स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की जमानत याचिका
आशुतोष ब्रह्मचारी ने आरोप लगाया है कि माघ मेला 2026 और महाकुंभ 2025 के दौरान मठ में रह रहे नाबालिग बच्चों के साथ यौन उत्पीड़न हुआ। इस गंभीर आरोप के मद्देनजर प्रयागराज की विशेष पॉक्सो कोर्ट ने पुलिस को एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया। इसके बाद झूंसी पुलिस ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की जमानत याचिका और उनके शिष्य मुकुंदानंद के खिलाफ एफआईआर दर्ज की।
हाईकोर्ट ने दी थी राहत
25 मार्च को इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस जितेंद्र कुमार सिन्हा की सिंगल बेंच ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य को अग्रिम जमानत प्रदान की थी। कोर्ट ने गिरफ्तारी से राहत देते हुए कुछ शर्तें भी लगाई थीं। हालांकि, शिकायतकर्ता के वकीलों का कहना है कि हाईकोर्ट ने जमानत देते समय महत्वपूर्ण कानूनी तथ्यों और साक्ष्यों को नजरअंदाज किया, जिसे सुप्रीम कोर्ट में अविमुक्तेश्वरानंद मामले का निपटारा चुनौती के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सबकी नजर
अब इस मामले की दिशा सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी है। यदि सर्वोच्च न्यायालय इस याचिका को स्वीकार करता है और सुनवाई करता है, तो ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं। फिलहाल हाईकोर्ट द्वारा गिरफ्तारी पर लगी रोक कायम है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट का रुख इस पूरे मामले में अहम मोड़ साबित हो सकता है।
आगे की कानूनी प्रक्रिया
सुप्रीम कोर्ट में याचिका स्वीकार होने पर शंकराचार्य और उनके शिष्य के खिलाफ अग्रिम जमानत रद्द होने का खतरा बढ़ सकता है। इस मामले की सुनवाई न केवल धार्मिक प्रतिष्ठा रखने वाले व्यक्तियों के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि न्याय व्यवस्था और पॉक्सो एक्ट की प्रभावशीलता पर भी नजर रखी जाएगी।
इस केस की संवेदनशीलता और गंभीरता के कारण, देशभर में इस पर कानूनी और सामाजिक ध्यान केंद्रित हो गया है। अब सबकी निगाहें सुप्रीम कोर्ट की ओर हैं, और अगले फैसले का असर केवल आरोपी पक्ष तक ही नहीं, बल्कि समाज में न्याय और सुरक्षा की धारणा पर भी पड़ेगा।
Read This Also:- PM मोदी राज्यों के मुख्यमंत्रियों से मिडिल ईस्ट पर चर्चा करेंगे
Read This Also:- PM मोदी राज्यों के मुख्यमंत्रियों से मिडिल ईस्ट पर चर्चा करेंगे





