पहले भी जा चुकी है अब्दुल्ला की सीट -
2017 विधानसभा चुनाव के दौरान समाजवादी पार्टी ने अब्दुल्ला को रामपुर के स्वार टांडा विधानसभा सीट से अपना प्रत्याशी बनाया था। अब्दुल्ला ने चुनाव में लगभग 50 हज़ार वोटों से जीत हासिल की थी, मगर अपना कार्यकाल पूरा ना कर सके। 2 साल 9 माह तक ही वह विधायक पद पर रहे। इनके प्रतिद्वंदी रहे नवाब काजिम अली खां ने अब्दुल्ला आज़म के चुनाव लड़ने के उम्र को लेकर आपत्ति दर्ज की थी। जिसमें हाईकोर्ट ने दोषी पाया था और इसके बाद अब्दुल्ला की विधानसभा सदस्यता रद्द हो गई थी।

हेट स्पीच मामले में आज़म खान को हुई थी सज़ा -
27 अक्टूबर 2022 को रामपुर की MP-MLA कोर्ट ने सपा नेता आज़म खान को साल 2019 के लोकसभा चुनाव में रामपुर के मिलक विधानसभा में एक चुनावी रैली के दौरान आपत्तिजनक भाषण और भड़काऊ टिप्पणियाँ करने के मामले में दोषी पाया था। इसके चलते आज़म खान को तीन साल की सजा सुनाई थी, साथ ही उनकी विधानसभा सदस्यता रद्द कर दी गई।

पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का भाजपा पर निशाना -
सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सत्तारूढ़ भाजपा पर आज़म खान और उनके परिवार के पीछे पड़ने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा भाजपा सरकार के निशाने पर आज़म खान हैं, फर्जी मुकदमों से लाद दिए जाते हैं। आज़म खान संविधान और लोकतंत्र और धर्म निरपेक्षता के लिए संघर्ष करने वाले नेता हैं, इसीलिए उन्हें निशाना बनाया जा रहा है।

अब्दुल्ला आज़म के पास क्या हैं अब विकल्प-
MP-MLA कोर्ट द्वारा सुनाए फैसले के खिलाफ सेशन कोर्ट में गुहार लगा सकते हैं। अगर सेशन कोर्ट से भी राहत ना मिली, तो हाईकोर्ट और वहां से भी ना मिली तो सुप्रीम कोर्ट तक का सफ़र करना पड़ेगा।
यह भी पढ़ें - /article/1087/kashmiri-pandit-employees-gave-challenge-lg-manoj-sinha

