मिड डे मील से ज़्यादा खर्चा प्रचार प्रसार पर।
क्या लिखा है न्यूज़लॉंड्री की रिपोर्ट में?
यह खबर न्यूज़लाउंड्री की एक रिपोर्ट पर आधारित है जिसे रिपोर्ट किया है बसंत कुमार ने। उत्तराखंड में एडवर्टिजमेंट का यह खेल शुरू हुआ जुलाई 2021 में, जब पुष्कर सिंह धामी उत्तराखंड के मुख्यमंत्री बने। उनके पद संभालने के कुछ महीनों बाद ही सरकार ने वे नियम बदल दिए, जिनसे तय होता था कि किन टीवी चैनलों को सरकारी एडवर्टिजमेंट का पैसा मिलेगा। जैसे ही नियम बदले, पूरे देश के मीडिया हाउसों की तरफ पब्लिक फंड्स का बहाव शुरू हो गया। साल 2020-21 में, जब त्रिवेंद्र सिंह रावत मुख्यमंत्री थे, एडवर्टिजमेंट्स पर कुल 77 करोड़ रुपये खर्च हुए। अगले ही साल, धामी के कार्यकाल में यह खर्चा सीधा बढ़कर 227 करोड़ रुपये तक पहुँच गया। यानी लगभग तीन गुना। विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखकर भी देखें तो यह खर्चा बहुत बड़ा था। इतना ही नहीं, 2024-25 तक आते-आते सालाना एडवर्टिजमेंट बजट 290 करोड़ रुपये तक पहुँच गया। हर रोज़ औसतन 55 लाख रुपये एडवर्टिजमेंट्स पर उड़ाए गए, यानी हर दिन लाखों रुपये सिर्फ़ इस बात पर खर्च किए गए कि मुख्यमंत्री कितने सक्रिय हैं, कौन-कौन से कार्यक्रम हुए, कौन-कौन से फंड जारी हुए और कौन सा त्योहार कैसे मनाया गया। यह खर्च इतने बड़े पैमाने पर हुआ कि बड़े बड़े राज्य इसमें पीछे रह गए, जबकि उत्तराखंड की आबादी बाकी बड़े राज्यों के मुकाबले बहुत छोटी है।
कहाँ कितना खर्च हुआ?
सबसे बड़ा हिस्सा गया टेलीविज़न पर यानी उत्तराखंड सरकार ने टीवी को एडवर्टिजमेंटों के खेल में सबसे बड़ा हथियार बनाया। पिछले चार वर्षों में टीवी पर खर्च किया गया पैसा लगभग 402 करोड़ रुपये रहा, यानी कुल एडवर्टिजमेंट बजट का आधा हिस्सा। राष्ट्रीय चैनल, स्थानीय चैनल और यहाँ तक कि उन चैनलों को भी करोड़ों का एडवर्टिजमेंट दिया गया जिनकी असल पहुंच उत्तराखंड में थी ही नहीं। टीवी के बाद अख़बारों में भी लगभग 129.6 करोड़ रुपये के एडवर्टिजमेंट दिए गए, डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर 61.9 करोड़ रुपये के, रेडियो पर 30.9 करोड़ रुपये के, फिल्मों के माध्यम से 23.4 करोड़ रुपये के, आउटडोर एडवर्टिजमेंट पर 49.5 करोड़ रुपये, एडवर्टिजमेंट एजेंसियों को 128.7 करोड़ रुपये और SMS और WhatsApp मैसेज पर 40.4 करोड़ रुपये। जब पीएम मोदी ने 2021 में केदारनाथ दौरा किया, तो उस पर भेजे गए फोन मैसेज पर 49 लाख रुपये खर्च हुए। यही नहीं, मुख्यमंत्री से मिलने या उनके किसी कार्यक्रम की जानकारी देने के लिए भी लाखों रुपये खर्च हुए। इसके अलावा बुकलेट्स और प्रिंट मटीरियल पर कुल 56 करोड़ रुपये खर्च किए गए। जिनमें “Vikalp Rahit Sankalp, Naye Irade, Yuva Sarkar” नाम की बुकलेट पर 4.33 करोड़ रुपये, “New schemes, new initiatives, decisive decisions” पर 8.38 करोड़ रुपये, और “Sankalp Sustainable Development” पर 5 करोड़ रुपये।
खबरों के नाम पर ANI ने दिखाया एडवर्टिजमेंट।
इन सबके अलावा ANI ने जिस तरीके से इस प्रचार में भूमिका निभाई वो सबसे अलग है। ANI, जो एक राष्ट्रीय न्यूज़ एजेंसी है आमतौर पर खबरें तुरंत जनता तक पहुँचाने के लिए जानी जाती है। लेकिन उत्तराखंड सरकार ने ANI को भी जनता की सूचना देने से ज्यादा अपनी प्रचार मशीन के रूप में इस्तेमाल किया। पिछले कुछ वर्षों में ANI को उत्तराखंड सरकार से लगभग 4.15 करोड़ रुपये मिले, सिर्फ़ “मुख्यमंत्री और सरकार के कार्यक्रमों की कवरेज” के नाम पर। यह पैसा बड़े पैमाने पर उनके कार्यक्रमों, दौरे, बैठकों और त्योहारों की खबरें बनाने में गया। ANI ने पैसे लेने के बाद पूरी तरह से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के इवेंट्स को कवर करना शुरू किया। चाहे दिल्ली में मोदी से मीटिंग हो, लंदन में ग्लो बल इन्वेस्टर्स समिट हो, केदारनाथ दौरे हों या प्रदेश में कोई लोकल कार्यक्रम ANI ने हर कदम की खबर बनाई और सोशल मीडिया और वेबसाइट पर लगातार अपडेट दी।
उदाहरण के लिए, 2 अप्रैल 2023 को ANI ने खबर दी कि मुख्यमंत्री अगले दिन पीएम मोदी से मिलने वाले हैं, 11 बजे और अपडेट आया कि वे दिल्ली के लिए रवाना हो चुके हैं, और अगले दिन रिपोर्ट आई कि बैठक हो गई। यही नहीं, उनके हर छोटे से छोटे इवेंट को भी खबर बना दिया गया जैसे उनके बर्थडे ग्रीटिंग्स, हरएला त्यौहार की शुभकामनाएं, विधानसभा सत्र की गतिविधियां और बीजेपी के जिला कार्यालयों के कार्यक्रम। लेकिन सबसे बड़ी बात यह है कि यह सब पैसा जनता के पैसे से हुआ, और इन कवरेज पर कहीं यह नहीं लिखा गया कि यह पेड प्रमोशन है। यानी ANI ने हमारे सामने खबरें दिखाई, लेकिन यह स्पष्ट नहीं था कि यह सरकार द्वारा भुगतान किए गए एडवर्टिजमेंट या प्रचार का हिस्सा है। जनता सोच रही थी कि यह न्यूज़ है, लेकिन असल में यह सरकारी इवेंट्स और प्रचार की पैकेजिंग थी। इस तरह, सूचना और प्रचार का अन्तर ही मिटा दिया गया।
Read This Also:- CJI गवई पर जूता उछालने वाले वकील पर अरविंद केजरीवाल ने की सख्त कार्रवाई की मांग
Read This Also:- CJI गवई पर जूता उछालने वाले वकील पर अरविंद केजरीवाल ने की सख्त कार्रवाई की मांग





