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सत्ता के ब्लैक होल में देश की अर्थ व्यवस्था

सत्ता के ब्लैक होल में देश की अर्थ व्यवस्था
फोटो: सत्ता के ब्लैक होल में देश की अर्थ व्यवस्था

हर साल बजट सत्र में सरकार के पास अपनी नीयत दिखाने का अवसर होता है, और उसके बाद पूरे साल उसे साबित करने का। देश का गरीब, बजट तथा चुनावी वादों में अपने आप को ढूंढता फिरता है। चुनावी घोषणा पत्र तथा सरकारी रिपोर्ट में अपने ख्वाबों का आभासी प्रतिबिंब देखने वाले गरीबों को मोदी सरकार ने एक बार फिर निराश किया है।


गरीबी एक ऐसी मुसीबत है, जो देश के हर निर्माण क्षेत्र से जुड़ी हुई है। इसके अलावा एक‌ आबादी और भी गरीब है, वो जो अर्थ जगत के किसी भी क्षेत्र नहीं जुड़ पाईं। जो सरकारों की आर्थिक नीतियों के भीषण विफलताओं की प्रतीक है। मोदी सरकार अपने पिछले सभी बजटों की तरह इस बार भी ऐसी कोई योजना नहीं ला पाई जिससे अर्थ जगत से दूर रह रहे लोगों को जोड़ा जा सके।


भारत में अर्थ जगत का बहुत बड़ा हिस्सा आज भी कृषि पर निर्भर है। लेकिन बजट 2018 में कोई विशेष प्रावधान नहीं लाया गया जिससे किसानों की तरक्की सुनिश्चित की जा सके। 2022 के ख्वाब बेचने कीधुंध में सरकार ने मनचाही परिभाषा बनाते हुए किसानों को लागत मूल्य का 1.5 गुना कीमत मिलने की बात तो कर दी लेकिनगौर से देखने पर यह एक बहुत बड़ा झूठ लगता है। नये गोदाम, समृद्ध मंडियों तथा उचित कीमत के लिए किसान हमेशा से धरने देते रहे हैं। लेकिन अलग अलग सरकारें उनकी मांगों को हमेशा दरकिनार करती रही है। मोदी सरकार ने ऐसा बजट पेश किया है जो अगले चुनाव में सरकार की मदद करे या सरकार की गलतियों से गिर रही अर्थव्यवस्था से लोगों का ध्यान हटाए। कृषि से संबंधित अत्याधुनिक तकनीक, भूमि उर्वरता और संकर बीज के उत्पादन के लिए नये प्रावधान नहीं किए गए। हर साल की तरह कुछ राशि आवंटित हुई है जिसका भविष्य व्यवस्था के ‌ब्लैक‌ होल में दफन होना होगा।

शिक्षा और विज्ञान को समाज के अछूत की तरह ‌रखा गया है। जिसके बारे में मुख्य आर्थिक सलाहकार कहते हैं की "हम डेवलपिंग ‌देश है इसलिए ‌शिक्षा तथा ‌स्वास्थ्य जैसे योजनाओं पर‌‌ ज्यादा खर्च नहीं कर सकते”। स्वास्थ्य पर GDP का 2% से भी कम खर्च किया जा रहा है। देश मे 10 लाख से ज्यादा परिवार इलाज के खर्चे के वजह से अभाव में जी रहे हैं। सरकार की दो बड़ी योजनाएं ‌GST तथा नोटबंदी; दोनों ने देश के लाखों लोगों की नौकरियां छीनली हैं। सरकार ने बजट में ऐसा कोई प्रावधान नहीं किया है जिससे उन्हें कोई लाभ हो जिनकी नौकरियां सरकार की गलती से गई है। गिर रही अर्थव्यवस्था के इस दौर में सरकार ने यदि शिक्षा,‌ स्वास्थ्य और रोजगार जैसे मुद्दों पर अब भी कोई विशेष पहल नहीं किया तो हम और गरीब होने की ओर बढ़ जाएँगे। ऐसा दौर जब देश के GDP का 60% से ज्यादा हिस्सा 5% लोगों के पास हो और रोजगार दिन प्रतिदिन कम होता जाए तो समझ जाइए की हम डूब रहे हैं। और सरकार फिर भी कहे की हम विकास ‌कर रहे हैं तो ‌समझ जाइए की हमें ‌केवल और केवल बेवकूफ बनाया जा रहा है।