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सुप्रीम कोर्ट ने TMC के नाम और चुनाव चिह्न पर दोनों गुटों को दिया 20 दिन का समय

सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को तीन महीने में अंतिम निर्णय सुनाने का निर्देश दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने TMC के नाम और चुनाव चिह्न पर दोनों गुटों को दिया 20 दिन का समय
फोटो: Supreme Court Grants 20 Days to TMC Factions for Name and Symbol Dispute

TMC नाम और चिह्न का विवाद

पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के असली नाम और चुनाव चिह्न 'जोड़ा फूल और घास' को लेकर चल रहे कानूनी संघर्ष में सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (AITC) के दो विरोधी गुटों, ममता बनर्जी और रीताब्रता बनर्जी खेमे को चुनाव आयोग के सामने अपने दस्तावेज और उत्तर प्रस्तुत करने के लिए 20 दिन का अतिरिक्त समय प्रदान किया है.


अदालत ने स्पष्ट किया है कि दोनों पक्षों को अपने दावों के समर्थन में दस्तावेज पेश करने का अधिकार होगा, साथ ही एक-दूसरे के सबूतों पर सवाल उठाने का भी अवसर मिलेगा.


वकीलों की बहस और समय सीमा

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान, दोनों पक्षों के वकीलों ने अपनी-अपनी दलीलें प्रस्तुत कीं। ममता बनर्जी की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील और सांसद कल्याण बनर्जी ने बताया कि रीताब्रता बनर्जी के गुट ने चुनाव आयोग के समक्ष अपनी आवश्यक याचिकाएं नहीं प्रस्तुत की हैं.


इसके जवाब में, रीताब्रता बनर्जी गुट (डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस) के वरिष्ठ अधिवक्ता के. परमेश्वर ने अदालत को बताया कि दुर्गा पूजा और दशहरा के त्योहारों के कारण उन्हें आवश्यक स्टाम्प पेपर नहीं मिल सके, जिससे दस्तावेज जमा करने में विलंब हुआ। अदालत ने इस दलील को स्वीकारते हुए डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस को अपना काउंटर एफिडेविट दाखिल करने के लिए 10 दिन और ममता खेमे को अपना जवाब दाखिल करने के लिए 10 दिन का अतिरिक्त समय दिया.


चुनाव आयोग के निर्णय और नई पहचान

17 सितंबर को, चुनाव आयोग ने टीएमसी के मूल नाम 'ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' और मान्यता प्राप्त प्रतीक चिह्न 'घास-फूल' के इस्तेमाल पर रोक लगा दी थी, जिसके बाद दोनों गुटों को अस्थायी नाम और चुनाव चिह्न आवंटित किए गए। ममता बनर्जी के गुट का नया नाम 'ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' (MAITC) और चुनाव चिह्न 'फुटबॉल खिलाड़ी' है, जबकि रीताब्रता बनर्जी के गुट का नाम 'डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस' (DTC) और चुनाव चिह्न 'लिफाफा' है.


सुप्रीम कोर्ट ने पहले 28 सितंबर को चुनाव आयोग को निर्देश दिया था कि दोनों पक्षों द्वारा आवश्यक दस्तावेज पेश करने के बाद तीन महीने के भीतर, यानी कुल चार महीने में, चुनाव चिह्न आदेश, 1968 के तहत अंतिम निर्णय लिया जाए.


राजनीतिक विवाद का जल्द निपटारा

पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग द्वारा टीएमसी के नाम और चुनाव चिह्न को फ्रीज किए जाने के निर्णय के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। अदालत ने इस मामले की तुलना शिवसेना विवाद से करते हुए, दोनों पक्षों को अपनी बात रखने का पूरा अवसर देने के साथ-साथ चुनाव आयोग को इस राजनीतिक विवाद का समाधान शीघ्र करने का निर्देश दिया.