धनखड़ ने आगे कहा, "भाजपा के पीयूष गोयल ने राहुल गांधी के अमेरिका दौरे के दौरान दिए गए भाषण पर आपत्ति जताई थी और लोकसभा सांसद से माफी की मांग की थी। इस पर कांग्रेस ने कड़ी प्रतिक्रिया दी थी। इस मामले में उपराष्ट्रपति ने यह फैसला सुनाया था कि कानून इस मुद्दे को उठाने से नहीं रोकता। मुझे कोई आपत्ति नहीं है अगर कुछ गलत होता है, पर विपक्ष इसे सही से समझ नहीं पा रहा है।"
विपक्ष का नोटिस और राज्यसभा उपसभापति की प्रतिक्रिया: विपक्षी दलों द्वारा 10 दिसंबर को राज्यसभा के महासचिव को सौंपे गए नोटिस में राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ पर पक्षपातपूर्ण तरीके से सदन की कार्यवाही संचालित करने का आरोप लगाया गया था और उन्हें उपराष्ट्रपति पद से हटाने की मांग की गई थी। इस नोटिस पर कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, द्रमुक, समाजवादी पार्टी सहित कई विपक्षी दलों के 60 नेताओं ने हस्ताक्षर किए थे। हालांकि, कांग्रेस की सोनिया गांधी, नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, द्रमुक नेता तिरुचि शिवा और तृणमूल कांग्रेस के नेता डेरेक ओब्रायन ने इस नोटिस पर हस्ताक्षर नहीं किए थे।
राज्यसभा उपसभापति हरिवंश ने विपक्ष का यह नोटिस खारिज कर दिया था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि धनखड़ ने सदन की कार्यवाही में पक्षपात किया है। उपसभापति ने इसे तथ्यहीन और प्रचार प्राप्त करने का प्रयास बताया और कहा कि यह नोटिस उपराष्ट्रपति की प्रतिष्ठा को धूमिल करने के उद्देश्य से जल्दबाजी में तैयार किया गया था।





