नेशनल कॉन्फ्रेंस में बढ़ती बगावत
जम्मू-कश्मीर की सत्ताधारी पार्टी नेशनल कॉन्फ्रेंस में आंतरिक विवादों की स्थिति उत्पन्न हो गई है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला द्वारा हाल में किए गए कैबिनेट फेरबदल के बाद कई विधायक असंतुष्ट हैं। इन नाराज विधायकों ने श्रीनगर में विधायक कैसर जमशेद लोन के निवास पर एक बैठक का आयोजन किया, जिसमें पार्टी के वरिष्ठ विधायक मुबारक गुल और अब्दुल मजीद लर्मी भी शामिल थे।
रिपोर्टों के अनुसार, इस बैठक में लगभग 17 नेशनल कॉन्फ्रेंस और एक निर्दलीय विधायक शामिल हुए। इन विधायकों ने उन मंत्रियों को हटाने की मांग की है, जिन्होंने अपने मंत्रालय के कार्यकाल के दो साल पूरे कर लिए हैं। हालांकि, बैठक के बाद इन नाराज विधायकों की तरफ से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया।
रुहुल्लाह मेहदी का इस्तीफा
इस बीच, नेशनल कॉन्फ्रेंस के श्रीनगर से सांसद रुहुल्लाह मेहदी ने घोषणा की है कि वह तीन नवंबर को पार्टी से इस्तीफा देंगे और अपनी लोकसभा सीट छोड़ देंगे। उन्होंने पार्टी नेतृत्व पर जनता से किए गए वादों को निभाने में विफल रहने का आरोप लगाया है। मेहदी लंबे समय से पार्टी के फैसलों से असंतुष्ट चल रहे हैं।
उनका इस्तीफा उस समय सामने आया है जब पार्टी को हाल में हुए मंत्रिमंडल फेरबदल के बाद आंतरिक असंतोष का सामना करना पड़ रहा है। शुक्रवार को श्रीनगर में विधायकों की बैठक ने पार्टी के भीतर निरंतर बढ़ते असंतोष को उजागर किया। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने हाल ही में कश्मीर घाटी से चार नए चेहरों को मंत्रिमंडल में शामिल किया है।
मुबारक गुल का विरोध
नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेता मुबारक गुल के निवास पर भी असंतोष स्पष्ट नजर आया। उनके निर्वाचन क्षेत्र के समर्थक कैबिनेट से उनका नाम हटाए जाने के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे। गुल ने मीडिया से कहा, 'मेरे कार्यकर्ता और समर्थक बहुत आक्रोशित हैं। मेरे साथ जिस तरह का व्यवहार हुआ है, वे चाहते हैं कि मैं पार्टी छोड़ दूं। मैं पिछले 50 वर्षों से पार्टी का हिस्सा रहा हूं और इस तरह के बर्ताव से आहत हूं।'
गुल को बाद में पार्टी का महासचिव नियुक्त किया गया था, जिसे फारूक अब्दुल्ला का मनाने का प्रयास माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री का कैबिनेट विस्तार
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के निर्देश पर उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने अली मोहम्मद सागर, मीर सैफुल्ला, शमीम फिरदौस और अल्ताफ अहमद वानी (कल्लू) को मंत्रिपद की शपथ दिलाई। इस विस्तार के बाद जम्मू-कश्मीर की मंत्रिमंडल में घाटी के प्रतिनिधियों की संख्या में वृद्धि हुई है। वर्तमान में नौ सदस्यीय मंत्रिमंडल में सात मंत्री कश्मीर से हैं, जबकि केवल दो जम्मू क्षेत्र के हैं।
यह ध्यान देने योग्य है कि केंद्र शासित जम्मू-कश्मीर की 90-सदस्यीय विधानसभा में मंत्रिमंडल में अधिकतम नौ मंत्री हो सकते हैं। मंत्रिमंडल के विस्तार से पहले सभी मंत्रियों ने फेरबदल की प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए मुख्यमंत्री को औपचारिक रूप से अपने इस्तीफे सौंप दिए थे।





