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शिव सेना से होगा मुंबई मेयर चुनाव? महायुति में खटपट की अटकलों के बीच एकनाथ शिंदे ने दिया जवाब

मुंबई मेयर चुनाव पिछले कुछ दिनों से यह चर्चा जोरों पर थी कि गठबंधन में — खासकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और शिव सेना (एकनाथ शिंदे गुट) — के बीच आगामी BMC..|

शिव सेना से होगा मुंबई मेयर चुनाव? महायुति में खटपट की अटकलों के बीच एकनाथ शिंदे ने दिया जवाब
फोटो: Mumbai mayoral election

मुंबई मेयर चुनाव महायुति में खटपट और मेयर पद की चिंता


मुंबई मेयर चुनाव पिछले कुछ दिनों से यह चर्चा जोरों पर थी कि गठबंधन में — खासकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और शिव सेना (एकनाथ शिंदे गुट) — के बीच आगामी BMC चुनावों और मेयर पद को लेकर मतभेद है।

ऐसा इसलिए क्योंकि दोनों दलों का जनाधार, रीति-रिवाज और राजनीतिक महत्व अलग-अलग है, और सीट-बंटवारे की प्रक्रिया अभी अंतिम नहीं हुई है। भोली-भाली इन चर्चाओं के बीच, यह सवाल उठ रहा था — क्या मुंबई का मेयर पद फिर से शिव सेना को मिलेगा, या भाजपा इस बार आगे आएगी?

एकनाथ शिंदे का बयान: “मुंबई मेयर चुनाव महायुति से”


इस सवाल पर जब पत्रकारों ने एकनाथ शिंदे से पूछा कि क्या महापौर (मेयर) पद फिर से शिव सेना को मिलेगा, तो उन्होंने स्पष्ट-स्पष्ट दावा करने से इनकार कर दिया। उनके मुताबिक, “मेयर ऑफ मुंबई महायुति से होगा।”

उनके दोहराए गए इस जवाब को कई अर्थों में देखा जा रहा है: एक ओर यह महायुति की साझेदारी को बनाए रखने की ओर इशारा है, वहीं दूसरी ओर यह बताता है कि अभी सीट बंटवारे पर अंतिम निर्णय नहीं हुआ है।

दरअसल, 25 साल तक अनडिवाइडेड शिव सेना ने मुंबई मेयर पद पर कब्जा रखा था। शिंदे ने यह भी कहा कि आगामी मुंबई मेयर चुनाव में जीत सुनिश्चित करना और महायुति गठबंधन की ताकत दिखाना उनकी प्राथमिकता है — सीटों के बंटवारे से पहले चुनावी मेरिट (elective merit) को महत्व दिया जाएगा।

BMC चुनाव और गठबंधन की रणनीति


पिछले दिनों, महायुति नेताओं — देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे — की एक बैठक हुई, जिसमें तय किया गया कि महाराष्ट्र की सभी नगर निकाय और निगम चुनाव महायुति के रूप में मिलकर लड़ा जाएगा। इसमें मुंबई भी शामिल है।

हालाँकि, सीट बंटवारे की बातचीत अभी जारी है: शिव सेना (शिंदे-गुट) ने मुंबई मेयर चुनाव की 227 सीटों में से 90–100 सीटों की मांग की है। भाजपा और शिव सेना दोनों ही समझते हैं कि मुंबई में उनके संयुक्त प्रयासों से ही जीत संभव है — और बंगले/कस्बों जैसा फील्ड-वर्क, पार्टी वर्कर नेटवर्क और शहर में सक्रियता के मद्देनज़र संवाद बनाये रखना जरूरी है। फिर भी, इस तालमेल के बावजूद, भीतर-खाने कुछ खटपट — जैसे प्रत्याशियों की दावेदारी, सीटों का बंटवारा, और पार्टी वर्कर्स के रूझान — चर्चा में है।

आगे क्या अपेक्षित है: मेयर कौन होगा?


महायुति का साझा दायित्व – आज Eknath Shinde का बयान mahayuti-first रुख को दर्शाता है; यानी मेयर पद केवल एक पार्टी का नहीं, बल्कि पूरे गठबंधन का फैसला बनकर उभरेगा।

सीट-बंटवारा तय करेगा दिशा – शिव सेना व भाजपा में जितना संतुलन रहेगा, महापौर का निर्णय उतना ही पारदर्शी और सामूहिक होगा। 90–100 सीटों की मांग शिव सेना ने रखी है।

परंपरा vs राजनीति – हालांकि 25 साल तक मेयर पद पर शिव सेना का कब्जा रहा, लेकिन अब बदलते राजनीतिक समीकरण, गठबंधन की रणनीति और सीट-बंटवारे ने पारंपरिक धारणा को जटिल बना दिया है।

नगर निकाय चुनाव से पहले रणनीतिक समीकरण – निकाय चुनावों से पहले गठबंधन को अंदरूनी मतभेद झेलने पड़ सकते हैं; लेकिन यदि मेयर पद पर संयुक्त निर्णय हुआ, तो महायुति को फायदा हो सकता है।