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Waris Punjab De Sangathan :- अमृतपाल सिंह के आगे फेल दिखाई दे रहा पंजाब का सरकारी तंत्र !

Waris Punjab De Sangathan :-  अमृतपाल सिंह के आगे फेल दिखाई दे रहा पंजाब का सरकारी तंत्र !
फोटो: Waris Punjab De Sangathan :- अमृतपाल सिंह के आगे फेल दिखाई दे रहा पंजाब का सरकारी तंत्र !

पंजाब (Punjab) में ऑपरेशन अमृतपाल जारी है, और ‘वारिस पंजाब दे संगठन’ (Waris Punjab De Sangathan) का प्रमुख और कट्टरपंथी सिख नेता अमृतपाल सिंह (Radical Sikh leader Amritpal Singh) फरार है। पंजाब पुलिस (Punjab Police) पिछले तीन दिनों से अमृतपाल की तलाश में है, लेकिन उसका कुछ पता नहीं चल रहा है। ‘वारिस पंजाब दे संगठन’ (Waris Punjab De Sangathan) का प्रमुख और कट्टरपंथी सिख नेता अमृतपाल सिंह (Radical Sikh leader Amritpal Singh) एक अलग खालिस्तान (Khalistan) देश की मांग कर रहा है। जिसके बाद से वो सरकार और प्रशासन की नजर में था। इस बीच राज्‍य में मोबाइल-इंटरनेट पर प्रतिबंध 24 घंटे और बढ़ा दिया गया है।


 

अमृतपाल की तलाश के बीच उसके चाचा और ड्राइवर ने 20 मार्च को पंजाब पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है। वहीं अकाली दल सांसद हरसिमरत कौर बादल (Akali Dal MP Harsimrat Kaur Badal) ने आरोप लगाया कि "केंद्र और राज्य सरकार की मिलीभगत की वजह से अमृतपाल सिंह को अभी तक पकड़ा नहीं गया है" हरसिमरत कौर बादल ने एक टीवी चैनल पर बात करते हुए कहा कि "केंद्र सरकार के पास 50 कंपनियां है और आधी पंजाब पुलिस है, वो लोग क्या कर रहे हैं ? यह वह पंजाब पुलिस है जिसने 2016 में आर्मी के पहुंचने से पहले ही पाकिस्तान से आए आतंकियों को मार गिराया था।" अकाली दल की सांसद ने कहा, "सवाल यह है कि अमृतपाल सिंह गया कहां, क्या कोई पाकिस्तान से हेलीकॉप्टर आकर लेकर गया। यह जानबूझकर गेम खेला जा रहा है पंजाब के लोगों साथ में मैं चेतावनी देना चाहती हूं कि जानबूझकर गेम ना खेलें।" 


Akali Dal MP Harsimrat Kaur Badal

 

वहीं पंजाब में ‘वारिस पंजाब दे संगठन’ (Waris Punjab De Sangathan) के प्रमुख अमृतपाल सिंह के खिलाफ चल रही कार्रवाई का विरोध विश्व में फैले खालिस्तानी समर्थक कर रहे हैं। 19 मार्च को UK में भारतीय दूतावास के बाहर खालिस्तानियों ने प्रदर्शन के बाद तिरंगे का अपमान कर दिया। भारतीय राजनयिकों ने इसका विरोध किया और झंडे को वापस लगा दिया गया, लेकिन प्रदर्शनकारी दूतावास की बिल्डिंग के बाहर खालिस्तानी तिरंगा फहराते रहे। तुरंत कार्रवाई करते हुए भारत ने UK के सीनियर राजनयिक को समन भेज दिया।


 

इससे पहले भारत में भी पंजाब के अमृतसर में 23 फरवरी 2023 को 'वारिस पंजाब दे' संगठन के प्रमुख अमृतपाल की अगुवाई में उसके हजारों समर्थकों ने जमकर बवाल किया। खुलेआम तलवारें-बंदूकें लहराईं और Barricades तोड़ डाले। पुलिसवालों और अफसरों के सिर फोड़ दिए और अजनाला पुलिस थाने पर कब्जा कर लिया। इस घटना से खालिस्तान का समर्थन करने वाले सिख युवाओं के बीच अमृतपाल एक हीरो बनकर उभरा। उसे भिंडरावाला 2.0 तक कहा जाने लगा, जो सिस्टम की आंख में आंख डालने की जुर्रत रखता था। इस घटना के बाद पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार (Aam Aadmi Party Government of Punjab) की हर जगह किरकिरी हुई। करीब एक महीने बाद अमृतपाल सिंह पर एक्शन की तैयारी है, लेकिन वो पुलिस के शिकंजे से बचता दिखाई दे रहा है। वहीं उसके पिता ने आरोप लगाया है कि पुलिस उसके बेटा का एनकाउंटर करना चाहती है। 


