नेशनल कॉन्फ्रेंस में असंतोष की लहर
जम्मू-कश्मीर में हाल ही में मंत्रिमंडल विस्तार के बाद सत्ताधारी पार्टी नेशनल कॉन्फ्रेंस में बगावत की स्थिति उत्पन्न हो गई है। कैबिनेट में फेरबदल के बाद कई विधायक असंतोष का इजहार कर रहे हैं। शुक्रवार को श्रीनगर में कुछ विधायकों ने पार्टी की आगे की रणनीति को लेकर एक बैठक भी की।
इसी परिस्थिति में, सांसद रुहुल्लाह मेहदी ने पार्टी और संसद सदस्यता से इस्तीफा देने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि वह 3 नवंबर को अपना इस्तीफा सौंपेंगे और पार्टी पर जनता से वादे तोड़ने का आरोप लगाया।
पिता की पुण्यतिथि पर इस्तीफे की घोषणा
रुहुल्लाह मेहदी के पिता आगा सैयद मेहदी की 26वीं पुण्यतिथि 3 नवंबर को है। मेहदी बडगाम से तीन बार नेकां के विधायक रह चुके हैं। उनकी पुण्यतिथि के अवसर पर वे बहिश्त-ए-ज़हरा पार्क में एक जनसभा को संबोधित करेंगे।
यह मौके पर इस्तीफे की घोषणा ने पार्टी के भीतर बढ़ती नाराजगी को और बढ़ा दिया है, खासकर कैबिनेट में हालिया बदलावों के संदर्भ में।
पार्टी की नीतियों पर सवाल उठाते हुए
मेहदी का संभावित इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब नेशनल कॉन्फ्रेंस आंतरिक असंतोष का सामना कर रही है। शुक्रवार को श्रीनगर में पार्टी विधायकों की बैठक में उनकी नाराजगी स्पष्ट हुई। सांसद ने पार्टी नेतृत्व पर जनता के साथ धोखा देने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा, 'उनका समूह जम्मू-कश्मीर को अपनी निजी जागीर समझता है और चाहता है कि लोग उन्हें वोट दें और फिर अपनी औकात में रहें।' मेहदी ने यह भी कहा कि पार्टी उन्हें मूर्ख समझती है जो अपने वादों के बीच का फर्क नहीं समझते।
वायदों की अनदेखी पर नाराजगी
रुहुल्लाह मेहदी ने यह भी कहा कि उन्होंने अनुच्छेद 370 की बहाली, कैदियों की रिहाई और अपने अधिकारों की सुरक्षा की मांग की थी, जिस पर सत्ता हासिल की गई। लेकिन जब उन्होंने इन वादों के पूरा करने की उम्मीद की, तो उन्हें ही मूर्ख समझा गया।
उन्होंने कहा, 'हम इस अपमान का हिस्सा बनने से इनकार करते हैं। यह सीट जनता से किए गए वादे के आधार पर जीती गई थी, और मैं इस धोखे का भागीदार बनने के बजाय अपनी सीट छोड़ दूंगा।' पिछले दो वर्षों से, रुहुल्लाह ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और उनकी सरकार की आलोचना की है।





