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चीनी की बढ़ती कीमतों पर संजय राउत का केंद्र सरकार पर हमला

संजय राउत ने केंद्र सरकार की एथेनॉल नीति को चीनी की बढ़ती कीमतों का कारण बताया, जबकि पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी सरकार के फैसलों पर सवाल उठाए। दोनों नेताओं ने आम जनता के परेशानियों की ओर ध्यान आकर्षित किया।

चीनी की बढ़ती कीमतों पर संजय राउत का केंद्र सरकार पर हमला
फोटो: चीनी की बढ़ती कीमतों पर संजय राउत का केंद्र सरकार पर हमला

संजय राउत का आरोप

त्यौहारों के नजदीक आते ही देश में चीनी की कीमतें लगातार बढ़ती जा रही हैं, जिससे मिठाईयों के दाम भी उछलने लगे हैं। इस स्थिति को केंद्र सरकार की नई एथेनॉल नीति का परिणाम मानते हुए, शिवसेना (UBT) के सांसद संजय राउत ने सरकार पर तीखा प्रहार किया है। उन्होंने केंद्र की एनडीए सरकार के 12 वर्षों के कार्यकाल पर कटाक्ष करते हुए कहा कि मोदी जी के शासन में केवल मौत सस्ती हुई है।


संजय राउत ने कहा, "इन 12 सालों में क्या सस्ता हुआ है? मौत सस्ती हो गई है, हादसे सस्ते हो गए हैं, आत्महत्याएं सस्ती हो गई हैं। चीनी उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले गन्ने की सप्लाई अब इथेनॉल बनाने के लिए मोड़ी जा रही है।" उन्होंने सरकार के मंत्रियों से युवाओं के घर जाकर उनकी समस्याओं को समझने का आग्रह किया।


गहलोत का बयान

इससे पहले, राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने केंद्र सरकार को आलोचना का निशाना बनाते हुए कहा कि पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने का निर्णय बिना तैयारी के लिया गया है। गहलोत ने सरकार के फैसले को जनहित के खिलाफ बताया और कहा कि इससे जनता को कई मोर्चों पर नुकसान हो रहा है।


गहलोत ने कहा कि गन्ने का अधिकांश हिस्सा अब चीनी उत्पादन के बजाय एथेनॉल बनाने में लगाया जा रहा है, जिससे बाजार में चीनी की कमी हो गई है। उन्होंने चेतावनी दी कि पिछले 15 दिन में चीनी की कीमतों में 14 से 17 रुपये प्रति किलो की वृद्धि हुई है। इसके साथ ही, एथेनॉल ब्लेंडिंग से वाहनों के इंजन को भी नुकसान हो रहा है।


आम जनता की दुर्दशा

गहलोत ने स्पष्ट किया कि यह स्थिति सीधे तौर पर आम आदमी की मेहनत की कमाई की लूट है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरे खेल में केवल कुछ उद्योगपति और सरकार को लाभ हो रहा है, जबकि आम जनता त्रस्त हो रही है।


उन्होंने कहा, "एथनॉल उत्पादन से हवा और पानी प्रदूषण के मामलों में भी लगातार वृद्धि हो रही है। केंद्र सरकार ने बिना तैयारी के ऐसे भ्रामक फैसले लिए हैं जिसका खामियाजा देश की जनता भुगत रही है। मोदी सरकार अब जनता का भरोसा खो चुकी है।"