केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा में विधेयक पेश करते हुए स्पष्ट किया कि इसका संबंध केवल वक्फ बोर्डों और उनकी संपत्तियों से है, न कि मुस्लिम धार्मिक प्रथाओं से। उन्होंने कहा कि सरकार वक्फ बोर्डों को समावेशी और धर्मनिरपेक्ष बनाना चाहती है तथा यह कानून मस्जिदों के प्रबंधन से जुड़ा नहीं है।
उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा विधेयक के अनुसार वक्फ बोर्ड में विभिन्न मुस्लिम संप्रदायों और महिलाओं का प्रतिनिधित्व होगा। मंत्री ने विपक्ष पर लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाया और कहा कि 2013 में यूपीए सरकार द्वारा किए गए संशोधनों के कारण वक्फ कानून का दुरुपयोग बढ़ा।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि गैर-मुस्लिमों को वक्फ में कोई अधिकार नहीं दिया गया है और यह विधेयक मुस्लिम धार्मिक संपत्तियों में हस्तक्षेप नहीं करेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष झूठ फैलाकर अल्पसंख्यकों को भ्रमित कर रहा है।
भाजपा नेता रविशंकर प्रसाद ने विपक्ष पर संविधान का चुनिंदा उपयोग करने का आरोप लगाया और कहा कि विधेयक वक्फ संपत्तियों के पारदर्शी प्रबंधन और लैंगिक समानता को बढ़ावा देगा।
टीडीपी के कृष्ण प्रसाद टेनेटी ने विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि वक्फ संपत्तियों का सही उपयोग होना चाहिए।
जेडीयू के राजीव रंजन सिंह ने इसे पारदर्शिता लाने वाला कानून बताया और कहा कि वक्फ बोर्ड मुसलमानों के हित में काम करने वाला ट्रस्ट है, लेकिन इसका दुरुपयोग हो रहा था।
समाजवादी पार्टी के मोहिबुल्लाह ने इसे धार्मिक समानता के अधिकारों का उल्लंघन बताया।
शिवसेना के श्रीकांत शिंदे ने कहा कि इस विधेयक का नाम "यूएमईईडी" (एकीकृत वक्फ प्रबंधन सशक्तीकरण, दक्षता और विकास) रखा गया है, जिससे अल्पसंख्यकों को प्रगति की नई राह मिलेगी।
Read This Also:- राज्यसभा में वक्फ संशोधन विधेयक पर शक्ति परीक्षण, सरकार के लिए कितनी मुश्किल होगी राह?
Read This Also:- राज्यसभा में वक्फ संशोधन विधेयक पर शक्ति परीक्षण, सरकार के लिए कितनी मुश्किल होगी राह?





