रैली का बचाव और नागरिक अधिकार
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने मंगलवार को दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 नवंबर को आयोजित होने वाली पार्टी की रैली का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि यदि सरकार और चुनाव आयोग नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन कर रहे हैं, तो कांग्रेस चुप बैठने वाली नहीं है। थरूर ने स्पष्ट किया कि विपक्षी पार्टी होने के नाते यह कांग्रेस की जिम्मेदारी है कि वह लोगों की आवाज उठाए।
इसके साथ ही, थरूर ने व्यापारियों की चिंताओं पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस छोटे कारोबारियों और दुकानदारों के खिलाफ नहीं है, बल्कि पार्टी चाहती है कि ये व्यापारी आगे बढ़ें और prosper करें।
दुकानदारों का समर्थन और रैली का स्थान
कांग्रेस नेता ने आगे कहा कि पार्टी ने दुकानदारों को यह स्पष्ट संदेश दिया है कि कांग्रेस उनके हितों की रक्षा करती है। उन्होंने कहा कि पार्टी नहीं चाहती कि रैली की वजह से किसी के रोजगार या दैनिक कामकाज पर नकारात्मक प्रभाव पड़े। थरूर ने यह भी बताया कि कांग्रेस ने पहले रैली के लिए विभिन्न स्थानों पर अनुमति मांगी थी, लेकिन अशोका होटल के लॉन सहित कुछ स्थानों पर इजाजत नहीं मिली, इसलिए रामलीला मैदान एकमात्र विकल्प रह गया।
उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि वह इस मुद्दे के परिणामों पर गंभीरता से विचार करे।
ब्रिक्स संसदीय मंच पर चर्चा
थरूर ने 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच को सफल आयोजन के रूप में चित्रित किया। उन्होंने कहा कि इसमें शामिल देशों के सांसदों ने कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की, जिसमें संयुक्त घोषणा पत्र को लेकर कुछ मतभेद भी सामने आए। हालांकि, वार्ता के बाद सभी सदस्य देशों ने आपसी सहमति से समस्या का समाधान निकाल लिया।
उन्होंने यह भी बताया कि भारत ने ब्रिक्स की अध्यक्षता चीन को सौंप दी है और भारत को इस मंच के माध्यम से सहयोग एवं संसदीय कूटनीति में सक्रिय भूमिका निभाते रहना चाहिए।
बीजेपी सांसद हेमंग जोशी ने भी 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच को सफल बताया और कहा कि बैठक में टिकाऊ विकास, सुरक्षा, साइबर सुरक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, तकनीक, कृषि और कारोबारी सहयोग जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई।





