बागी सांसदों को मिली राहत
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सायोनी घोष सहित तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 बागी सांसदों को महत्वपूर्ण राहत प्रदान की है, जिन्होंने पार्टी छोड़कर 'नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया' (NCPI) का चुनाव किया है। बिरला ने दलबदल विरोधी कानून के तहत इन सांसदों को अयोग्य ठहराने की मांग को लेकर ममता बनर्जी की ओर से दायर याचिकाओं के संदर्भ में उन्हें 22 सितंबर तक जवाब देने का समय दिया है।
सूत्रों के अनुसार, यह मोहलत NCPI सांसदों द्वारा 26 अगस्त को जारी नोटिस का जवाब देने के लिए अतिरिक्त समय मांगने के बाद दी गई। इससे पहले, 26 अगस्त के नोटिस में इन सांसदों से सात दिनों के भीतर जवाब मांगा गया था। स्पीकर बिरला ने TMC नेता अभिषेक बनर्जी द्वारा अयोग्यता की मांग को लेकर दायर याचिकाओं के बाद यह नोटिस जारी किए थे।
अयोग्यता की याचिकाओं की पृष्ठभूमि
इन 20 बागी सांसदों ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की हार के बाद जून में ममता बनर्जी की पार्टी छोड़कर एनसीपीआई में शामिल होने की घोषणा की थी। स्पीकर बिरला ने 25 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट द्वारा अभिषेक बनर्जी की याचिका पर सुनवाई की अनुमति मिलने के बाद यह नोटिस जारी किया, जिसमें बागी सांसदों की अयोग्यता पर शीघ्र निर्णय लेने का अनुरोध किया गया था।
बिरला ने पहले इन सांसदों को जवाब देने के लिए सात दिनों का समय दिया था। मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत और अन्य न्यायाधीशों की पीठ ने बनर्जी की याचिका पर नोटिस जारी करने का निर्देश दिया था, जिसमें अयोग्यता की कार्यवाही पर तेजी से कार्रवाई करने की बात कही गई थी।
बागी सांसदों की कानूनी स्थिति
सूत्रों का कहना है कि अतिरिक्त समय मिलने से बागी सांसदों को कुछ राहत मिली है और वे अयोग्यता की कार्यवाही के कानूनी एवं राजनीतिक प्रभावों पर विचार कर रहे हैं। यह सांसद दलबदल विरोधी प्रावधानों की प्रासंगिकता और स्पीकर के समक्ष रखे जाने वाले तर्कों को लेकर कानूनी सलाह भी ले रहे हैं।
इस स्थिति में, सांसदों को अपनी सदस्यता को बनाए रखने के लिए गंभीर कानूनी रणनीतियों पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता होगी, ताकि दलबदल विरोधी कानून के अंतर्गत उन्हें अयोग्य ठहराने से रोका जा सके।





