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सुप्रिया सुले का सरकार पर हमला, पीएम मोदी की तस्वीर हटाने पर एफआईआर और अजित पवार की मौत पर चुप्पी

राजनीतिक दलों के बीच महाराष्ट्र में ताजा विवाद उत्पन्न हुआ है, जब सुप्रिया सुले ने पीएम मोदी की तस्वीर हटाने के मामले में अमित ठाकरे के खिलाफ एफआईआर की तुलना अजित पवार की विमान दुर्घटना में हुई मौत पर चुप्पी से की।

सुप्रिया सुले का सरकार पर हमला, पीएम मोदी की तस्वीर हटाने पर एफआईआर और अजित पवार की मौत पर चुप्पी
फोटो: सुप्रिया सुले का सरकार पर हमला, पीएम मोदी की तस्वीर हटाने पर एफआईआर और अजित पवार की मौत पर चुप्पी

राजनीतिक विवाद की शुरुआत

महाराष्ट्र में राज ठाकरे के पुत्र अमित ठाकरे द्वारा पीएम मोदी की तस्वीर हटाने के मुद्दे ने राजनीतिक हलचल को जन्म दिया है। इस मामले में अमित ठाकरे के खिलाफ दर्ज एफआईआर पर प्रतिक्रिया देते हुए राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार) की नेता सुप्रिया सुले ने राज्य सरकार की आलोचना की है। उन्होंने बताया कि पीएम मोदी की तस्वीर हटाने पर एक ओर एफआईआर हुई, वहीं पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार की विमान दुर्घटना में हुई मृत्यु पर अब तक कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई।


सुप्रिया सुले ने मीडिया से वार्ता के दौरान ठाणे में प्रस्तावित रिंग मेट्रो और अमेजन डेटा सेंटर जैसे बड़े परियोजनाओं का भी विरोध किया। उनके अनुसार, स्थानीय निवासी इन परियोजनाओं के खिलाफ हैं। उन्होंने कहा, "आप सिर्फ दीवार से एक तस्वीर हटाने के लिए उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर देते हैं, लेकिन एक बड़ी विमान दुर्घटना में जिसके कारण मौजूदा उपमुख्यमंत्री की जान चली गई, उस पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।"


परिवार के सदस्यों के प्रति संवेदना

बारामती सांसद ने कहा, "हमारा भाई चला गया और वे सत्ता का आनंद ले रहे हैं।" उन्होंने अजित पवार गुट के सांसदों और विधायकों पर भी निशाना साधते हुए पूछा, "मेरे भाई की मौत के मामले में एफआईआर क्यों नहीं दर्ज की गई? हमने अपने परिवार के एक महत्वपूर्ण सदस्य को खो दिया। वर्तमान सरकार का हिस्सा होने के बावजूद क्या इनके 40 विधायकों या 8-9 मंत्रियों में से किसी ने इस मामले में एक शब्द भी कहा है?"


सुप्रिया सुले ने यह भी कहा कि, "हमारा भाई चला गया और वे सत्ता का आनंद ले रहे हैं।" उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस गंभीर मामले में उचित जांच की आवश्यकता है।


महंगी परियोजनाओं पर प्रतिक्रिया

पुणे में प्रस्तावित अमेजन डेटा सेंटर पर भी सुप्रिया ने विरोध जताया। उन्होंने कहा कि स्थानीय निवासियों ने उनके पास आकर इस परियोजना का विरोध किया। इस पर उन्होंने ठाणे के सांसद नरेश म्हस्के से संपर्क कर स्थानीय लोगों की चिंताओं को उन तक पहुंचाया।


सुले ने करोड़ों रुपये की रिंग मेट्रो परियोजना की भी आलोचना की, यह कहते हुए कि ठाणे के निवासियों को बेहतर सार्वजनिक बस सेवा की आवश्यकता है। उन्होंने सवाल उठाया, "जो काम बस सेवा के जरिए 500 रुपये में हो सकता है, उस पर 1,000 रुपये क्यों खर्च किए जाएं?"


बुनियादी सुविधाओं की अनदेखी

सुप्रिया सुले ने महाराष्ट्र में सड़कों की स्थिति पर भी चिंता व्यक्त की, यह कहते हुए कि राज्य में यात्रा करना "सड़कों के बीच गड्ढों से होकर गुजरना" होता है। उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत सरकार बुनियादी सुविधाओं की अनदेखी करते हुए महंगी और बड़ी परियोजनाओं पर ध्यान केंद्रित कर रही है।


उनका कहना था कि सरकार गरीबों, वंचितों और पीड़ितों के लिए धन का आवंटन नहीं कर रही, जबकि महंगी परियोजनाओं के लिए हजारों करोड़ रुपये उपलब्ध हैं।