बैठक में उठाए गए मुद्दे
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ हाल ही में हुई बैठक में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की। इस बैठक में उन्होंने विशेष रूप से दो मुख्य मांगों को प्राथमिकता दी। रिपोर्ट्स के अनुसार, दक्षिणी जोनल काउंसिल में पहली बार भाग लेते हुए थलपति विजय ने नीट परीक्षा और परिसीमन विधेयक पर दक्षिण भारत के राजनीतिक प्रतिनिधित्व की सुरक्षा की आवश्यकता को प्रमुखता से रखा।
इसके साथ ही, उन्होंने अंतरराज्यीय मादक पदार्थों की समस्या, नीली अर्थव्यवस्था और तटीय सुरक्षा के मुद्दों पर बेहतर सहयोग की भी आवश्यकता जताई।
नीट परीक्षा में राज्य को छूट की मांग
थलपति विजय ने नीट परीक्षा के मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री अमित शाह से चर्चा करते हुए राज्य को इस परीक्षा से छूट देने की मांग की। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, विजय ने बताया कि यह कदम ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के लिए लाभदायक होगा। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य के मेडिकल कॉलेजों में 12वीं कक्षा के अंकों के आधार पर सीटें भरने की अनुमति दी जानी चाहिए।
यह पहली बार नहीं है जब तमिलनाडु की किसी सरकार ने नीट के मुद्दे को उठाया है। पूर्व की सरकारों ने भी इस पर लगातार आवाज उठाई है। हाल ही में पीएम मोदी के साथ बैठक में भी विजय ने इसी मांग को दोहराया था, जो हाल में हुए नीट पेपर लीक विवाद के बाद और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।
परिसीमन विधेयक पर चिंताएं
परिसीमन विधेयक के संबंध में थलपति विजय ने अपनी चिंताओं को भी केंद्रीय गृह मंत्री के सामने रखा। उन्होंने कहा कि दक्षिणी राज्यों में यह धारणा है कि जनसंख्या आधारित परिसीमन उनके राजनीतिक प्रतिनिधित्व को कमजोर कर सकता है। विजय ने स्पष्ट किया कि दक्षिणी राज्य जनसंख्या नियंत्रण, मानव विकास और आर्थिक विकास में अग्रणी रहे हैं, और उनके कार्यों को राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के सफल प्रदर्शन के रूप में देखा जाना चाहिए।
उन्होंने इस बात का भी आग्रह किया कि परिसीमन के बाद संसद में राज्य के प्रतिनिधित्व में किसी प्रकार की कमी नहीं होनी चाहिए। विजय ने कहा, 'सार्वजनिक नीति ऐसी होनी चाहिए कि जो राज्यों के हितों का ध्यान रखे और उन्हें अनजाने में दंडित न करे।'
केंद्र सरकार का आश्वासन
केंद्र सरकार ने पहले ही यह आश्वासन दिया है कि दक्षिण भारत के राज्यों के प्रतिनिधित्व प्रतिशत में कोई कमी नहीं की जाएगी। फिर भी, दक्षिणी राज्यों में भाजपा विरोधी दलों का यह तर्क है कि 2011 की जनसंख्या के आधार पर होने वाले परिसीमन से उत्तर भारत के राज्यों को लाभ होगा, क्योंकि पिछले कुछ दशकों में उत्तर भारत की जनसंख्या में अधिक वृद्धि हुई है।
इस संदर्भ में, दक्षिणी पार्टियां निरंतर इस परिसीमन का विरोध कर रही हैं, जिससे स्थिति में और अधिक जटिलता आई है।





