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पूर्व उप-प्रधानमंत्री बाबू जगजीवन राम की जयंती पर जाने जीवन संघर्ष !

पूर्व उप-प्रधानमंत्री बाबू जगजीवन राम की जयंती पर जाने जीवन संघर्ष !
फोटो: पूर्व उप-प्रधानमंत्री बाबू जगजीवन राम की जयंती पर जाने जीवन संघर्ष !
दलित परिवार में जन्म लेकर राष्ट्रीय राजनीति के शिखर तक पहुंचने वाले बाबू जगजीवन राम (Babu Jagjeevan Ram) उस दौर में उप प्रधानमंत्री बने, जिस दौर में जातिवाद अपने चरम पर था। उस समय जब दलित समाज के व्यक्ति को खाट (चारपाई) पर बैठने तक नही दिया जाता था। उस दौर में देश के उप-प्रधानमंत्री पद पर काबिज होना उनके लिए बहुत बड़ी चुनौती एवं संघर्ष था।


बचपन से ही भेदभावपूर्ण जीवन -

बाबू जगजीवन राम (Babu Jagjeevan Ram) का जन्म 5 अप्रैल 1908 को बिहार के रोहतास जिले के चंदवा गांव में सोभी राम और बसंती देवी के घर हुआ था। उनकी स्कूली शिक्षा आरा शहर में हुई, जहां उन्हें जातिगत भेदभाव का सामना करना पड़ा। वहां उन्हें अछूत (Untouchable) माना जाता था। जगजीवन राम को स्कूल में पानी पीने के लिए अलग बर्तन का इस्तेमाल करना पड़ता था, स्कूल में रखे घड़े से 'अछूतों' को पानी पीने की मनाही थी। इस घटनाओं से आहत होकर जगजीवन राम ने वहां रखे घड़े से को तोड़कर विरोध दर्ज कराया, जिसके बाद स्कूल के प्रधानाचार्य को अछूतों के लिए अलग से रखे गए पानी पीने के बर्तन को हटाना पड़ा। 1925 ई. में जगजीवन राम पंडित मदनमोहन मालवीय (Pandit Madan Mohan Malviya) से मिले और उनसे प्रभावित होकर मालवीय जी के आमंत्रण पर बनारस हिंदू विश्वविद्यालय गए। विश्वविद्यालय में भी उन्होंने जातिगत भेदभाव का सामना करना पड़ा। इस घटना ने उन्हें समाज के एक वर्ग के साथ इस प्रकार के सामाजिक बहिष्कार के खिलाफ विरोध करने के लिए प्रेरित किया। इस तरह के अन्याय के विरोध में उन्होंने अनुसूचित जातियों को संगठित किया।


जीवन से जुड़े प्रमुख पहलु - 

  • कलकत्‍ता यूनिवर्सिटी (Calcutta University) में पढ़ाई के दौरान जगजीवन राम की मुलाकात सुभाष चंद्र बोस (Subhash Chandra Bose) से हुई और वहीं वे महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) के संपर्क में भी आए। 
  • जगजीवन राम 1931 में कांग्रेस से जुड़े तथा 1946 में पंडित जवाहरलाल नेहरू (Pandit Jawaharlal Nehru) की अंतरिम सरकार में सबसे कम उम्र के मंत्री बने। साल 1952 के स्‍वतंत्र भारत के पहले आम चुनाव में वे पहली बार सासाराम से चुनाव लड़े और 1986 तक वहां के सांसद रहे।
  • आजादी के दौर में जगजीवन राम ने महात्मा गांधी के साथ हो गए। 9 अगस्त 1942 को महात्मा गांधी ने मुंबई से "भारत छोड़ो आंदोलन" जब शुरू किया तो, जगजीवन राम सबसे आगे थे और मात्र 10 दिनों में ही उन्होंने अपनी गिरफ्तारी दे दी। 

Babu Jagjeevan Ram

 

छुआछूत विरोधी (Anti Untouchability) सम्मेलन - 

छुआछूत विरोधी सम्मेलन (Anti Untouchability Conference) में बाबू जगजीवन राम ने कहा कि "सवर्ण हिन्दुओं की इन नसीहतों से कि मांस भक्षण छोड़ दो, मदिरा मत पियो, सफाई के साथ रहो, अब काम नहीं चलेगा। अब दलित उपदेश नहीं, अच्छे व्यवहार की मांग करते हैं और उनकी मांग स्वीकार करनी होगी। शब्दों की नहीं, ठोस काम की आवश्यकता है। मुहम्मद अली जिन्ना ने मुसलमानों को अपना अलग देश बनाने के लिए उकसा दिया है। डॉ भीमराव राव अम्बेडकर ने अछूतों के लिए पृथक् निर्वाचन मंडल की मांग की है। राष्ट्र की रचना हमसे हुई है, राष्ट्र से हमारी नही, राष्ट्र हमारा है। इसे एकताबद्ध करने का प्रयास भारत के लोगों को ही करना है। महात्मा गांधी ने निर्णय लिया है कि छुआछूत को समाप्त करना होगा। इसके लिए मुझे अपनी कुर्बानी भी देनी पड़े तो मैं पीछे नहीं हटूंगा। देश की आज़ादी की लड़ाई में सभी धर्म और जाति के लोगों को बड़ी संख्या में जोड़ना होगा।" 


jagjivan-babu

 


वहीं बाबू जगजीवन राम मात्र 28 साल के उम्र में ही बिहार विधानपरिषद (Bihar Legislative Council) के सदस्य बन गए थे। उनके नाम लगातार 50 साल सांसद रहने का रिकॉर्ड दर्ज है। बाबू जगजीवन संसद को अपना दूसरा घर मानते थे। दलितों के मसीहा माने जाते रहे बाबू जगजीवन का राजनीतिक जीवन संघर्ष भरा रहा। स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर आज़ादी के बाद बनी कई सरकारों तक में उनकी अहम भूमिका रही। 


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