
तीनों राज्यों के चुनावी समीकरण इस प्रकार है -
त्रिपुरा -
त्रिपुरा में भारतीय जनता पार्टी ने IPFT के साथ मिलकर चुनाव लड़ा, जबकि कांग्रेस ने लेफ्ट के साथ गठबंधन कर लिया था। भाजपा ने 60 में से 54 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे, जबकि IPFT के 6 प्रत्याशी चुनावी मैदान में थे। लेफ्ट ने त्रिपुरा में सबसे ज्यादा 43 प्रत्याशी उतारे थे। कांग्रेस के केवल 13 उम्मीदवार मैदान में थे। इसके अलावा CPI, RSP, AIFB भी इस गठबंधन का हिस्सा हैं। इन सभी ने एक-एक सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे थे। एक सीट पर गठबंधन ने निर्दलीय उम्मीदवार का समर्थन किया था। चुनाव के नतीजों में भाजपा ने सूबे में अपनी सत्ता बरकरार रखी। भाजपा को 32 सीटों पर जीत मिली और भाजपा के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ने वाली IPFT ने एक सीट पर जीत हासिल की है। कांग्रेस और लेफ्ट गठबंधन को बड़ा झटका लगा। कांग्रेस ने तीन सीटों पर जीत हासिल की। वहीं लेफ्ट के खाते में 11 सीटें आईं। मतलब गठबंधन करने के बावजूद दोनों को कुछ खास फायदा नहीं मिला। हालांकि, पहली बार चुनाव लड़ रही टिपरा मोथा ने बड़ी कामयाबी हासिल की। इनके 42 में से 13 प्रत्याशियों ने चुनाव में जीत दर्ज की।

नागालैंड -
नागालैंड की 59 सीटों पर चुनाव हुए। यहां जुन्हेबोटो की आकुलुटो सीट से भाजपा प्रत्याशी और निर्वतमान विधायक काजहेटो किन्मी निर्विरोध चुनाव जीत चुके हैं। ऐसे में इस सीट पर चुनाव नहीं हुए और बीजेपी और NDPP का गठबंधन हुआ। इसके तहत NDPP ने 40 और भाजपा ने 20 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे थे। कांग्रेस ने 23 और NPF ने 22 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे इस दौरान 19 निर्दलीय प्रत्याशियों ने भी चुनाव में ताल ठोकी थी। 2018 में यहां विधानसभा के सभी 60 सदस्य सरकार का हिस्सा बन गए थे, मतलब कोई भी विपक्ष में नहीं था। इस बार भी यहां भाजपा गठबंधन ने बड़ी जीत हासिल की और भाजपा + NDPP के 37 प्रत्याशी जीते। कांग्रेस यहां एक भी सीट नहीं जीत पाई और NPP के पांच उम्मीदवार चुनाव जीत गए। एनसीपी के 7 प्रत्याशी चुनाव जीत गए हैं।
मेघालय -
मेघालय में 60 में से 59 सीटों पर चुनाव हुए थे। एक सीट पर एक प्रत्याशी की मौत के चलते चुनाव रद्द हो गया इस दौरान किसी भी पार्टी को पूर्ण बहुमत नहीं मिला है। NPP सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। इनके 26 प्रत्याशियों ने जीत हासिल की। सर्वभारतीय तृणमूल कांग्रेस (TMC) 5, कांग्रेस 5 और बीजेपी 2 सीट जीती। इस नतीजे ने फिर से बीजेपी को मजबूत और विपक्ष को कमजोर कर दिया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी की भारत जोड़ों यात्रा भी इन चुनावों में बेअसर दिखाई पड़ती है। यहां बड़ी बात ये है कि लोकसभा चुनाव से पहले इन तीनों राज्यों की जनता ने जो वोट दिया है। शायद उसकी उम्मीद कांग्रेस को भी नहीं रही होगी। राहुल गांधी को एक बार फिर से अपनी रणनीति बदलनी होगी।

हालांकि राहुल गांधी ने कई बार कहा है कि उनकी यात्रा का चुनावों से कोई लेना-देना नहीं है, लेकिन इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि जब आप किसी सत्ताधारी पार्टी के कार्यों के विरोध में कोई यात्रा करते है तो उसे चुनावों से अलग नहीं किया जा सकता है। वहीं NCP को नागालैंड की जनता ने 7 सीट दी है। उसके नेतृत्व को स्वीकार करने की तरफ छोटा सा ही सही लेकिन इशारा है। वहीं मेघालय के वोटरों ने ममता बनर्जी की पार्टी TMC को पांच सीटें दी है। जिसके बाद से लोकसभा चुनाव को लेकर ममता बनर्जी का हौसला बढ़ा हुआ है। वहीं उन्होंने साफ कर दिया कि अगले साल होने वाले आम चुनाव में वो मैदान में अकेले उतरेंगी। उनकी पार्टी किसी दूसरी पार्टी के साथ गठबंधन नहीं करेंगी। कांग्रेस बहुत अच्छे से जानती है कि बिना गठबंधन के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली बीजेपी को केंद्र में आने से नहीं रोका जा सकता है। लेकिन विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के प्रदर्शन को देखकर दूसरी सभी विपक्ष की पार्टियां उससे हाथ मिलाने से शायद डर रही है।
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