बिहार में विधानसभा चुनाव की अधिसूचना जारी होने के बाद सियासी दलों में उठापटक शुरु हो गई है। महागठबंधन व एनडीए खेमें में पार्टियों के शामिल होने व बाहर होने का दौर लगातार जारी है। पहले चरण के चुनाव के लिए नामांकन की अंतिम तारीख 8 अक्टूबर है लेकिन अभी तक कोई भी बड़ी पार्टी ने प्रत्याशियों के नामों की घोषणा नहीं की है। गठबंधन दलों ने तो अभी ये भी क्लीयर नहीं किया कि किसके हिस्से में कौन सी सीटें जाएंगी।
हालांकि पुराने समीकरण और नेताओं की सक्रियता को देखते हुए कहा जा सकता है कि कुछ सीटों पर प्रत्याशी पहले से ही तय हैं। नवादा जिले के हिसुआ सीट पर भी यही नजर आ रहा है। यहां पिछले 15 साल से भाजपा के अनिल सिंह विधायक रहे हैं। इसबार भी उन्हें टिकट मिलने का पूरा अनुमान है, वहीं कांग्रेस से इस सीट पर लोकप्रिय प्रत्याशी डॉ. जनार्दन प्रसाद सिंह की प्रबल दावेदारी नजर आ रही है।
जनार्दन सिंह की दावेदारी इसलिए भी मजबूत है क्योंकि उनकी पैठ यहां के बुजुर्ग कांग्रेस नेताओं में बनी हुई है। पिछले दिनों जनार्दन सिंह ने हिसुआ विधानसभा के लिए अपना संकल्प पत्र जारी किया था, जिसमें उन्होंने किसान, बेरोजगार, व्यवसायी व महिलाओं से जुड़े मुद्दे को उठाया था। न सिर्फ इनके मुद्दों का जिक्र किया बल्कि उनकी समस्याएं कैसे दूर होंगी उसे लेकर भी एक रोडमैप जारी किया। उनके संकल्प पत्र को लेकर लोगों ने कहा, इसमें कुछ भी हवाहवाई नहीं है।
इस सीट पर कांग्रेस की जीत इसलिए भी पक्की नजर आती है क्योंकि पिछले 15 सालों से यहां वादे तो बड़े बड़े किए गए लेकिन जमीन पर काम होता नजर नहीं आया। अकबरपुर प्रखंड की सड़कों का बुरा हाल है। यहां की संकरी सड़के लगातार जाम रहती हैं। चौक-चौराहों पर बिजली के तार किसी आफत की तरह मंडराते नजर आते हैं। हिसुआ विधानसभा के आसपास वाले विधानसभा क्षेत्रों में बिजली व्यवस्था ठीक है लेकिन यहां के इलाकों में आज भी स्थिति दयनीय है।
हिसुआ की राजनीति पर लंबे वक्त से नजर जमाए मोहम्मद वसीम कहते हैं कि यहां भूमिहार वोट प्रमुख है, इसलिए जीत भी इसी वर्ग से आने वाले प्रत्याशी की तय मानी जाती है, अनिल सिंह को जनता ने देख लिया, उनके खिलाफ जनता में आक्रोश है, अगर यहां कांग्रेस डॉ. जनार्दन सिंह को प्रत्याशी बनाती है तो उनकी जीत किसी भी कीमत पर नहीं रोकी जा सकती। क्योंकि राजद और कांग्रेस के वोट बैंक के साथ भूमिहारों का भी वोट प्राप्त होगा।
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