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क्या हैं भारत बंद के मायने?

क्या हैं भारत बंद के मायने?
फोटो: क्या हैं भारत बंद के मायने?

छह महीने के अंदर तीसरी बार भारत का पहिया रुक गया। भारत बंद हो गया। तोड़-फोड़, आगजनी, पत्थरबाजी और हिंसाओं के कारण देश को हज़ारों करोड़ का नुकसान हुआ। क्या हैं इस तरह के बंद के मायने? 2019 के आगामी चुनाव से इन भारत बंद की घटनाओं का क्या रिश्ता है? 

कब-कब हुआ भारत-बंद

2 अप्रैल को दलितों द्वारा SC-ST Act के विरोध में किया गया प्रदर्शन, ठीक आठ दिनों बाद आरक्षण के खिलाफ सवर्णों का भारत बंद और आज कांग्रेस के आह्वान पर 20 से अधिक राजनैतिक दलों का महँगाई और अन्य मुद्दों को लेकर किया जा रहा भारत बंद, बीजेपी के लिए चिंता का सबब हैं। 

बंद के मायने

ये बंद भारतीय जनता पार्टी के प्रति लोगों के डिगे हुए विश्वास की बानगी, पीएम मोदी की कम होती लोकप्रियता की पुष्टि और विपक्ष के ताकतवर होने का संकेत है। कार्यकाल के शुरुआती चार साल आराम से गुजर जाने के बाद बीजेपी की राह अब पथरीली दिख रही है। भारत बंद के अलावा महाराष्ट्र-तमिलनाडु में किसान आंदोलन, SSC के परीक्षार्थियों का प्रदर्शन, महिलाओं का रोष, पत्रकारों का गुस्सा, व्यापारियों की नाराज़गी भी बीजेपी सरकार की परेशानियों का कारण है। लगभग हर वर्ग मोदी सरकार से उखड़ा-उखड़ा दिख रहा है। 

पेट्रोल-डीजल की कीमतों से जनता त्रस्त

देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में पेट्रोल की कीमतों नें 88 रुपए का आँकड़ा पार कर लिया। अन्य शहरों में भी पेट्रोल ने 80 रुपए का आँकड़ा पार कर लिया है। डीजल की कीमतें भी लोगों को मुँह चिढ़ रही है। रुपये की कीमत किसी लगातार गिर रही है। महँगाई आसमान छूने पर आमादा है। इन समस्याओं को लेकर कांग्रेस ने भारत बंद का आह्वान किया।

मोदी सरकार के खिलाफ पहला राजनैतिक बंद

10 सितंबर का भारत बंद मोदी सरकार के कार्यकाल का पहला राजनैतिक बंद है। 20 से अधिक विपक्षी दलों के समर्थन के साथ कांग्रेस ने इस बंद को आयोजित किया। विपक्षियों का भरपूर साथ मिला कांग्रेस को। शरद पवार, शरद यादव, सीताराम येचुरी, संजय सिंह आदि नेताओं ने इस बंद में ज़ोर-शोर से हिस्सा लिया। पेट्रोल-डीज़ल की कीमतों, महँगाई और अन्य मुद्दों को इस बंद के ज़रिए सड़क पर लाने की कोशिश की। राहुल गाँधी ने बंद की शुरुआत राजघाट से की। और महात्मा गाँधी की समाधि पर मानसरोवर का जल चढ़ाया। लेकिन बिहार, मध्य-प्रदेश, उत्तर प्रदेश, नागालैंड, महाराष्ट्र आदि राज्यों में तोड़-फोड़, आगजनी, पत्थरबाज़ी की हिंसक घटनाएँ भी देखने को मिली। अनुमान के अनुसार इस बंद से देश को 25-30 हजार करोड़ का नुकसान होगा।

ख़ामोश भाजपा के लिए 2019 की राह होती जाएगी कठिन

भाजपा नेता रविशंकर प्रसाद ने सीधे तौर पर कहा कि पेट्रोल और डीजल की कीमतें उनके हाथ में नहीं है। इस तरह के बयान विपक्ष की सफलता ही मानी जाएगी। यूपीए सरकार के दौरान पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि को लेकर भाजपा सरकार ने तत्कालीन सराकर को घेर लिया था। लेकिन आज सत्ता में आने के बाद सरकार खामोश और चुप है। ये खामोशी जनता को अखर रही है। इस ख़ामोशी की आलोचना करके बीजेपी सत्ता तक पहुँची थी। खामोश रहकर सत्ता को बचा पाना आसान नहीं होगा। 

बंद के दौरान मंच पर विपक्षी नेताओं की मौज़ूदगी विपक्ष के शक्तिप्रदर्शन जैसा प्रतीत हो रहा था। 2019 के लोकसभा चुनावों से पहले कांग्रेस द्वारा आयोजित भारत बंद विपक्ष को लांमबंद करने में सफल दिखा। कहीं न कहीं इस बंद के ज़रिए महागठबंधन के नेता रूप में राहुल गाँधी की छवि सुधारने की सफल कोशिश हुई है।