सियांग प्रोजेक्ट के खिलाफ बढ़ते विरोध
अरुणाचल प्रदेश में प्रस्तावित 11,200 मेगावाट के सियांग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट (SUMP) के खिलाफ उत्पन्न हुई हिंसा के चलते रविवार को स्थिति बेहद तनावपूर्ण बनी हुई है। केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने इस स्थिति पर काबू पाने के लिए रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) की दो कंपनियां, लगभग 500 जवान, तुरंत अरुणाचल प्रदेश भेजने का निर्णय लिया है।
इन जवानों को नवी मुंबई से भारतीय वायु सेना (IAF) के विशेष परिवहन विमान के माध्यम से एयरलिफ्ट करके हिंसा प्रभावित क्षेत्रों में तैनात किया जा रहा है। इसके अलावा, क्षेत्र में सीआरपीएफ की कुछ इकाइयां पहले से ही मौजूद हैं।
धारा 163 का लागू होना
पासीघाट में शुक्रवार रात हुई आगजनी की घटनाओं और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष कलिंग मोयोंग समेत तीन नेताओं के घरों में तोड़फोड़ के बाद जिला प्रशासन ने पूरी सतर्कता बरतने का निर्णय लिया है। इस संदर्भ में ईस्ट सियांग जिला प्रशासन ने पासीघाट, मेबो और रुकसिन क्षेत्रों में 5 या उससे अधिक लोगों के एकत्रित होने, जुलूस निकालने और हथियार लेकर चलने पर सख्त पाबंदी लगा दी है।
इस प्रकार, BNSS की धारा 163 को लागू कर दिया गया है। इसके तहत सरकारी या निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, हिंसा भड़काने या कानून-व्यवस्था को बाधित करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के आदेश जारी किए गए हैं।
हिंसक झड़पें और मुख्यमंत्री की अपील
अधिकारियों के अनुसार, शनिवार तड़के तक प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें जारी रहीं, जिसमें कई पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। यह झड़पें भारी पथराव के चलते हुईं।
अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने हिंसा को लेकर चिंता प्रकट करते हुए आंदोलनकारी संगठनों से अपील की है कि वे हिंसक रास्ता छोड़कर बातचीत के लिए आगे आएं। उन्होंने कहा, 'सरकार के दरवाजे हमेशा खुले हैं। जो भी संगठन या एसोसिएशन SUMP प्रोजेक्ट पर चर्चा करना चाहता है, उनका स्वागत है।'
विवाद का कारण और सरकार का रुख
आदि बाने केबांग यूनाइटेड, SUMP प्रभावित क्षेत्र युवा एसोसिएशन और सियांग स्वदेशी किसान मंच जैसे संगठनों का कहना है कि यह विशाल बांध सियांग नदी घाटी के पर्यावरण को नष्ट कर देगा और स्थानीय स्वदेशी समुदायों को अपनी पुश्तैनी भूमि से विस्थापित होना पड़ेगा।
हालांकि, केंद्र और राज्य सरकार का मानना है कि तिब्बत में यारलुंग त्संगपो (सियांग) नदी पर चीन द्वारा बनाए जा रहे विशाल बांध से उत्पन्न जल संकट या बाढ़ को रोकने के लिए यह वॉटर-स्टोरेज प्रोजेक्ट आवश्यक और रणनीतिक है।





