राहुल गांधी ने लद्दाख के किस मुद्दे पर दिया बयान?
इस विवाद का ताज़ा अध्याय अप्रैल 2020 में शुरू हुआ था जब चीन ने विवादित LAC के पूर्वी लद्दाख और अन्य इलाकों में बड़ी संख्या में सैनिकों और हथियारों के साथ मोर्चाबंदी की जिससे गलवान घाटी, पैंगोंग त्सो और गोगरा-हॉट स्प्रिंग्स जैसे इलाकों में दोनों देशों की सेनाएँ आमने-सामने आ गईं। चीन और भारत दोनों देशों के बीच कोर कमांडर स्तर (Corps Commander Level) की 11 बैठकें हो चुकी हैं और 12वीं बैठक के लिए चीन ने 26 जुलाई 2021 की तारीख़ को सुझाया गया था लेकिन भारत इस दिन कारगिल विजय दिवस (Kargil Vijay Diwas) मना रहा था इसलिए इस बैठक को टाल दिया गया और यह नहीं हो पाई। इस बैठक के लिए आज तक एक नई तारीख़ की घोषणा का इंतज़ार किया जा रहा है।
मामले ने 15 जून को हिंसक रूप तब ले लिया जब लद्दाख की गलवान घाटी में हुए संघर्ष में 20 भारतीय सेना के जवानों की मौत हो गई। कई महीनों बाद चीन ने इतना ही माना कि इस झड़प में उसके 4 चीनी सैनिकों की मौत भी हुई थी जबकि कई जानकर कहते हैं कि चीनी सैनिकों की मौत का आंकड़ा इससे कहीं अधिक था।

चीन पर राहुल ने PM को ठहराया झूठा
चीन का मुद्दा अभी भी शांत होने का नाम नही ले रहा है इस पर कांग्रेस नेता और सांसद राहुल गांधी (Rahul Gandhi) बाइक राइड कर लद्दाख स्थित पैंगोंग झील (Pangong Lake) गए थे। वहां से लौटने के बाद उन्होंने मीडिया से बात की। इस दौरान उन्होंने बताया कि भारत जोड़ो यात्रा लद्दाख क्यों नहीं पहुंच पाई थी। साथ ही बताया कि उन्हें लद्दाख के कुछ लोगों ने बताया है कि चीन ने उनके पशुओं के चरने वाली जगह पर कब्जा कर लिया है।

पूरा NDA हुआ राहुल पर हमलावर
गांधी की टिप्पणियों के बाद, केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) ने कांग्रेस नेता पर पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस को अपने कार्यकाल के दौरान चीन को जमीन देने के मामले में अपने अंदर झांकना चाहिए। सिंधिया ने कहा, “कांग्रेस पार्टी, जिसने ‘हिंदी चीनी भाई भाई’ का नारा तब भी लगाया था जब उसने चीन को 45,000 वर्ग किलोमीटर जमीन दे दी थी (1962 के युद्ध के बाद) उसे पहले अपने अंदर झांकना चाहिए।”
वरिष्ठ बीजेपी नेता रविशंकर प्रसाद (Ravi Shankar Prasad) ने भी कांग्रेस नेता पर हमला किया और उन्हें याद दिलाया कि उनकी पार्टी ने कथित तौर पर क्या किया था। प्रसाद ने कहा, “आज, जब राहुल गांधी लद्दाख के बारे में बात करते हैं, तो मैं उन्हें दो बातें याद दिलाना चाहता हूं। आपके परदादा जवाहर लाल नेहरू के समय, 1962 के युद्ध से पहले और बाद में चीन ने भारत की जमीन पर कब्जा कर लिया था। क्या आपको वो याद है? क्या आपको याद है कि कैसे दलाई लामा को तिब्बत छोड़ने के लिए मजबूर किया गया था?”
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा, “दूसरी बात, आपकी सरकार का आधिकारिक रुख यह था कि लद्दाख से अरुणाचल तक चीनी सीमा पर सड़कों का निर्माण नहीं किया जाना है। क्योंकि इससे चीन चिढ़ जाएगा। तत्कालीन रक्षा मंत्री ए.के. एंटनी ने संसद में कहा था कि हम बुनियादी ढांचा खड़ा करके चीन को परेशान नहीं करना चाहते। यह आपका (कांग्रेस पार्टी का) अतीत है. यही आपका विचार है।”
संजय राउत का मिला समर्थन -
वरिष्ठ शिवसेना नेता और सांसद संजय राउत (Sanjay Raut) ने कहा कि अगर मोदी सरकार चीन के कारण पैदा हुई स्थिति को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है तो यह “अन्याय” है। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा, “चीन ने जमीन पर कब्जा कर लिया है और इसके सबूत भी हैं। अगर हमारे रक्षा मंत्री और प्रधानमंत्री इसे स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं, तो मुझे लगता है कि यह भारत माता के साथ अन्याय है।”
गांधी का समर्थन करते हुए उन्होंने कहा, “राहुल गांधी ने कहा है कि चीन ने जमीन पर कब्जा कर लिया है। उस पर प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री को लोगों को गुमराह नहीं करना चाहिए और सच बताना चाहिए। यही तो राहुल जी कह रहे हैं।”
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता उदित राणा (Udit Rana) ने कहा कि चीन के भारत में प्रवेश नहीं करने को लेकर प्रधानमंत्री मोदी "झूठ" बोल रहे हैं। उन्होंने मीडिया से कहा, “या तो वह बिक चुके हैं या फिर चीन से डरे हुए हैं. राहुल गांधी ने जो कहा वह सच है।”
PM और रक्षा मंत्री ने क्या कहा था?
भारत-चीन के बीच जारी तनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने सर्वदलीय बैठक बुलाई थी। इस बैठक में उन्होंने कहा कि हमारी सीमा में न कोई घुसा है और न ही हमारी कोई पोस्ट किसी दूसरे के कब्जे में है। बैठक में पीएम मोदी ने कहा कि भारत शांति और मित्रता चाहता है लेकिन संप्रभुता को कायम रखना हमारे लिए सबसे महत्वपूर्ण है। हमने उचित कदम उठाने के लिए सेना को खुली छूट दे रखी है। पीएम मोदी ने आगे कहा कि जल-थल-नभ में हमारी सेनाओं को देश की रक्षा के लिए जो करना है, वो कर रहे हैं। आज हमारे पास ये क्षमता है कि कोई भी हमारी एक इंच जमीन की तरफ आंख उठाकर भी नहीं देख सकता।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) ने आगे कहा था, "इस फेस-ऑफ में हाथापाई हुई और भारतीय सेना ने बहादुरी से PLA को हमारे क्षेत्र में अतिक्रमण करने से रोका और उन्हें उनकी पोस्ट पर वापस जाने के लिए मजबूर कर दिया. इस झड़प में दोनों ओर के कुछ सैनिकों को चोटें आईं। मैं इस सदन को यह बताना चाहता हूं कि हमारे किसी भी सैनिक की मृत्यु नहीं हुई है और न ही कोई गंभीर रूप से घायल हुआ है।" रक्षा मंत्री बताया कि इस घटना के बाद चीनी पक्ष को इस तरह की कार्रवाई के लिए मना गया है और सीमा पर शांति बनाए रखने के लिए कहा गया है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को चीनी पक्ष के साथ कूटनीतिक स्तर पर भी उठाया गया है।
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