कौन है अमृतपाल सिंह (Who is Amritpal Singh) - 

‘वारिस पंजाब दे संगठन’ (Waris Punjab De Sangathan) का प्रमुख और कट्टरपंथी सिख नेता अमृतपाल सिंह (Radical Sikh leader Amritpal Singh) का जन्म गांव जल्लूपुर खेड़ा, जिला अमृतसर में साल 1993 में हुआ था। अमृतपाल के पिता का नाम तरसेम सिंह है। अमृतपाल 19 साल की उम्र में ही 2012 में काम करने के लिए पंजाब से दुबई गया और क़रीब 10 साल यानी 2022 तक दुबई में ही रहा। इस दौरान उसके सिर पर ना पुलिस केस थे ना ही चेहरे पर दाढ़ी थी। जब वो भारत लौटा तो उसके सिर पर पगड़ी और चेहरे पर दाढ़ी आ गई। अमृतपाल किसान आदोलन के दौरान दीप सिद्धू के साथ दिल्ली बॉर्डर पर आया था (Amritpal came to Delhi border with Deep Sidhu during Farmers Protest), वह अगस्त 2022 में दुबई से भारत आ गया। उसने दोबारा केश रखकर सितंबर 2022 में दस्तारबंदी की और मोगा के गांव रोडे में दस्तारबंदी का बड़ा कार्यक्रम किया और दीप सिद्धू की संस्था ‘वारिस पंजाब दे संगठन’ (Waris Punjab De Sangathan) का प्रमुख बन गया। 

यही नहीं अमृतपाल ने पंजाब में धार्मिक यात्रा चलाई। वह युवाओं को अमृत छकाने लगा और खालिस्तान के नाम पर ग्रामीण युवाओं को जोड़ने लगा। इस के बाद अमृतपाल सिंह का 15 फरवरी 2023 को फेसबुक पोस्ट को लेकर वरिंदर सिंह से झगड़ा हो गया। 16 फरवरी 2023 को अजनाला में FIR दर्ज हो गई। अमृतपाल और उसके साथियों पर वरिंदर सिंह को अगवा कर प्रताड़ित करने का आरोप लगा। 16 फरवरी को अमृतपाल ने अजनाला थाना घेरने का अल्टीमेटम दिया, और 23 फ़रवरी को उसने और उसके साथियों ने अजनाला थाने को हथियार के साथ घेर लिया और हमला बोल दिया। इस हमले में कई पुलिस कर्मी घायल हो गए थे। इसके बाद पुलिस ने अमृतपाल सिंह के साथी को रिहा कर दिया था। अपने साथी लवप्रित को रिहा कराने के बाद अमृतपाल ने उसके साथ गोल्डन टेंपल तक मार्च भी निकाला और सभी को अपनी ताक़त दिखाने की कोशिश की।


Amritpal Singh

 

अमृतपाल सिंह के खिलाफ अब तक 4 केस दर्ज हो चुके हैं, जिसमें अजनाला में वरिंदर सिंह को अगवा कर मारपीट करने का आरोप, अमृतसर में 15 फरवरी को प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और सीएम के खिलाफ हेट स्पीच, मोगा में 19 फरवरी को प्रधानमंत्री और गृहमंत्री के खिलाफ हेट स्पीच का आरोप, अजनाला में हिंसा और थाने पर कब्जे के लिए पुलिसवालों को जख्मी करने का केस शामिल हैं। अमृतपाल सिंह के दबदबे का अंदाजा इससे ही लगाया जा सकता है कि पंजाब पुलिस (Punjab Police) ने अजनाला हिंसा के बाद अमृतपाल के खिलाफ दर्ज इन मामलों को आज तक सार्वजनिक नहीं होने दिया, क्योंकि अमृतपाल ने 23 फ़रवरी को डीजीपी को खुला चैलेंज किया था कि अगर अब दोबारा कोई केस दर्ज किया, तो वो फिर प्रदर्शन करने आएगा और इसके नतीजे की जिम्मेदार पुलिस होगी। पुलिस इन केसों को दबाकर अमृतपाल पर शिकंजा कसने का इंतजार कर रही है। अमृतपाल पुलिस के हाथों से दूर है वहीं सांसद हरसिमरत कौर बादल ने जो आरोप लगाए है, वो भी सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठा रहा है।

इन सबसे अलग जिस तरह देश के बाहर तिरंगे का अपमान किया गया। उन लोगों पर भारत सरकार को सख्त से सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। साथ ही अमृतपाल के साथ-साथ खालिस्तान की मांग करने वाले लोगों पर भी नकेल कसनी चाहिए। 



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