यूसुफ पठान: बागी सांसदों का विद्रोह
यूसुफ पठान: पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की हालिया हार के बाद 20 सांसदों ने पार्टी से विद्रोह किया और राष्ट्रीय नागरिक पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में शामिल हो गए। यह कदम स्पष्ट रूप से राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के समर्थन के लिए उठाया गया है। हालाँकि, अब बागी सांसदों के बीच असंतोष उत्पन्न हो रहा है, जिससे उनके समूह में दरार पड़ने के संकेत मिल रहे हैं।
रिपोर्टों के अनुसार, विद्रोही सांसदों में से तीन मुस्लिम सांसद हैं जो मुर्शिदाबाद की मुस्लिम बहुल सीटों से चुने गए हैं। इनमें पूर्व क्रिकेटर यूसुफ पठान का नाम भी शामिल है, जो बहरामपुर से सांसद हैं।
बीजेपी से दूरी का कारण
सूत्रों के मुताबिक, ये बागी सांसद बीजेपी से करीबी संबंध बनाने को लेकर चिंतित हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि इससे उनके चुनावी वोट बैंक पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। उनका कहना है कि बीजेपी के करीब जाना उनके क्षेत्र की जनता के प्रति धोखा देने जैसा होगा। यूसुफ पठान के अलावा, अबू ताहिर खान और खलीलुर रहमान भी इस लिस्ट में शामिल हैं।
हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई एनडीए की बैठक में इन तीनों सांसदों ने भाग नहीं लिया, जबकि शुभेंदु अधिकारी की एक बैठक में वे मौजूद रहे। इसका कारण उन्होंने मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाने के मुद्दे पर अपनी बात रखने की आवश्यकता बताई।
अबू ताहिर का बयान
बीते दिनों सांसद अबू ताहिर ने स्पष्ट किया कि वे 'एनडीए में नहीं हैं', फिर भी उन्होंने हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी द्वारा आयोजित नाश्ते में भाग लिया। मुर्शिदाबाद से सांसद ताहिर ने कहा कि इस कार्यक्रम में शामिल होने का उनका उद्देश्य केवल लोगों के मुद्दे उठाना था।
उन्होंने बताया कि इसमें राज्य की मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान मतदाताओं के नाम हटाने, मस्जिदों में लाउडस्पीकर पर पाबंदी और उनके संसदीय क्षेत्र में नई रेलवे लाइन की मांग जैसे मुद्दे शामिल थे। उन्होंने यह भी कहा कि यह बैठक उनकी चिंताओं को सीधे प्रधानमंत्री के समक्ष रखने का एक अवसर था, न कि बीजेपी को समर्थन देने का कोई संकेत।
ममता बनर्जी का समर्थन
यूसुफ पठान: कुछ सांसद, जिनमें कल्याण बनर्जी भी शामिल हैं, अभी भी ममता बनर्जी के समर्थन में खड़े हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बागी सांसद सभी को गुमराह कर रहे हैं। बनर्जी ने कहा कि इन सांसदों ने स्पीकर को पत्र देकर कहा है कि वे NCPI के सदस्य हैं, जो पहले से ही एनडीए का हिस्सा है।
इस प्रकार, टीएमसी में विद्रोह के बाद भी बागी सांसदों के बीच आपसी एकता की कमी स्पष्ट है, जो पार्टी की राजनीति को और जटिल बनाता है।
Read This Also:- FCRA बिल पर राजदूत ने अमेरिकी सांसद के आरोपों को नकारा!





