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सौरव दास फोटो विवाद: भाजपा नेता ने CJP पर साधा निशाना।

सौरव दास फोटो विवाद: उमर खालिद को 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से संबंधित मामलों में गिरफ्तार किया गया था और वह वर्तमान में जेल में हैं।

सौरव दास फोटो विवाद: भाजपा नेता ने CJP पर साधा निशाना।
फोटो: Sourav Das Photo Row

सौरव दास की फोटो का विवाद

सौरव दास फोटो विवाद: कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के नेता सौरव दास की एक पुरानी तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई है, जिसमें वह दिल्ली दंगे के आरोपी उमर खालिद के साथ नजर आ रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के केरल अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने इस तस्वीर को एक्स प्लेटफॉर्म पर साझा कर सीजेपी को घेरा है। चंद्रशेखर ने भावुक अपील करते हुए छात्रों और उनके अभिभावकों से समझदारी से चयन करने का आग्रह किया।


इसके साथ ही, चंद्रशेखर ने एक्स पर सौरव दास की एक पुरानी पोस्ट को भी साझा किया, जिसमें दास ने उमर खालिद को 'सबसे बहादुर' बताते हुए उनका सम्मान व्यक्त किया था।


उमर खालिद की गिरफ्तारी पर टिप्पणी

सौरव दास फोटो विवाद: उमर खालिद को 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से संबंधित मामलों में गिरफ्तार किया गया था और वह वर्तमान में जेल में हैं। भाजपा नेता ने बिना किसी का नाम लिए छात्रों और अभिभावकों से सवाल किया कि क्या वे अपने भविष्य का निर्धारण उन लोगों के हाथों में सौंपना चाहते हैं, जिनकी विचारधारा भारत को विभाजित करने वाली है।


उन्होंने कहा, ''सभी असली छात्रों और उनके माता-पिता को इस तस्वीर और इसके संदेश को गंभीरता से देखना चाहिए। समझदारी से तय करें कि आप किसके साथ हैं।''


हिंसक प्रदर्शनों के प्रति चेतावनी

राजीव चंद्रशेखर ने यह भी स्पष्ट किया कि हिंसक विरोध प्रदर्शनों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जो भी व्यक्ति देश, लोकतंत्र या उसकी अखंडता को कमजोर करने का प्रयास करेगा, उसका विरोध अवश्य होना चाहिए।


सीजेपी की चेतावनी

सौरव दास फोटो विवाद: सीजेपी ने मंगलवार को सरकार को चेतावनी दी है कि यदि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकियां वापस नहीं ली गईं और दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई, तो पार्टी पुनः देशव्यापी आंदोलन शुरू करेगी। पार्टी ने आरोप लगाया कि हाल के सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश को छात्रों के खिलाफ उपयोग किया जा सकता है।


सीजेपी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने एक बयान में कहा कि पार्टी के विरोध प्रदर्शन से संबंधित जनहित याचिकाओं पर उच्चतम न्यायालय का अंतरिम आदेश उस आश्वासन के खिलाफ है, जो केंद्र सरकार ने 36 दिन के आंदोलन को समाप्त करने के लिए बातचीत में दिया था। दास ने कहा, 'यह निर्देश 25 जुलाई को भारत सरकार द्वारा युवाओं को दिए गए आश्वासन के विपरीत है, जिसमें कहा गया था कि प्राथमिकियां वापस ली जाएंगी और शांतिपूर्ण आंदोलन में शामिल प्रदर्शनकारियों को निशाना नहीं बनाया जाएगा।'


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