तृणमूल कांग्रेस में आंतरिक संघर्ष
सोमवार को तृणमूल कांग्रेस (TMC) के दो गुटों के बीच का संघर्ष और भी तीव्र हो गया। डेमोक्रेटिक टीएमसी के प्रमुख ऋतब्रत बनर्जी ने आरोप लगाया कि उनके गुट के दस्तावेज ले जा रहा ट्रक हरियाणा बॉर्डर के निकट एक हमले का शिकार हुआ। उन्होंने कहा कि कुछ अनजान व्यक्तियों ने ट्रक को रोकने और उसमें मौजूद शपथ पत्र (एफिडेविट) छीनने का प्रयास किया।
बनर्जी ने बताया कि ट्रक में दस्तावेजों के साथ जा रहे कार्यकर्ताओं ने इस प्रयास का विरोध किया। ये दस्तावेज 24 अक्टूबर को कोलकाता से सड़क मार्ग से दिल्ली भेजे जाने वाले थे, और ऋतब्रत के गुट का दावा है कि इन्हें चुनाव आयोग की निर्धारित समयसीमा के भीतर पहुंचाना अनिवार्य था।
सोशल मीडिया पर आरोपों की बौछार
ऋतब्रत बनर्जी ने अपने आरोपों को सोशल मीडिया पर साझा किया। उन्होंने कहा कि जबकि विरोधी गुट ने चार्टर्ड फ्लाइट से दस्तावेज भेजे, उनके कार्यकर्ता सड़क मार्ग से जा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि एक चार्टर्ड फ्लाइट ने 25 अक्टूबर की शाम को कालीघाट से एफिडेविट को दिल्ली पहुंचाया।
उन्होंने आगे कहा कि उनके कार्यकर्ता 24 अक्टूबर की सुबह दस्तावेज लेकर रवाना हुए थे और बाद में ट्रक पर कब्जा करने का प्रयास हुआ। बनर्जी ने कहा कि आधे घंटे पहले इस ट्रक पर कब्जा करने और दस्तावेज छीनने की कोशिश की गई थी, लेकिन उनके कार्यकर्ताओं ने बहादुरी से इसका विरोध किया।
ममता गुट का विरोध
ममता बनर्जी के गुट ने ऋतब्रत के आरोपों को खारिज कर दिया है। राज्यसभा सांसद डोला सेन ने कहा कि इस विवाद का निर्णय अंततः जनता करेगी। लोकसभा सांसद कल्याण बनर्जी ने सवाल उठाया कि अगर ट्रक को सीआरपीएफ की सुरक्षा प्राप्त थी, तो उसे कैसे रोका जा सकता है।
उन्होंने यह भी पूछा कि कोलकाता से दिल्ली जा रहे ट्रक को हरियाणा का मार्ग क्यों अपनाना पड़ा। कल्याण बनर्जी ने आरोप लगाया कि यह मामला राजनीति से प्रेरित है और ऋतब्रत के गुट को भाजपा के उच्च नेताओं का समर्थन प्राप्त है। उनके अनुसार, यह सब एक नाटक है जो भाजपा के समर्थन से किया जा रहा है।
पार्टी के भीतर की शक्ति संघर्ष
यह विवाद 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के बाद टीएमसी की पहचान और नियंत्रण को लेकर चल रही व्यापक लड़ाई का हिस्सा है। ऋतब्रत के गुट का दावा है कि पार्टी के अधिकांश चुने हुए विधायक उनके साथ हैं, जिसके आधार पर उन्होंने चुनाव आयोग से खुद को असली तृणमूल कांग्रेस मान्यता देने की मांग की है।
चुनाव आयोग ने दोनों पक्षों के दावों पर विचार करते हुए पार्टी का नाम और चुनाव चिह्न फ्रीज कर दिया है। वर्तमान में दोनों गुट अलग-अलग काम कर रहे हैं और चुनाव आयोग को अपने दावों के समर्थन में सबूत प्रस्तुत कर रहे हैं।





