बिहार चुनाव के मद्देनजर वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने चुनावी घोषणा पत्र जारी कर दिया है. भाजपा ने वादा किया है कि हर बिहारवासी को कोरोना वैक्सीन फ्री में दिया जाएगा. इसके साथ ही यह भी कहा गया है कि बिहार में 19 लाख नौकरियां दी जाएंगी. भाजपा के इन वायदों से सियासी बवंडर आ गया है. विपक्षी पार्टियों के साथ सोशल मीडिया पर लोग भी सरकार पर तरह-तरह के सवाल उठा रहे हैं. आइये जानते हैं कि क्या भाजपा के ये वायदे चुनाव में नैतिक हैं या नहीं….
क्या वैक्सीन का मुद्दा चुनावी होना चाहिए?
कोरोना वैक्सीन! इसका इंतजार दुनियाभर के लोगों को है. भारतवासी भी इसी के इंतजार में हैं कि जब ये आएगा तो वे खुलकर अपनों के संग जी सकेंगे. पहले की तरह आजाद हो सकेंगे, मास्क से आजादी पा सकेंगे. लेकिन सरकार अपना कर्तव्य निभाने के बजाए, इसे चुनावी मुद्दा बना रही है. केंद्र सरकार का कहना है कि अगर हम जीतते हैं तो वैक्सीन केवल बिहारवासियों को फ्री में उपलब्ध कराएंगे. यानी बिहार में चुनाव है इसलिए फ्री में वैक्सीन दिया जाएगा. अगर न होता तो उन्हें भी न पूछा जाता. इस वायदे से केंद्र सरकार ने राज्यों के साथ खुलेआम भेदभाव किया है.
चुनावी समय में 'सिर्फ बिहार' को वैक्सीन, संघीय ढांचे पर चोट तो नहीं?
पीएम मोदी ने हाल ही में कहा था कि वैक्सीन पर हमारे मेडिकल रिसर्च संस्थान तेजी से काम कर रहे हैं और जल्द ही हम इसे बना लेंगे. लेकिन केवल बिहार को वैक्सीन देने की बात करना कहीं ये संघीय ढांचे पर चोट करने जैसा तो नहीं है. केंद्र सरकार की जिम्मेदारी होती है कि वह देश के सभी राज्यों को बिना किसी भेदभाव के मदद करे. महामारी जैसे वक्त में तो यह जिम्मेदारी दोगुनी हो जाती है.
अन्य राज्यों को क्यों नहीं 'फ्री वैक्सीन'?
WHO ने भी कहा है कि कोई भी देश अगर वैक्सीन बनाता है तो वह अपने नागरिकों और दुनियाभर के नागरिकों को फ्री में बांटेगा. दूसरे देशों को बांटने पर केवल लागत ले सकता है. लेकिन केंद्र सरकार तो अपने ही नागरिकों को वोट के बदले वैक्सीन बेच रही है. शेष देशवासियों के मन में यह आ रहा होगा कि वे बिहारी नहीं हैं इसलिए उन्हें वैक्सीन खरीदना पड़ेगा. ट्विटर पर आज ट्रेंड भी हुआ था, #चलो_बिहार. कुल मिलाकर यह केंद्र की विभाजनकारी नीति है.
वैक्सीन आई नहीं लेकिन चुनावी वायदे कर दिए
दुनियाभर में अभी कोरोना के वैक्सीन पर ट्रायल चल रहा है. कुछ फेल हो रहे हैं तो कुछ थोड़ी-बहुत सफलताएं भी पा रहे हैं और कुछ तो ट्रायल भी बंद कर रहे हैं. वैक्सीन बनाने में अभी तक किसी को खास उपलब्धि नहीं हासिल हुई है. भारत सरकार को कुछ पता नहीं है कि वैक्सीन कब आएगी, लेकिन चुनावी वायदों में बता दिया कि चुनाव जीते तो फ्री में हर बिहारी को वैक्सीन बांटेंगे. वास्तव में चुनाव जीतने के बाद फ्री वैक्सीन देने का वायदा केवल एक मजाक है, जिसे बिहारवासियों को समझना होगा.
19 लाख नौकरियां?
भाजपा ने अपने घोषणा पत्र में कहा है कि वे जब जीत जाएंगे तो 19 लाख नौकरियां देंगे. इससे पहले जब महागठबंधन की ओर से तेजस्वी यादव ने 10 लाख नौकरियां देने का वादा किया था तो सीएम नीतीश ने सवाल उठाया था कि ‘इतने पैसे कहां से लाएंगे, नकली नोट से लाएंगे या जेल से लाएंगे?’ यहां जेल से लाने का मतलब लालू यादव पर तंज था. लेकिन आज भाजपा ने खुद 19 लाख नौकरियां देने के लिए वायदा कर दिया है. अब सवाल ये है कि सीएम नीतीश कहां से 19 लाख नौकरियां लाएंगे? कहीं नोटबंदी से तो नहीं!
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