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"नौकरी दें वरना पटना में होगा बड़ा आंदोलन" - ट्विटर पर Bihar_Needs_Teachers हुआ ट्रेंड

"नौकरी दें वरना पटना में होगा बड़ा आंदोलन" - ट्विटर पर Bihar_Needs_Teachers हुआ ट्रेंड
फोटो: "नौकरी दें वरना पटना में होगा बड़ा आंदोलन" - ट्विटर पर Bihar_Needs_Teachers हुआ ट्रेंड

“ट्विटर एक बड़ा प्लेटफ़ॉर्म है। हम इसपर कई बार डिजिटल आंदोलन कर चुके हैं लेकिन सरकार हमारी आवाज़ नहीं सुन रही है। इसका कारण ये है कि बड़े-बड़े न्यूज़ चैनल्स जिस तरह से राजनीति की ख़बरें दिखाते हैं, वो हमारी ख़बरें नहीं दिखाते। नौकरी या शिक्षा से उन्हें शायद कोई मतलब नहीं है।” 94000 शिक्षक बहाली के अभ्यर्थी सौरभ ये कहते कहते अवसाद से भर जाते हैं। पिछले 5-6 सालों से बिहार में शिक्षकों की कोई भर्ती नहीं हुई है।

नेताओं को युवा और नौकरी की याद बस चुनावों में आती है 
बिहार से लाखों की तादाद में युवा पलायन करते हैं। पलायन करने वाली जनसंख्या का एक बड़ा तबका चतुर्थ श्रेणी में लगा हुआ है। इसके पीछे रोज़गार के अवसर न होने के अलावा सबसे बड़ा कारण है बदतर शिक्षा व्यवस्था और शिक्षकों की कमी।

आँकड़े भयावह तस्वीर पेश करते हैं। बिहार में प्राथमिक शिक्षकों के 3 लाख से अधिक पद ख़ाली हैं। छात्र शिक्षक अनुपात भी सबसे ख़राब है। 2015-16 के बाद से शिक्षकों की कोई नियुक्ति नहीं हुई है।


बिहार में विधानसभा चुनावों के दौरान बेरोज़गारी का मामला खूब उछला। तेजस्वी यादव के नेतृत्व में राजद कांग्रेस गठबंधन ने सरकार बनने की सूरत में 10 लाख रोज़गार का वादा किया तो सत्तारूढ़ बीजेपी ने इस सरकार बनने पर 19 लाख रोज़गार का वायदा कर लिया। सौरभ कहते हैं “राजनैतिक दलों को युवाओं और नौकरियों की बात तभी याद आती है जब चुनाव होते हैं। चुनाव प्रचार के दौरान मनमोहक वादे किए जाते हैं लेकिन परिणामों के बाद न युवा याद रहते हैं न ही उनके मुद्दे।”

“वोटर भी कई बार अपनी सामाजिक पहचान से उपर नहीं उठते। और भी कई तरह के लोभ होते हैं। ये लोभ उनके वोटिंग का आधार बनते हैं। इसी कारण बेरोज़गारी के सवालों में घिरे रहने के बावजूद सत्तारूढ़ बीजेपी-जदयू एक बार फिर सरकार बना लेती है।” युवा हल्ला बोल के राष्ट्रीय परिषद के सदस्य अखिलेश आगे कहते हैं “वोटर के इसी लोभ के कारण राजनैतिक दल उन्हें गंभीरता से नहीं लेते लेकिन मुझे उम्मीद है कि धीरे-धीरे अपने हक़ में आवाज़ उठाने वाला युवा अगले चुनावों में युवाओं से वादाख़िलाफ़ी करने वाले दलों को सबक़ सिखाएँगे।”

तमाम आश्वासन हुए हैं फेल, शिक्षा मंत्री को शिक्षकों के मुद्दों से मतलब नहीं
ग़ौरतलब है कि बिहार के शिक्षा विभाग, सरकार के मंत्री आदि के लगातार दिए आश्वासन झूठे साबित हुए हैं। शिक्षा मंत्री विजय कुमार चौधरी ने ब्लाइंड केसेज़ की सुनवाई के मामले में कहा था कि 5 अप्रैल को ब्लाइंड केसेज की सुनवाई हो जाएगी और नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। शिक्षा मंत्री ने उस वक़्त कहा था कि उन्होंने ख़ुद एडवोकेट जनरल से बात करके केस की अर्जेंट हियरिंग के लिए रिक्वेस्ट की है। लेकिन 195वें नंबर पर सूचीबद्ध ब्लाइंड केसेज की सुनवाई नहीं हुई। 

उसके बाद कोरोना के हाहाकार के बीच अभ्यर्थियों की सिसकियों की आवाज़ दब गई। शिक्षा मंत्री, जिनपर पूरे प्रदेश के युवाओं की नज़र टिकी हुई है, वो हेल्थ अप्डेट्स देने में व्यस्त हैं। कोरोना की परिस्थितियों को देखते हुए ऐसे अप्डेट्स देना ग़लत नहीं है लेकिन जब शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों की नौकरी की उम्मीद ख़ुद वेंटीलेटर पर पड़ी हो, तब शिक्षा मंत्री का उस मुद्दे को लेकर मौन अख़्तियार कर लेना ग़लत है।

नियुक्ति नहीं मिलने की सूरत में बड़े आंदोलन की चेतावनी
ऐसे में युवा हल्ला बोल के राष्ट्रीय परिषद के सदस्य डॉ अखिलेश कहते हैं “युवा हल्ला बोल पूर्व की भाँति शिक्षा नियुक्ति के अभ्यर्थियों के साथ खड़ा है। जिस भी तरीक़े से संभव हो, चाहे कोर्ट जाना पड़े, या सड़क पर आंदोलन करना पड़े युवा हल्ला बोल इन अभ्यर्थियों की नियुक्ति की लड़ाई में कंधे से कंधा मिलाकर हमेशा खड़ा रहेगा।”

युवा हल्ला बोल के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनुपम ने अभ्यर्थियों को नियुक्ति न मिलने की स्थिति में पटना में बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है। “अगर सरकार की नीयत साफ़ है और वो युवाओं को नौकरियाँ देना चाहती है तो स्पेशल मेंशनिंग करके अर्जेंट हियरिंग करवाए।” - अनुपम ने कहा।