिसके बाद लगातार हिंदू युवा वाहिनी के सदस्य गुलाम के परिवार को परेशान करने लगे और धमकियाँ देने लगे। आख़िरकार गुलाम को मार दिया गया। ये कहानी केवल एक गुलाम अहमद की है। हमारे देश में ऐसी खूब कहानियाँ हैं जहाँ केवल नफ़रत के कारण लोगों को मार दिया जाता है।
क्या एक निश्चित सोशल ग्रुप से तआल्लुक़ रखने की वज़ह से आपको कभी डर लगा है? एक निश्चित विचारधारा का अनुसरण करने के कारण दूसरी विचारधाराओं के लोगों से आपने अपने आप को आतंकित महसूस किया है? महिला होने के कारण पुरुषों के सामने आने से आप कतराती हैं? Halt the Hate नाम की वेबसाइट के रिपोर्ट की मानें तो इन सवालों का जवाब हाँ होगा। मुल्क़ की आब-ओ-हवा में घुले नफ़रत ने लोगों के दिलों से इंसानियत और मानवीय संवेदनाओं को ख़त्म कर दिया है।
हेट क्राइम एकदम से विकसित हो रहा ट्रेंड
अपराध मानव सभ्यता के साथ साथ सफ़र कर रहे हैं। समाज की असमानता अपराध को जन्म देती रही है और आगे भी देती ही रहेगी। निजी महत्वाकांक्षाएँ अपराध को कभी समूल नष्ट नहीं होने देंगी। लेकिन आज अपराध निजी महत्वाकांक्षाओं और असमानता के कारणों को पीछे छोड़ चुकी है। अपराध नफ़रत के आधार पर प्रस्फुटित होने लगा है। पूर्वाग्रहों से ग्रस्त न्यू इंडिया के अपराधियों के निशाने पर आप भी हो सकते हैं अगर
- आप किसी समुदाय विशेष से संबंध रखते हो,
- किसी ख़ास धर्म से या जाति से हैं या फिर
- अाप किसी एक राजनैतिक विचारधारा का समर्थन करते हों |
हेट क्राइम का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है |
haltthehate.amnesty.org नामक एक वेबसाइट के रिपोर्ट के अनुसार साल 2017 में देश भर में 212 ऐसी आपराधिक घटनाएँ हुईं जिन्हे हेट क्राइम की श्रेणी में रखा जा सकता है। इनमें से 53 घटनाएँ मुस्लिमों के खिलाफ़ और 140 घटनाएँ दलितों के खिलाफ हुई। शेष आदिवासियों, ट्रांसजेंडर्स, इसाई और विदेशियों के साथ हुई। 79 घटनाओं में अपराधी ने पीड़ित को जान से मार दिया। 103 घटनाओं में मार-पीट की गई। 45 घटनाओं में परेशान किया गया जबकि लगभग 35 घटनाओं में पीड़ित को सेक्सुअली हराश किया गया या फिर उसका बलात्कार किया गया। 25 घटनाओं में पीड़ित की संपत्ति को नुकसान पहुँचाया गया। लगभग 200 हिंसाएँ जाति या धर्म से संबंधित थी।
हेट क्राइम्स के मामले में उत्तर प्रदेश देश में अव्वल
हेट क्राइम्स के मामले में देश में सबसे उपर आता है उत्तर प्रदेश का नाम। कुल 212 में से लगभग 24 फ़ीसदी मतलब 50 अपराध अकेले उत्तर प्रदेश में हुए हैं। राजस्थान इस मामले में 18 अपराधों के साथ दूसरे नंबर पर है जबकि तमिल नाडु 17 अपराधों के साथ तीसरे नंबर पर।
वोटबैंक की राजनीति दे रही है हेट क्राइम को बढ़ावा
बीजेपी सांप्रदायिक राजनीति के लिए जानी जाती रही है। बीजेपी की सवर्ण मानसिकता भी किसी से छिपी नहीं है।और अगर बात कांग्रेस की ही की जाए तो वे भी मुस्लिम तुष्टिकरण की नीति पिछले कई सालों से अपना रहे हैं। राजनैतिक धंधा चलाए रखने के लिए कोई भी राजनैतिक दल खुलकर ग़लत को ग़लत नहीं कह पाता। और इसी धंधे के विस्तार के लिए सबने अपना अपना कस्टमर आइडेंटीफाई किया हुआ है जिसे राजनीति की भाषा में वोटबैंक भी कहा जा सकता है।
जो राजनैतिक दल किसी ख़ास समुदाय के उत्थान की ज़िम्मेदारी लेकर आगे बढ़े थे, वे भी उन समुदायों में औरों के प्रति ज़हर भरने के अलावा अन्य कोई काम नहीं कर रहे। जैसे - बसपा और दलित, राजद और यादव समुदाय, बीजेपी और हिंदू और सवर्ण आदि।
समस्या के हैं मनोवैज्ञानिक कारण
समस्या केवल राजनैतिक नहीं, बल्कि मनोवैज्ञानिक है। आप गौर करें तो पाएँगे कि महिला सशक्तिकरण के मंचों पर महिलाओं के सशक्त होने की बातें कम होती हैं और पुरुषों को गालियाँ अधिक दी जाती हैं। दलितों की किसी मजलिस में उन्हें बार-बार अन्य जातियों के खिलाफ भड़काया जाता है। हिंदुओं को मुस्लिमों और मुस्लिमों को हिंदुओं के खिलाफ भड़काना आम है। हर वर्ग के मन में दूसरे के खिलाफ नफ़रत ठूँस-ठूँस कर भर दिया जाता है। और इसकी शुरुआत हमारे घरों से हो जाती है।
नफ़रत के इस धुएँ ने हम सभी को अंधा बना दिया है, जहाँ हमें इंसानियत और संवेदनाएँ दिख नहीं पातीं। ज़रूरी है इस धुएँ को छाँटने की ताकि हम सच को देख सकें। ज़रूरी है अन्याय के खिलाफ खड़े होने की चाहे वहा किसी भी वर्ग, जाति, लिंग या संप्रदाय के लोगों के साथ हो रहा हो।

