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Women Reservation Bill - महिला आरक्षण बिल की मांग को लेकर जंतर मंतर पर महिलाओं की हुंकार !

Women Reservation Bill - महिला आरक्षण बिल की मांग को लेकर जंतर मंतर पर महिलाओं की हुंकार !
फोटो: Women Reservation Bill - महिला आरक्षण बिल की मांग को लेकर जंतर मंतर पर महिलाओं की हुंकार !
Women Reservation Bill : तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव (K. Chandrasekhar Rao) की बेटी और BRS नेता के. कविता (K. Kavita) ने 10 मार्च 2023 को दिल्ली स्थित जंतर-मंतर (Jantar Mantar Delhi) पर सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक धऱना दिया और भूख हड़ताल पर बैठी थी। उनके इस धरना और भूख हड़ताल को करीब 18 विपक्षी दलों ने समर्थन दिया। इस दौरान बड़ी बात ये है कि कांग्रेस ने इस धरने में के. कविता (K. Kavita) का समर्थन नहीं किया। संसद और विधानसभा में महिलाओं को आरक्षण दिलाने की मांग को लेकर ये भूख हड़ताल की थी। 


 

BRS नेता के कविता (K. Kavita) का कहना है कि केंद्र में जो सरकार है उसके पास पूर्ण बहुमत है। ऐसे में 1996 से महिला आरक्षण बिल (Women Reservation Bill) पास नहीं हुआ है, जिसे BJP सरकार को पास करना चाहिए। BJP ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में इस बिल को पास करने का वादा किया था, लेकिन अभी तक इसे पूरा नहीं किया गया है। के. कविता (K. Kavita) ने महिला आरक्षण विधेयक को संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण में पारित करने की मांग को लेकर 10 मार्च को भूख हड़ताल की। संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण 13 मार्च को शुरू होकर 6 अप्रैल को समाप्त होगा।

 

K. Kavita

 

आखिर महिला आरक्षण बिल क्या है (Women Reservation Bill Kya Hai) - 

महिला आरक्षण बिल (Women Reservation Bill) का मूल विचार एक संवैधानिक संशोधन (Constitutional Amendment) से हुआ था और वर्ष 1996 में पारित किया गया था। 108वें संविधान संशोधन द्वारा प्रावधान किया गया कि ग्राम पंचायत के सरपंचों की एक- तिहाई संख्या महिलाओं के लिए आरक्षित (Reserved) हो। इसके बाद लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में भी महिलाओं को आरक्षण देने और एक-तिहाई भूमिका देने की मांग होने लगी, इसी को लेकर महिला आरक्षण विधेयक (Women Reservation Bill) की मांग उठी। इस विधेयक को मई 2008 में राज्यसभा (Rajya Sabha) में पेश किया गया था और एक स्थायी समिति के पास भेजा गया था। इसे वर्ष 2010 में संसद (Parliament) में पारित किया गया तथा अंत में लोकसभा (Lok Sabha) को प्रेषित किया गया। मगर यह बिल 15वीं लोकसभा के साथ लैप्स हो गया। अब इस महिला आरक्षण विधेयक (Women Reservation Bill) को बजट सत्र (Budget Session) के दूसरे चरण में पारित करने की मांग तेज हो गई है। 


Women Reservation Bill

 

असल में राजनीति में महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण (Reservation) की मांग यू ही नहीं की जा रही है, बल्कि इसके पीछे लंबी कहानी है। आमतौर पर चुनावों में महिला समानता की बात तो होती है लेकिन महिला उम्मीदवारों को टिकट देने के नाम पर पार्टियां पीछे हट जाती हैं। ऐसे कई कारणों से मुख्यधारा की राजनीति में महिलाएं काफी कम हैं। इसका सीधा असर महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर होता है और ऐसे मुद्दे अक्सर पीछे रह जाते हैं। "भारत पुरुष प्रधान देश है और 21वीं सदी में भी पितृसत्तात्मक (Patriarchal) सोच यहां हावी रहती है। महिलाओं के लिए क्या अच्छा है ?क्या बुरा है ? इसका निर्णय भी पुरूष लेते हैं।" ऐसे में समझा जा सकता है कि महिलाओं को ये लोग कितनी आसानी से आज़ादी और राजनीति में भूमिका निभाने देंगे। तभी महिला आरक्षण बिल या विधेयक (Women Reservation Bill) का आना बहुत जरूरी है, ताकि सदन में महिलाओं की समस्याओं को बुलंती के साथ उठाया जा सके। यहां समझने वाली बात ये भी है कि BRS नेता के. कविता (K. Kavita) दिल्ली के जंतर-मंतर (Jantar Mantar) से तो महिलाओं के अधिकार की बात कर रही हैं। लेकिन उन्ही के राज्य में पिछले विधानसभा चुनाव में 119 सीटों पर मतदान हुआ और केवल 6 महिलाएं ही विधानसभा (Parliament) पहुंची हैं। परेशानी यह है कि सभी राजनीतिक पार्टियां केवल राजनीति के लिए मुद्दा उठाती तो हैं लेकिन उसे अमली जामा नहीं पहनाया जाता है।

तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव (K. Chandrasekhar Rao) की पुत्री के.कविता (K. Kavita) ने सभी राजनीतिक दलों का आह्वान किया कि वे महिला आरक्षण विधेयक (Women Reservation Bill) को पारित कराने के लिए सरकार पर दबाव बनाएं।उनका कहना था कि मोदी सरकार के पास पूर्ण बहुमत है। ऐसे में वह इस विधेयक को आसानी से पारित करा सकती है। के.कविता (K. Kavita) ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (Draupadi Murmu) से भी आग्रह किया कि वह इस विषय में दिलचस्पी दिखाएं और महिलाओं के साथ खड़ी हों।

K. Kavita

 

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के महासचिव सीताराम येचुरी (Sitaram Yechury) की उपस्थिति में के.कविता (K. Kavita) ने दिल्ली के जंतर-मंतर (Jantar Mantar) पर 6 घंटे की भूख हड़ताल की शुरुआत की। उन्होंने मोदी सरकार से मांग की कि वह महिला आरक्षण विधेयक को संसद के इसी सत्र में पेश करे। उनके अनशन में आम आदमी पार्टी (AAP) के संजय सिंह (Sanjay Singh), शिरोमणि अकाली दल (Shiromani Akali Dal) के नरेश गुजराल (Naresh Gujral), मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (Communist Party of India Marxist) की सुभासिनी अली (Shiromani) Ali, पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की अंजुम जावेद मिर्जा, नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) की शमी फिरदौस, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के श्याम रजक, समाजवादी पार्टी (SP) की पूजा शुक्ला, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) की सीमा मलिक और कई अन्य नेता शामिल हुए और अपना समर्थन जताया।

वहीं के.कविता (K. Kavita) ने अनश्न खत्म होने के बाद कहा कि "जब तक महिलाओं को उनका अधिकार नहीं मिल जाता है, और ये विधेयक पारित नहीं होता है, पूरे देश में ऐसे प्रदर्शन और आंदोलन जारी रहेंगे।" 


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