RCom के मामले क्या हुआ?
एसबीआई द्वारा करवाए गए फोरेंसिक ऑडिट में यह बड़ी गड़बड़ी उजागर हुई कि RCom ने Netizen Engineering Pvt Ltd को 5,525 करोड़ रुपये की अग्रिम राशि (capital advance) उपलब्ध कराई। यह अग्रिम राशि लक्षित कंपनी की वित्तीय स्थिति को देखते हुए अत्यधिक और असामान्य मानी जा रही है। वहीं इस पैसे का उपयोग कैसे हुआ और क्या रिपोर्ट सही है — इस पर सीबीआई ने जांच शुरू कर दी है।
कब और कहाँ सामने आया मामला?
यह मामला 2020 में शेयर की गई रिपोर्ट में सामने आया। SBI के ऑडिट और फोरेंसिक जांच के दौरान यह एरर उजागर हुआ। उसके बाद CBI ने अगस्त 2025 में संबंधित दस्तावेजों और स्थानों पर छापेमारी शुरू की।
किसने पहली बार उजागर किया?
SBI (State Bank of India) द्वारा आयोजित फोरेंसिक ऑडिट ने इस गड़बड़ी को पहली बार उजागर किया। CBI की जांच में RCom और Anil Ambani को शामिल किया गया है।
क्यों मामला गरमा गया?
5,525 करोड़ की अग्रिम राशि किसी नो-नेट-वर्थ कंपनी को देना अत्यधिक आश्चर्यजनक और संदिग्ध दिखता है।
फोरेंसिक रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि Netizen ने Millenium Private Network से बड़ी संपत्ति (लगभग 6,000 करोड़ की) खरीदी, और यह एसेट तत्काल RCom Infrastructure Ltd को स्थानांतरित कर दी गयी, जिससे एडवांस राशि राइट-ऑफ कर दी गई।
कैसे आगे बढ़ा?
CBI ने SBI की शिकायत और ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर RCom और Anil Ambani के खिलाफ अपराध साजिश, धोखाधड़ी और विश्वासघात जैसे आरोपों के तहत एफआईआर दर्ज की है।
संबंधित स्थानों पर छापेमारी की गई है और मामले को अदालतों में आगे ले जाया जा रहा है।
RCom द्वारा Netizen Engineering को 5,525 करोड़ की राशि अग्रिम रूप में देना स्पष्ट रूप से एक खाता-प्रणाली में दी गई गड़बड़ी बताता है। जांच अब CBI की अदालत में अपराधिक मामले के रूप में आगे बढ़ रही है। Anil Ambani फिलहाल आरोपों से इनकार कर चुके हैं और अदालत में अपनी सफाई पेश कर रहे हैं। यह मामला बड़े पैमाने पर कर्ज, धोखाधड़ी और कॉर्पोरेट गवर्नेंस को लेकर गहरे सवाल खड़े कर रहा है।
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